{"_id":"5c55d196bdec2226154d0db5","slug":"171549128086-jalaun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"युवक के अपहरण के दोषियों को सात साल की सजा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
युवक के अपहरण के दोषियों को सात साल की सजा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
उरई। युवक के अपहरण के मामले में डकैती कोर्ट के जज नरेंद्र कुमार ने दो लोगों को सात साल की कैद व दस दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। घटना 15 साल पुरानी है।
कालपी कोतवाली के मोहल्ला कागजीपुरा निवासी संगीता पत्नी मानसिंह ने कालपी कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 17 जुलाई 2004 में उसके पति मानसिंह को मोहल्ले के ही संतोष पुत्र रामशंकर व पप्पू पुत्र श्रीकृष्ण मछली पकड़ने के बहाने कालपी स्थित यमुना नदी के किनारे ले गए और वहां जाकर उसकी हत्या कर दी। पांच दिन बाद उसका क्षत विक्षत शव मिला था। पत्नी ने रुपये व चप्पलों के आधार पर शिनाख्त की। शासकीय अधिवक्ता ब्रजराज सिंह राजपूत ने बताया कि शनिवार को डकैती कोर्ट के जज नरेंद्र कुमार ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद इस मामले में संतोष व पप्पू को सिर्फ अपहरण का ही दोषी पाते हुए सात-सात साल की कैद व दस दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। चूंकि हत्या का कोई चश्मदीद गवाह नहीं था। जिस कारण हत्या का आरोप साबित न हो सका। इसलिए अपहरण के मामले में दोनो ंको सजा सुनाई है।
युवक के अपहरण के दोषियों को सात साल की सजा
-2004 में कालपी कोतवाली का मामला
कालपी कोतवाली के मोहल्ला कागजीपुरा निवासी संगीता पत्नी मानसिंह ने कालपी कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 17 जुलाई 2004 में उसके पति मानसिंह को मोहल्ले के ही संतोष पुत्र रामशंकर व पप्पू पुत्र श्रीकृष्ण मछली पकड़ने के बहाने कालपी स्थित यमुना नदी के किनारे ले गए और वहां जाकर उसकी हत्या कर दी। पांच दिन बाद उसका क्षत विक्षत शव मिला था। पत्नी ने रुपये व चप्पलों के आधार पर शिनाख्त की। शासकीय अधिवक्ता ब्रजराज सिंह राजपूत ने बताया कि शनिवार को डकैती कोर्ट के जज नरेंद्र कुमार ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद इस मामले में संतोष व पप्पू को सिर्फ अपहरण का ही दोषी पाते हुए सात-सात साल की कैद व दस दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। चूंकि हत्या का कोई चश्मदीद गवाह नहीं था। जिस कारण हत्या का आरोप साबित न हो सका। इसलिए अपहरण के मामले में दोनो ंको सजा सुनाई है।
विज्ञापन
युवक के अपहरण के दोषियों को सात साल की सजा
-2004 में कालपी कोतवाली का मामला