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संदी गांव में चप्पे-चप्पे पर पुलिस, दहशत में बीती रात

Fri, 03 Aug 2018 12:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूूराे जालाैन
अमर उजाला ब्यूूराे जालाैन Updated Fri, 03 Aug 2018 12:12 AM IST
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Police on the rampage in Sandi village, last night in panic
बदमाशों के प्रवेश करने का संभावित रास्ता दिखाते ग्रामीण। - फोटो : amar ujala

आटा। बुधवार की घटना के बाद आटा थाना क्षेत्र के संदी गांव के चप्पे चप्पे पर भले ही पुलिस तैनात कर गांव की घेराबंदी की गई हो, लेकिन ग्रामीणों के दिलोदिमाग की दहशत है कि कम होने का नाम नहीं ले रही है। मंगलवार की रात गांव में खेले गए खूनी खेल के बाद बुधवार की रात लोगों की जागते ही बीती। कोई रातभर पुलिस वालों के साथ बैठा रहा तो कोई घर के खिड़की दरवाजे बंद कर भीतर ही जागता रहा। नींद ग्रामीणों की आंखों से कोसों दूर थी। दूसरी ओर गांव को आने जाने वाले हर एक रास्ते में पुलिस की जीपें और पीएसी के जवान मुस्तैद नजर आए।

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पुलिस सूत्रों की मानें तो हमलावरों के कुछ सुराग हाथ लगे हैं, जिसके चलते संदी गांव से लगे अकोड़ी, बम्हौरी, जौराखेरा, रिरुआ गांवों में गुरुवार की रात दबिशें भी दी जाएंगी। मामले के तार मकसूद पर हुए हमले से जुड़ते हुए प्रधानी की रंजिश की ओर भी जा रहे हैं। पुलिस ने अकोढ़ी और बम्हौरी गांवों के अपराधी किस्म के लोगों की सूची बनाई है, जिनके वारदात में शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक बदमाश अकोड़ी गांव की ओर से आए और बम्हौरी गांव की ओर भागे थे।
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गुरुवार को थाने में पूरे दिन एएसपी सुरेंद्र नाथ तिवारी सर्विलांस और एसओजी टीम के साथ डटे रहे। थाना क्षेत्र के अपराधियों के नाम और उनके मोबाइल नंबरों को खंगाला गया। वारदात के वक्त आपराधिक प्रवृति के लोगों की लोकेशन का भी पता लगाया जाता रहा। इस संदर्भ में एसपी अमरेंद्र प्रसाद का कहना है कि हमलावरों के कुछ सुराग मिले हैं, जिस पर एसओजी व थाने के पुराने थानेदारों की टीम भी काम कर रही है, जल्द ही वे पकड़े जाएंगे। इसके बाद वारदात की वजह भी पता चल जाएगी।     
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आजाद चच्चा ही थे बदमाशों का टारगेट
पुलिस की मानें तो बदमाशों के जिस रास्ते में गांव में घुसने की बात की जा रही है, वह ठीक आजाद के घर के सामने ही निकलता है, इसके बाद बदमाशों ने पांच लोगों में से सबसे पहले जिसे अपनी गोली का निशाना बनाया वह थे बुजुर्ग आजाद चच्चा, जो कि अपने घर के बाहर सो रहे थे। इसके बाद जिसने भी रास्ते में उन्हें टोका, वे उस पर फायर झोंकते चले गए। मतलब साफ है कि टारगेट सिर्फ आजाद चच्चा ही थे, जो कि सो रहे थे न उन्होंने टोका और न बदमाशों को रोका, फिर भी गोली का शिकार हुए। इसलिए आजाद व उसके परिवार की रंजिश के बारे में भी पता किया जा रहा है। हालांकि आजाद का परिवार इस पर चुप्पी साधे है। एएसपी सुरेंद्र नाथ तिवारी का कहना है कि आजाद की हत्या पर भी जांच पड़ताल की जा रही है।  

मकसूद और आजाद ही क्यों रहे टारगेट
तीन दिन पहले सिर्फ घर के बाहर सो रहे मकसूद को गोली का निशाना बनाया गया। इसके बाद घर के बाहर सो रहे आजाद को भी मौत की नींद सुलाया गया। दोनों पर हुए हमले की वजह पुलिस की निगाह में भी एक हो सकते हैं। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच पड़ताल में यह भी आया है कि मकसूद और आजाद के परिवार, गांव के दो प्रभावशाली गुटों से अलग-अलग जुड़े थे। जिनका कनेक्शन प्रधानी की रंजिश से भी हो सकता है। फिलहाल सभी बिंदुओं पर गंभीरता से जांच की जा रही है।  

बिना छर्रे निकाले कर दी बाला की छुट्टी
घटना को लेकर पुलिस की लापरवाही तो सामने आ ही चुकी है, बाकी कसर अस्पताल के डॉक्टरों ने पूरी कर दी। घर के बाहर सो रहे 70 साल के बाला प्रसाद ने जब बदमाशों को टोका उन्होंने उस पर फायर कर दिया। गोली के छर्रे बाला के सिर और आंख के आसपास लगे। उसे इलाज के लिए उरई लाया गया, जहां बिना छर्रे निकाले ही उसकी छुट्टी कर दी गई। अब परिजन किसी तरह अपने हाथों से बाला के माथे पर घुसे छर्रे निकाल रहे हैं। इससे बाला की जान को भी खतरा बना है।  

कैसे लगेगी अफसाना के हाथों में मेहंदी
आटा। सीने और पेट के बीच कोख में गोली लगने से जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे जीशान के परिजनों की आंखों के आंसू हैं कि थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हर पल बस जीशान की जिंदगी के लिए दुआएं की जा रही हैं। परिजनों ने बताया कि हाल ही में जिशान की बेटी अफसाना का रिश्ता पक्का किया गया था, और जल्द ही उसकी बारात भी आने वाली थी। घर पर खुशियां छाई थी। अब अफसाना के दहेज का सामान भी जुटाया जा रहा था। मंगलवार की रात भी सोने से पहले जीशान बेटी की शादी की बातें भी कर रहा था। कह रहा था कि अपनी इकलौती बेटी की शादी ऐसी करेगा की पूरा गांव देखेगा। बेटी की शादी के लिए परिवार ने 50 हजार रुपये जोड़ रखे थे, अब वही रुपया जीशान के इलाज में खर्च हो रहे हैं, अल्लाह ही जाने अफसाना के हाथों में मेंहदी कैसे लग पाएगी।  


30 मिनट में झोंके 15 फायर  
ग्रामीणों के मुताबिक गांव में रात 11 से 12 बजे तक लोगों की चहलकदमी रहती है। जबकि घटना की सूचना पुलिस को 1 बजकर 20 मिनट के आसपास दी गई है। इससे माना जा रहा है कि बदमाश रात करीब 12 बजकर 30 मिनट पर घुसे और गांव के आखिरी शिकार रामपाल के घर के बाहर उन्होंने उसकी पत्नी जयदेवी को करीब 1 बजे के आसपास गोली मारकर मौत की नींद सुलाया। इससे साफ है कि है कि बदमाशों ने इन्हीं 30 मिनट के भीतर ही ताबड़तोड़ 10-15 राउंड फायर झोंके है। पुलिस इस टाइम पीरियड को लेकर भी सर्विलांस टीम के साथ माथापच्ची कर रही है।

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