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दृढ़ संकल्प से मिलते हैं भगवान
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माधौगढ़। कुरसेड़ा में सरदार तोमर के आवास पर शुरू भागवत कथा में आचार्य अंशुल महाराज ने भागवत का महत्व बताया। कहा कि जो भक्त कृष्ण-रुक्मिणी के विवाह उत्सव में शामिल होते हैं उनका जीवन सुखमय व्यतीत होता है। कथा व्यास ने कहा कि जीव परमात्मा का अंश है, इसलिए जीव के अंदर अपार शक्ति रहती है।
उन्होंने कहा कि कमी संकल्प की होती हैं। संकल्प व छल रहित होने से उसे निश्चित रूप से भगवान मिलते हैं। उन्होंने महारास लीला, श्री उद्धव चरित्र, श्रीकृष्ण मथुरा गमन और रुक्मिणी विवाह महोत्सव प्रसंग पर विचार रखे।
रुक्मिणी विवाह प्रसंग पर उन्होंने कहा कि रुक्मिणी के भाई ने उनका विवाह शिशुपाल के साथ सुनिश्चित किया था, लेकिन माता रुक्मिणी ने संकल्प लिया था कि वह शिशुपाल को नहीं केवल नंद के लाला अर्थात भगवान श्रीकृष्ण को ही पति के रूप में वरण करेंगे। उन्होंने कहा शिशुपाल असत्य मार्गी था।
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द्वरिकाधीश भगवान श्रीकृष्ण सत्य मार्गी हैं। इसलिए वह असत्य को नहीं सत्य को अपनाएगी। अंत में भगवान द्वारकाधीश ने रुक्मिणी के सत्य संकल्प को पूरा किया। उन्हें प्रधान पटरानी का स्थान दिया।
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उन्होंने कहा कि कमी संकल्प की होती हैं। संकल्प व छल रहित होने से उसे निश्चित रूप से भगवान मिलते हैं। उन्होंने महारास लीला, श्री उद्धव चरित्र, श्रीकृष्ण मथुरा गमन और रुक्मिणी विवाह महोत्सव प्रसंग पर विचार रखे।
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रुक्मिणी विवाह प्रसंग पर उन्होंने कहा कि रुक्मिणी के भाई ने उनका विवाह शिशुपाल के साथ सुनिश्चित किया था, लेकिन माता रुक्मिणी ने संकल्प लिया था कि वह शिशुपाल को नहीं केवल नंद के लाला अर्थात भगवान श्रीकृष्ण को ही पति के रूप में वरण करेंगे। उन्होंने कहा शिशुपाल असत्य मार्गी था।
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द्वरिकाधीश भगवान श्रीकृष्ण सत्य मार्गी हैं। इसलिए वह असत्य को नहीं सत्य को अपनाएगी। अंत में भगवान द्वारकाधीश ने रुक्मिणी के सत्य संकल्प को पूरा किया। उन्हें प्रधान पटरानी का स्थान दिया।