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Jalaun News: ट्रैक्टर-ट्रॉली व लोडरों में खतरे का सफर
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फोटो - 03 लोडर में सफर करते लोग। संवाद
आटा। ट्रैक्टर-ट्रॉली और मालवाहक वाहनों से मजदूरों व यात्रियों को क्षमता से अधिक ढोने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। नेशनल हाईवे से लेकर ग्रामीण संपर्क मार्गों तक ओवरलोडिंग खुलेआम देखी जा रही है। इसके बावजूद एआरटीओ की कार्रवाई महज खानापूरी बनकर रह गई है।
आटा-भदरेखी, आटा-अकोढ़ी और आटा-इटौरा मार्ग पर रोजाना लोडर व पिकअप वाहनों में लोग लटककर सफर करते नजर आते हैं। कई बार तो वाहन की छत और पीछे के हिस्से पर भी दर्जनों लोग बैठे दिखाई देते हैं। यह स्थिति कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह और शाम के समय समस्या और गंभीर हो जाती है। खेतों और निर्माण स्थलों तक मजदूरों को पहुंचाने के नाम पर नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। स्कूल जाने वाले बच्चों और महिलाओं को भी जोखिम भरा सफर करने को मजबूर होना पड़ता है।
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क्षेत्रवासियों का आरोप है कि संबंधित विभाग सब कुछ जानते हुए भी अनदेखी कर रहा है। एआरटीओ विभाग द्वारा कभी-कभार अभियान चलाया जाता है, लेकिन वह केवल औपचारिकता बनकर रह जाता है। कार्रवाई के नाम पर कुछ वाहनों का चालान काटकर इतिश्री कर दी जाती है। कुछ दिनों बाद फिर वही हालात सड़कों पर नजर आने लगते हैं।
ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार लोग बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के सफर कर रहे हैं। न हेलमेट, न सीट बेल्ट और न ही बैठने की समुचित व्यवस्था होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ओवरलोडिंग से वाहन का संतुलन बिगड़ सकता है और जरा सी चूक भी गंभीर दुर्घटना का रूप ले सकती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से नियमित और सख्त अभियान चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि दिखावटी कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा। जब तक जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक नियमों का उल्लंघन जारी रहेगा। फिलहाल क्षेत्र की सड़कों पर ओवरलोड वाहनों का खतरा बरकरार है।
समय-समय पर इन वाहनों में कार्रवाई की जा आती है। अभियान भी चलाए जाते हैं।
- सुरेश कुमार, एआरटीओ प्रवर्तन
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आटा-भदरेखी, आटा-अकोढ़ी और आटा-इटौरा मार्ग पर रोजाना लोडर व पिकअप वाहनों में लोग लटककर सफर करते नजर आते हैं। कई बार तो वाहन की छत और पीछे के हिस्से पर भी दर्जनों लोग बैठे दिखाई देते हैं। यह स्थिति कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह और शाम के समय समस्या और गंभीर हो जाती है। खेतों और निर्माण स्थलों तक मजदूरों को पहुंचाने के नाम पर नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। स्कूल जाने वाले बच्चों और महिलाओं को भी जोखिम भरा सफर करने को मजबूर होना पड़ता है।
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क्षेत्रवासियों का आरोप है कि संबंधित विभाग सब कुछ जानते हुए भी अनदेखी कर रहा है। एआरटीओ विभाग द्वारा कभी-कभार अभियान चलाया जाता है, लेकिन वह केवल औपचारिकता बनकर रह जाता है। कार्रवाई के नाम पर कुछ वाहनों का चालान काटकर इतिश्री कर दी जाती है। कुछ दिनों बाद फिर वही हालात सड़कों पर नजर आने लगते हैं।
ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार लोग बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के सफर कर रहे हैं। न हेलमेट, न सीट बेल्ट और न ही बैठने की समुचित व्यवस्था होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ओवरलोडिंग से वाहन का संतुलन बिगड़ सकता है और जरा सी चूक भी गंभीर दुर्घटना का रूप ले सकती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से नियमित और सख्त अभियान चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि दिखावटी कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा। जब तक जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक नियमों का उल्लंघन जारी रहेगा। फिलहाल क्षेत्र की सड़कों पर ओवरलोड वाहनों का खतरा बरकरार है।
समय-समय पर इन वाहनों में कार्रवाई की जा आती है। अभियान भी चलाए जाते हैं।
- सुरेश कुमार, एआरटीओ प्रवर्तन