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Jalaun News: एडमीशन से लेकर किताबें खरीदने तक में अभिभावकों की जेब हो रही खाली

Thu, 03 Apr 2025 12:12 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 03 Apr 2025 12:12 AM IST
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From admission to buying books, parents' pockets are getting empty
उरई। नया सत्र शुरू होने के साथ ही एडमीशन से लेकर स्कूल में दाखिले तक को लेकर अभिभावकों की जेब ढीली होनी शुरू हो गई है। निजी स्कूलों के संचालक निजी प्रकाशकों की किताबें अपने स्कूल में शामिल कर अभिभावकों को जबरन किताबें खरीदने का दबाव बनाने में लगे हैं। स्कूलों की हैसियत के हिसाब से अभिभावकों पर बोझ पड़ रहा है। निजी स्कूल संचालकों की मनमानी का मामला डीएम राजेश कुमार पांडेय के पास भी पहुंचा है। उन्होंने डीआईओएस और बीएसए को पत्र लिखकर मामले की जांच कर आख्या देने के निर्देश दिए हैं।
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निजी स्कूल संचालक कमीशन के चलते महंगी किताबें खरीदने को मजबूर कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार निजी स्कूल संचालकों और प्रकाशकों के बीच 50 प्रतिशत का कमीशन वसूला रहा है। मजबूरी में अभिभावक तय दुकानों से किताबें व बस्ता खरीदने को मजबूर हैं। एनसीईआरटी की किताबें दुकानों पर नहीं मिल रही है। एक महिला अभिभावक ने बताया कि नामी स्कूल में उनके छह में पढ़ने वाले बेटे के कोर्स की किताबें और स्टेशनरी 7000 रुपये में आया है। किसी भी क्लास का बस्ता 5000 रुपये से कम नहीं मिल रहा है।
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विद्यालयों का कमीशन अभिभावकों पर भारी

फोटो-25-विवेक दुबे। संवाद
कोंच। कस्बे के गांधीनगर निवासी विवेक कुमार दुबे का कहना है कि विद्यालयों का कमीशन अभिभावकों पर भारी पड़ रहा है। अच्छी शिक्षा और बेहतर व्यवस्था के लिए अभिभावक महंगाई की मार से बेहाल हैं। इस बार भी नए सत्र में कॉपी किताबों के दाम 20 फीसदी तक बढ़ाए गए हैं। दुकानदार और स्कूल प्रबंधकों के कमीशनखोरी अभिभावकों पर भारी पड़ रहा है। प्राइवेट स्कूल हर साल कोर्स में शामिल किताबों के प्रशासक बदल देते हैं। जिससे अभिभावकों पर हर वर्ष नया कोर्स खरीदना पड़ता है। संवाद
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फोटो - 26 सलिल तिवारी
डीएम ने दिए जांच के आदेश
उरई। विश्व मानवाधिकार एसोसिएशन के जिला महासचिव सलिल कुमार तिवारी ने डीएम को शिकायतीपत्र दिया है। इसमें कहा है कि प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश के समय लूट मची है। किताबें, रजिस्टर, यूनिफार्म को स्कूल परिसर या स्कूल द्वारा तय की गई दुकान से लेना अनिवार्य कर दिया है। 150 रुपये वाली किताब 600 से 800 रुपये तक बेची जा रही है। इसी तरह 2000 से 3000 वाली ड्रेस को 6000 से 8000 रुपये में बेचा जा रहा है। विरोध करने पर नाम कटवाने की धमकी दी जा रही है। उन्होंने जांच की मांग की है। डीएम ने डीआईओएस को जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए हैं।






जांच के लिए बनाई गईं 10 टीमें

निजी स्कूल में प्रवेश के समय निर्धारित की गई दुकानों द्वारा मूल्य से अधिक सामग्री उपलब्ध कराने की शिकायत पर डीआईओएस ने 10 टीमें गठित की हैं। इनमें नौ टीमें नौ ब्लॉकों में लगाई गई हैं और एक टीम शहरी क्षेत्र में लगाई गई है। हर टीम में एक राजकीय विद्यालय के प्रधानाचार्य और एक वरिष्ठ शिक्षक को लगाया गया है।



वर्जन

मान्यता शर्तों के अनुसार स्कूल संचालक को एनसीईआरटी की किताबें चलाने के निर्देश हैं। कुछ स्कूल संचालकों का कहना है कि एनसीईआरटी की किताबें बाजार में नहीं मिल रही हैं। सभी स्कूल संचालकों को हिदायत दी गई है कि अभिभावकों को परेशान न करें। शिकायत मिलने पर कार्रवाई होगी। डीएम के निर्देश पर ब्लॉक और तहसील स्तर पर टीम गठित कर दी गई है। खुद भी जाकर जांच करेंगे।
- राजकुमार पंडित, डीआईओएस
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