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स्तनपान शिशु और मां दोनों के लिए फायदेमंद
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ुनापुरा में महिलाओं को जानकारी देती कृषि विभाग की वैज्ञानिक डा. राजकुमारी
- फोटो : ORAI
उरई। विश्व स्तनपान सप्ताह के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से जालौन ब्लाक के ग्राम नैनापुर में एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इसमें गृह वैज्ञानिक डॉ राजकुमारी ने ग्रामीण महिलाओं, धात्री महिलाओं को स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूक किया।
डॉ राजकुमारी ने बताया कि सैकड़ों बच्चों में अकारण ही स्वास्थ्य समस्याएं केवल मां का दूध न मिलने से होती है। अगर सभी नवजात शिशु पहले 6 महीने सिर्फ मां का दूध पीये तो बच्चों का जीवन बचाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि शिशु जन्म के तुरंत बाद से लेकर कुछ दिनों तक मां के स्तनों से निकलने वाला गाढ़ा दूध कोलेस्ट्रम कहलाता है। यह पीले रंग का चिपचिपा दूध होता है। इस दूध को अक्सर लोक अंधविश्वास के चलते गंदा और खराब दूध कहकर नवजात बच्चे को नहीं देते हैं। जबकि इसमें संक्रमण से बचने वालेेे तत्व होते है। यह विटामिन ए से भी भरपूर होता है और इसमें दस प्रतिशत से अधिक प्रोटीन होता है। कोलेस्ट्रम को फायदों के देखते हुए ही इस दूध को शिशु का पहला टीका कहा गया है। उन्होंने बताया कि स्तनपान सिर्फ बच्चे के लिये ही लाभदायक नहीं है। बल्कि मां के लिए भी फायदेमंद होता है। दूध पिलाने वाली अधिकतर महिलाओं में दिल का दौरा और स्ट्रोक का जोखिम 10 गुना तक कम हो जाता है। भविष्य में गर्भाशय कैंसर, स्तन कैंसर तथा अंडाशय के कैंसर होने के खतरे कम हो जाते है। प्रशिक्षण में आरती, अंजली, साधना, रामबती आदि महिलाओं ने प्रतिभाग किया।
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कोविड निगरानी प्रक्रिया और मजबूत करें
खसरा को लेकर वर्कशॉप का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। राजकीय मेडिकल कालेज के लेक्चर थ्रिएटर में प्राचार्य डॉ द्विजेंद्र नाथ की अध्यक्षता में मीजल्स रुबैला (एमआर) को लेकर वर्कशॉप का आयोजन किया गया।
डब्लूएचओ की सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर डॉ रूपल श्रीवास्तव ने कहा कि कोविड केस पर निगरानी को अधिक मजबूत एवं प्रभावी बनाना है। आम लोगों के साथ चिकित्सकों एवं मेडिकल स्टाफ का संवेदीकरण, मीजिल्स प्रतिरक्षा पर बल देने की जरूरत है। उन्होंने गर्भवती एवं बच्चों में कोविड मैनेजमेंट के साथ प्रतिरक्षण के संबंध में जानकारी दी। कहा कि प्रभावित व्यक्तियों में शुरू में बुखार, खांसी, नाक बहने, लाल आंखें और मुंह के अंदर सफेद धब्बे इत्यादि लक्षणों में बदलाव आदि की निगरानी कर लक्षणों के आधार पर कोविड नियंत्रण के साथ ही प्रतिरक्षा को मजबूत कैसे किया जा सकता है।
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प्राचार्य ने बताया कि मीजिल्स (खसरा) के मामलों में दायरा बढ़ा दिया गया है। पहले पहले पांच लक्षण हाई ग्रेड फीवर, मैकुलो पैकुलस, रैसेज, कफ, कोराइजा एवं कंजक्टीवाइटिस को शामिल किया गया था। उसे अब बदले हुए तरीके में बुखार एवं रैश दो ही लक्षण यदि मरीज में है तो मीजिल्स में रिपोर्ट किए जाएंगे। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ संजीव प्रभाकर, सीएमओ डॉ ऊषा सिंह, डॉ शैलेंद्र प्रताप सिंह, डॉ मनोज वर्मा, डॉ छवि जायसवाल, डॉ प्रशांत निरंजन आदि मौजूद रहे।
