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औषधि की खेती से भी आमदनी बढ़ाए किसान
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एलोवीरा की खेती दिखाता किसान
- फोटो : ORAI
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सिरसाकलार (जालौन)। खेती में तेजी से बदलाव दिखाई दे रहा है। फूलों और केसर की खेती के बाद औषधि की खेती भी किसानों के लिए लाभदायक साबित हो रही है। इसी कड़ी में सिरसाकलार के जटहौली गांव निवासी किसान हरनारायण सिंह ने अपने खेतों में एलोवीरा की खेती कर जनपद के किसानों को कुछ हटकर करने के लिए प्रेरित किया है। हरनारायण का कहना है कि आमदनी तो बढ़ी ही है, साथ ही अन्ना मवेशियों से सुरक्षा का झंझट भी नहीं रहता है।
बता दें कि किसान भारतीय एग्रो कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड किसानों को औषधियों की खेती करने के लिए प्रेरित कर रही है। इसी से प्रेरित होकर किसान हरनारायण सिंह ने एलोवीरा की खेती करने का फैसला किया। किसान ने बताया कि उन्होंने 5 रुपये प्रति पौधे के हिसाब से खरीद कर 1 एकड़ में 12 सौ पौधे बोए थे। जिसकी लागत 60 हजार रुपये आई थी। उन्होंने बताया कि यह खेती किसानों के लिए इसलिए फायदेमंद है, क्योंकि एलोवीरा में 12 माह में छह बार पानी लगाते है। इसके साथ ही इसमें खाद का खर्च भी नहीं आता। एलोवीरा में तीन बार गाय का गोबर व मूत्र का छिड़काव किया जाता है।
13 माह में पहली कटिंग होती है। इसके बाद हर छह माह में कटिंग कर किसान अपनी फसल को पांच साल तक बेच सकते हैं। उन्होंने बताया कि सिर्फ एक बार बुआई के बाद किसान पांच साल तक इस फसल का लाभ ले सकते है। इसके साथ ही इसकी रखवाली के लिए भी कोई विशेष प्रबंध नहीं करने पड़ते क्योंकि जानवर इसे नहीं खाते। किसान हरनारायण सिंह का कहना है कि एक एकड़ में बुआई के बाद हर छह माह बाद सवा लाख तक का एलोवीरा बेचते हैं। जिससे उन्हें पारंपरिक खेती से कई गुना अधिक लाभ मिला है। उनका कहना है कि वह अन्य किसानों को भी एलोवीरा के साथ-साथ औषधि की खेती करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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बता दें कि किसान भारतीय एग्रो कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड किसानों को औषधियों की खेती करने के लिए प्रेरित कर रही है। इसी से प्रेरित होकर किसान हरनारायण सिंह ने एलोवीरा की खेती करने का फैसला किया। किसान ने बताया कि उन्होंने 5 रुपये प्रति पौधे के हिसाब से खरीद कर 1 एकड़ में 12 सौ पौधे बोए थे। जिसकी लागत 60 हजार रुपये आई थी। उन्होंने बताया कि यह खेती किसानों के लिए इसलिए फायदेमंद है, क्योंकि एलोवीरा में 12 माह में छह बार पानी लगाते है। इसके साथ ही इसमें खाद का खर्च भी नहीं आता। एलोवीरा में तीन बार गाय का गोबर व मूत्र का छिड़काव किया जाता है।
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13 माह में पहली कटिंग होती है। इसके बाद हर छह माह में कटिंग कर किसान अपनी फसल को पांच साल तक बेच सकते हैं। उन्होंने बताया कि सिर्फ एक बार बुआई के बाद किसान पांच साल तक इस फसल का लाभ ले सकते है। इसके साथ ही इसकी रखवाली के लिए भी कोई विशेष प्रबंध नहीं करने पड़ते क्योंकि जानवर इसे नहीं खाते। किसान हरनारायण सिंह का कहना है कि एक एकड़ में बुआई के बाद हर छह माह बाद सवा लाख तक का एलोवीरा बेचते हैं। जिससे उन्हें पारंपरिक खेती से कई गुना अधिक लाभ मिला है। उनका कहना है कि वह अन्य किसानों को भी एलोवीरा के साथ-साथ औषधि की खेती करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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