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बजरंग दल के संयोजक समेत 200 पर रिपोर्ट
ब्यूरो/ अमर उजाला, उरई
Updated Mon, 11 Jan 2016 11:14 PM IST
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शहर के अंबेडकर चौराहे पर रविवार की शाम होर्डिंग हटाने के विवाद के बाद
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उसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करने के आरोपियों के खिलाफ शहर कोतवाली
में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पुलिस ने जहां एक पक्ष के लगभग दो सौ लोगों
के खिलाफ जाम लगाने, ट्रैफिक को बाधित करने व पुलिस के लिए वीडियोग्राफी
करने वाले युवक के कैमरे को तोड़ने के आरोप
में मामला दर्ज कराया है वहीं दूसरे पक्ष की ओर से बजरंग दल के चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। उधर, बजरंग दल इस पूरे मामले में अपनी भूमिका से इंकार कर रहा है। रविवार शाम करीब चार बजे अंबेडकर चौराहे पर एक होर्डिंग को हटा रहे ठेकेदार के साथ कुछ लोगों ने मारपीट शुरू कर दी। इनका आरोप था कि ठेकेदार बजरंग दल का आदमी
है और वह जानबूझकर जिला पंचायत अध्यक्ष फरहा नाज का पोस्टर हटा रहा है। वहीं, खड़े बजरंग दल के कुछ लोगों ने उन्हें रोका तो उनके साथ भी ये लोग उलझ गए। इतने में दोनों ओर से गालीगलौज और हाथापाई होने लगी। थोड़ी देर में बाजार की ओर से एक संप्रदाय के कुछ और लोग जमा हो गए और नारेबाजी करने लगे। तभी सीओ जंगबहादुर समेत उरई
कोतवाल और अन्य पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचे और दोनो पक्षों को शांत कराया। इसके बाद बजरंग दल कार्यकर्ता वहीं पास स्थित अपने कार्यालय में चले गए जबकि दूसरे पक्ष के लोगों ने उरई कोतवाली के सामने जाम लगा दिया था। इस पर एसपी एन कोलांचि ने पहुंचकर कई थानों की पुलिस के साथ जाम लगाए लोगों को खदेड़ दिया।
इस मामले में पहली रिपोर्ट शहर के कबीरनगर निवासी आरिफ खान ने दर्ज कराई। इसमें कहा कि बजरंग दल के जिला संयोजक अखिलेश डीहा, कुलदीप गौड, शानू व पुष्पेंद्र सहित करीब 100 लोगों ने माहौल बिगाड़ने वाले नारे लगाए। वहीं, कोतवाली में तैनात दरोगा सत्तार बेग ने कोतवाली पुलिस को दी तहरीर में बताया कि कोतवाली के सामने जाम लगाकर
यातायात बाधित किया गया और पुलिस के लिए वीडियोग्राफी कर रहे मयंक अग्रवाल का कैमरा तोड़ दिया। पुलिस ने अज्ञात करीब दो सौ लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।वहीं बजरंग दल के वरिष्ठ नेताओं ने इस पूरे मामले में अपनी किसी भी भूमिका से इंकार किया है। बजरंग दल के जिला संयोजक अखिलेश डीहा ने बताया कि जिस वक्त यह घटना घटी, वे कालपी के एक अधिवेशन में थे। ऐसे में इस मामले में उनका नाम घसीटा जाना दुखद है।
बजरंग दल नहीं चाहता फैले तनाव-अखिलेश
कोई तो है जो सांप्रदायिकता को हवा दे रहा है। कालपी की घटना हो या कोटरा या फिर बदनपुरा की घटना। पुलिस प्रशासन की सक्रियता से वह अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पा रहे है। यह बात बजरंग दल के जिला संयोजक अखिलेश दुबे डीहा ने कही। वह अपने कार्यालय पर पत्रकारों से बात कर रहे थे।
डीहा ने कहा कि सावन माह में कोटरा में करबला के पास स्थित धर्म स्थल तोड़ा गया। हाल में ही कालपी में धार्मिक स्थल को खोद दिया गया। इसका विरोध किया तो झगड़े पर आमादा हो गए। कालपी में दंगा होते बचा। बदनपुरा में गौवंश की हत्या की गई। इसके अलावा अन्य कई ऐसी घटनाएं हुई। इसमें बजरंग दल की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई तो
पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई की। शहर में होर्डिंग उतारने का आरोप बजरंग दल पर लगा अफवाह फैलाई गई। दल से इस मामले का कोई मतलब नहीं था। इससे इतना तो साफ है कि कोई यहां पर सांप्रदायिक माहौल को बिगाड़ना चाहता है। कहा कि सत्ता के दम पर फर्जी फंसाने का कुचक्र कोई न रचे। बजरंग दल अपनी मांग प्रशासन के सामने रखता है। धरना देकर प्रदर्शन तो तब किया जाता है जब बात नहीं सुनी जाए। इस दौरान अजय तिवारी के अलावा अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
में मामला दर्ज कराया है वहीं दूसरे पक्ष की ओर से बजरंग दल के चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। उधर, बजरंग दल इस पूरे मामले में अपनी भूमिका से इंकार कर रहा है। रविवार शाम करीब चार बजे अंबेडकर चौराहे पर एक होर्डिंग को हटा रहे ठेकेदार के साथ कुछ लोगों ने मारपीट शुरू कर दी। इनका आरोप था कि ठेकेदार बजरंग दल का आदमी
है और वह जानबूझकर जिला पंचायत अध्यक्ष फरहा नाज का पोस्टर हटा रहा है। वहीं, खड़े बजरंग दल के कुछ लोगों ने उन्हें रोका तो उनके साथ भी ये लोग उलझ गए। इतने में दोनों ओर से गालीगलौज और हाथापाई होने लगी। थोड़ी देर में बाजार की ओर से एक संप्रदाय के कुछ और लोग जमा हो गए और नारेबाजी करने लगे। तभी सीओ जंगबहादुर समेत उरई
कोतवाल और अन्य पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचे और दोनो पक्षों को शांत कराया। इसके बाद बजरंग दल कार्यकर्ता वहीं पास स्थित अपने कार्यालय में चले गए जबकि दूसरे पक्ष के लोगों ने उरई कोतवाली के सामने जाम लगा दिया था। इस पर एसपी एन कोलांचि ने पहुंचकर कई थानों की पुलिस के साथ जाम लगाए लोगों को खदेड़ दिया।
इस मामले में पहली रिपोर्ट शहर के कबीरनगर निवासी आरिफ खान ने दर्ज कराई। इसमें कहा कि बजरंग दल के जिला संयोजक अखिलेश डीहा, कुलदीप गौड, शानू व पुष्पेंद्र सहित करीब 100 लोगों ने माहौल बिगाड़ने वाले नारे लगाए। वहीं, कोतवाली में तैनात दरोगा सत्तार बेग ने कोतवाली पुलिस को दी तहरीर में बताया कि कोतवाली के सामने जाम लगाकर
यातायात बाधित किया गया और पुलिस के लिए वीडियोग्राफी कर रहे मयंक अग्रवाल का कैमरा तोड़ दिया। पुलिस ने अज्ञात करीब दो सौ लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।वहीं बजरंग दल के वरिष्ठ नेताओं ने इस पूरे मामले में अपनी किसी भी भूमिका से इंकार किया है। बजरंग दल के जिला संयोजक अखिलेश डीहा ने बताया कि जिस वक्त यह घटना घटी, वे कालपी के एक अधिवेशन में थे। ऐसे में इस मामले में उनका नाम घसीटा जाना दुखद है।
बजरंग दल नहीं चाहता फैले तनाव-अखिलेश
कोई तो है जो सांप्रदायिकता को हवा दे रहा है। कालपी की घटना हो या कोटरा या फिर बदनपुरा की घटना। पुलिस प्रशासन की सक्रियता से वह अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पा रहे है। यह बात बजरंग दल के जिला संयोजक अखिलेश दुबे डीहा ने कही। वह अपने कार्यालय पर पत्रकारों से बात कर रहे थे।
डीहा ने कहा कि सावन माह में कोटरा में करबला के पास स्थित धर्म स्थल तोड़ा गया। हाल में ही कालपी में धार्मिक स्थल को खोद दिया गया। इसका विरोध किया तो झगड़े पर आमादा हो गए। कालपी में दंगा होते बचा। बदनपुरा में गौवंश की हत्या की गई। इसके अलावा अन्य कई ऐसी घटनाएं हुई। इसमें बजरंग दल की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई तो
पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई की। शहर में होर्डिंग उतारने का आरोप बजरंग दल पर लगा अफवाह फैलाई गई। दल से इस मामले का कोई मतलब नहीं था। इससे इतना तो साफ है कि कोई यहां पर सांप्रदायिक माहौल को बिगाड़ना चाहता है। कहा कि सत्ता के दम पर फर्जी फंसाने का कुचक्र कोई न रचे। बजरंग दल अपनी मांग प्रशासन के सामने रखता है। धरना देकर प्रदर्शन तो तब किया जाता है जब बात नहीं सुनी जाए। इस दौरान अजय तिवारी के अलावा अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।