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कोहरे से निपटने के लिए ट्रेनों में लगी फाग सेफ्टी डिवाइस
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उरई। झांसी-कानपुर सेक्शन से गुजरने वाली यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों में कोहरे से निपटने के लिए फाग सेफ्टी डिवाइस लगा दी गई है। जिससे ड्राइवर कोहरे के बीच भी ट्रेन को आसानी से चला सकेंगे। ट्रेन ड्राइवरों को तीन किलोमीटर तक के सिग्नल और स्टेशन के सिग्नल के बारे में डिवाइस के माध्यम से जानकारी मिल सकेगी। यह फाग डिवाइस झांसी मंडल की सभी ट्रेनों में लगाई गई है। इसका लाभ झांसी कानपुर सेक्शन के अलावा झांसी ग्वालियर, झांसी-बांदा मानिकपुर, झांसी ललितपुर सेक्शन की सभी ट्रेनों में लगाया गया है।
कोहरे के कारण ट्रेनों की लेटलतीफी कम करने के लिए रेलवे प्रशासन ने इस बार यात्री ट्रेनों के साथ मालगाडिय़ों में भी फाग सेफ्टी डिवाइस लगाई है। झांसी कानपुर सेक्शन से गुजरने वाली 64 यात्री ट्रेनों और रोजाना गुजरने वाली करीब दो दर्जन मालगाड़ियों में डिवाइस लगाई गई है। यह डिवाइस सिग्नल, लेबल क्रासिंग, व्हिसल बोर्ड आदि की सही लोकेशन के बारे में जानकारी देगी। यही नहीं ट्रेन चालकों को वाइस रिकार्डर के माध्यम से भी संकेत देगी।
पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि सभी ट्रेन चालकों को इस डिवाइस के बारे में प्रशिक्षण दे दिया गया है। इस डिवाइस से ट्रेनों की रफ्तार में भी तेजी आएगी। कोहरे में अभी अधिकतम गतिसीमा साठ किलोमीटर की थी, जो बढ़कर 75 किलोमीटर हो जाएगी। उन्होंने बताया कि सभी काशन बोर्ड, सीटी बोर्ड आदि की बेहतर दृश्यता के लिए रेट्रो रिफ्लेक्टिव कोटिंग की जा रही है ताकि कम दिखने की स्थिति में लोको पायलट को सहायता मिल सके। ट्रेन चालक रामदास के मुताबिक, इस डिवाइस से तीन किलोमीटर तक ट्रैक की लोकेशन मिलती रहती है। कोहरे के लिए यह डिवाइस मुफीद है।
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कोहरे के कारण ट्रेनों की लेटलतीफी कम करने के लिए रेलवे प्रशासन ने इस बार यात्री ट्रेनों के साथ मालगाडिय़ों में भी फाग सेफ्टी डिवाइस लगाई है। झांसी कानपुर सेक्शन से गुजरने वाली 64 यात्री ट्रेनों और रोजाना गुजरने वाली करीब दो दर्जन मालगाड़ियों में डिवाइस लगाई गई है। यह डिवाइस सिग्नल, लेबल क्रासिंग, व्हिसल बोर्ड आदि की सही लोकेशन के बारे में जानकारी देगी। यही नहीं ट्रेन चालकों को वाइस रिकार्डर के माध्यम से भी संकेत देगी।
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पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि सभी ट्रेन चालकों को इस डिवाइस के बारे में प्रशिक्षण दे दिया गया है। इस डिवाइस से ट्रेनों की रफ्तार में भी तेजी आएगी। कोहरे में अभी अधिकतम गतिसीमा साठ किलोमीटर की थी, जो बढ़कर 75 किलोमीटर हो जाएगी। उन्होंने बताया कि सभी काशन बोर्ड, सीटी बोर्ड आदि की बेहतर दृश्यता के लिए रेट्रो रिफ्लेक्टिव कोटिंग की जा रही है ताकि कम दिखने की स्थिति में लोको पायलट को सहायता मिल सके। ट्रेन चालक रामदास के मुताबिक, इस डिवाइस से तीन किलोमीटर तक ट्रैक की लोकेशन मिलती रहती है। कोहरे के लिए यह डिवाइस मुफीद है।
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