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Jalaun News: वो किस गली में आएंगे कुछ तो खबर मिले, ये आरजू है उनकी नजर से नजर मिले
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जालौन। बाराहीं देवी मेला एवं विकास प्रदर्शनी में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में शनिवार की रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन व मुशायरा का आयोजन किया गया। कवियों की प्रस्तुतियां सुनकर श्रोतागण वाह वाह कर उठे। शायरा शमीम कौशर आगरा ने पढ़ा-वो किस गली में आएंगे कुछ तो खबर मिले, ये आरजू है उनकी नजर से नजर मिले।’’
ऋतु चतुर्वेदी कोंच ने सुनाया-बहाना कोई भी लेकर मुझे हर दिन चिढ़ाता था, न जाने क्यों मुझे फिर भी कभी गुस्सा न आता था। डॉ. मकीन सिद्दीकी की गजल मेरे हिस्से का सूरज खा गया वो, मुझे खुद को जलाना पड़ रहा है। सुनकर श्रोता तालियां बजाने के लिए मजबूर हो गए।
हास्य कवि प्रदीप दिहुलिया चरखारी ने जब चाहते हो जीवन को सफल बनाना यदि, पत्नी की हां में हां मिलाते जाइए। पढ़ा तो श्रोता काफी देर तक खिलखिलाते रहे। गरिमा जालौनी ने पढ़ा न मैं राधा बनी न मैं रुक्मणि बनीं, सांवरी बन गई मैं सांवरे के लिए। महेंद्र मिहोनवी ने पढ़ा कोई काम न दूजा सांपों की सिर्फ पूजा, तुम जहर से लबालब भर तो नहीं गए हो। संजीव कुलश्रेष्ठ पुखरायां ने पढ़ा सफर सहेजे हुए नींद के सताए हैं, गमों की गोद में रहकर भी मुस्कुराते हैं। खलील कैफी, कार्यक्रम संयोजक अंचल शर्मा ने काव्य पाठ कर खूब तालियां बटोरीं। संचालन करीम खां करीम ने किया।
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ऋतु चतुर्वेदी कोंच ने सुनाया-बहाना कोई भी लेकर मुझे हर दिन चिढ़ाता था, न जाने क्यों मुझे फिर भी कभी गुस्सा न आता था। डॉ. मकीन सिद्दीकी की गजल मेरे हिस्से का सूरज खा गया वो, मुझे खुद को जलाना पड़ रहा है। सुनकर श्रोता तालियां बजाने के लिए मजबूर हो गए।
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हास्य कवि प्रदीप दिहुलिया चरखारी ने जब चाहते हो जीवन को सफल बनाना यदि, पत्नी की हां में हां मिलाते जाइए। पढ़ा तो श्रोता काफी देर तक खिलखिलाते रहे। गरिमा जालौनी ने पढ़ा न मैं राधा बनी न मैं रुक्मणि बनीं, सांवरी बन गई मैं सांवरे के लिए। महेंद्र मिहोनवी ने पढ़ा कोई काम न दूजा सांपों की सिर्फ पूजा, तुम जहर से लबालब भर तो नहीं गए हो। संजीव कुलश्रेष्ठ पुखरायां ने पढ़ा सफर सहेजे हुए नींद के सताए हैं, गमों की गोद में रहकर भी मुस्कुराते हैं। खलील कैफी, कार्यक्रम संयोजक अंचल शर्मा ने काव्य पाठ कर खूब तालियां बटोरीं। संचालन करीम खां करीम ने किया।
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