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डॉ राजकुमारी ने बताया कि सैकड़ों बच्चों में अकारण ही स्वास्थ्य समस्याएं केवल मां का दूध न मिलने से होती है। अगर सभी नवजात शिशु पहले 6 महीने सिर्फ मां का दूध पीये तो बच्चों का जीवन बचाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि शिशु जन्म के तुरंत बाद से लेकर कुछ दिनों तक मां के स्तनों से निकलने वाला गाढ़ा दूध कोलेस्ट्रम कहलाता है। यह पीले रंग का चिपचिपा दूध होता है। इस दूध को अक्सर लोक अंधविश्वास के चलते गंदा और खराब दूध कहकर नवजात बच्चे को नहीं देते हैं। जबकि इसमें संक्रमण से बचने वालेेे तत्व होते है। यह विटामिन ए से भी भरपूर होता है और इसमें दस प्रतिशत से अधिक प्रोटीन होता है। कोलेस्ट्रम को फायदों के देखते हुए ही इस दूध को शिशु का पहला टीका कहा गया है। उन्होंने बताया कि स्तनपान सिर्फ बच्चे के लिये ही लाभदायक नहीं है। बल्कि मां के लिए भी फायदेमंद होता है। दूध पिलाने वाली अधिकतर महिलाओं में दिल का दौरा और स्ट्रोक का जोखिम 10 गुना तक कम हो जाता है। भविष्य में गर्भाशय कैंसर, स्तन कैंसर तथा अंडाशय के कैंसर होने के खतरे कम हो जाते है। प्रशिक्षण में आरती, अंजली, साधना, रामबती आदि महिलाओं ने प्रतिभाग किया।
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कोविड निगरानी प्रक्रिया और मजबूत करें
खसरा को लेकर वर्कशॉप का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। राजकीय मेडिकल कालेज के लेक्चर थ्रिएटर में प्राचार्य डॉ द्विजेंद्र नाथ की अध्यक्षता में मीजल्स रुबैला (एमआर) को लेकर वर्कशॉप का आयोजन किया गया।
डब्लूएचओ की सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर डॉ रूपल श्रीवास्तव ने कहा कि कोविड केस पर निगरानी को अधिक मजबूत एवं प्रभावी बनाना है। आम लोगों के साथ चिकित्सकों एवं मेडिकल स्टाफ का संवेदीकरण, मीजिल्स प्रतिरक्षा पर बल देने की जरूरत है। उन्होंने गर्भवती एवं बच्चों में कोविड मैनेजमेंट के साथ प्रतिरक्षण के संबंध में जानकारी दी। कहा कि प्रभावित व्यक्तियों में शुरू में बुखार, खांसी, नाक बहने, लाल आंखें और मुंह के अंदर सफेद धब्बे इत्यादि लक्षणों में बदलाव आदि की निगरानी कर लक्षणों के आधार पर कोविड नियंत्रण के साथ ही प्रतिरक्षा को मजबूत कैसे किया जा सकता है।
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प्राचार्य ने बताया कि मीजिल्स (खसरा) के मामलों में दायरा बढ़ा दिया गया है। पहले पहले पांच लक्षण हाई ग्रेड फीवर, मैकुलो पैकुलस, रैसेज, कफ, कोराइजा एवं कंजक्टीवाइटिस को शामिल किया गया था। उसे अब बदले हुए तरीके में बुखार एवं रैश दो ही लक्षण यदि मरीज में है तो मीजिल्स में रिपोर्ट किए जाएंगे। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ संजीव प्रभाकर, सीएमओ डॉ ऊषा सिंह, डॉ शैलेंद्र प्रताप सिंह, डॉ मनोज वर्मा, डॉ छवि जायसवाल, डॉ प्रशांत निरंजन आदि मौजूद रहे।