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Jalaun News: नए दौर की चमक और कुछ नए के अभाव में फीका पड़ा रुई की रजाई का कारोबार

Fri, 29 Dec 2023 12:02 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 29 Dec 2023 12:02 AM IST
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Cotton quilt business faded due to lack of shine of new era and something new
उरई। समय की परिस्थितियां, फैशन का दौर और स्वयं के काम में दौर के हिसाब से परिवर्तन न कर पाने की वजह से शहर के रजाई वाले धुनकरों की मशीनें जाम होने की कगार पर हैं।
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उन्हें काम नहीं मिल रहा है। जिन्हें मिल भी रहा है तो वह एक परिवार के पालन पोषण जितना भी ठीक से नहीं कमा पा रहे हैं। इस स्थिति में पूरे शहर में 77 फीसदी और इस कार्य का कभी हब कही जाने वाली राठ रोड पर 75 फीसदी तक काम बंद हो गया है। कारोबार घटने से जहां कभी साढ़े तीन सौ से 400 लोगों को रोजगार मिलता था, वहां अब यह संख्या 96 फीसदी तक घट गई है।
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राठ रोड पर धुनकी मशीन में कभी काम करने वाली कौशर ने बताया कि वह रजाई में तागा लगाने का काम करती थी। इस काम से वह परिवार का पालन करती है। उसने बताया कि उसके प्रति रजाई तागने के हिसाब से रुपये मिलते हैं। करीब पांच साल पहले रुई की रजाई की काफी बिक्री थी। प्रतिदिन 10-15 रजाइयों में तागने का काम मिल जाता था। उससे घर भी ठीक चलता था, लेकिन उसके बाद इस काम में तेजी से गिरावट आई। आज सर्दी के मौसम में दिन में दो से तीन रजाइयां भी प्रतिदिन तागने को कभी-कभी ही मिल पाती हैं। अब काम कम है, इसलिए इस कार्य को पार्टटाइम कर दिया है। इसके अलावा सहालग में कोई अन्य काम करते हैं।
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राठ रोड में ही धुनकी मशीन में काम करने वाले संतोष ने बताया कि सर्दी में अब रुई की रजाई का काम काफी घट गया है। काम कम हुआ तो अब गृहस्थी चलाने के लिए दूसरे काम तलाशने पड़ते हैं। सर्दी में फाइबर की रजाई व अन्य कपड़े बेचते हैं। मौसम बदलने पर चादर आदि की बिक्री करते हैं। इसी तरह राठ रोड पर करीब 10-15 दुकानदार हुआ करते थे। वर्तमान में इनकी संख्या दो ही रह गई है। जबकि पूरे शहर में धुनकरों की संख्या 30 से 35 हुआ करती थी, जहां 400 लोगों तक को रोजगार मिलता था। वह अब सात से आठ तक सिमट गई है और रोजगार पाने वालों की संख्या भी 10 से 15 रह गई है। इस काम से जुड़े लोग बुरे दौर का सामना कर रहे हैं।
कारोबार से जुड़े विशेषज्ञ और जिला ग्रामोद्योग अधिकारी डीआर प्रेमी बताते हैं कि रुई की रजाई हेल्दी होती है। सर्दी में किफायती होती है। इस कारोबार में यदि रजाई तैयार करने में कुछ बदलाव किया जाए तो कारोबार में रंग भर सकता है। बताया कि रजाई का कवर कपड़ा यदि अच्छी क्वालिटी का और रंग-बिरंगा हो तो रुई को छोटे रोलर या संबंधित मशीन के माध्यम से समतल कर कपड़े के द्वारा फाइबर लुक दिया जा सकता है। इससे जुड़े कारेाबारी, धुनकर मिलें तो उन्हें इस तरह की सलाह दी जा सकती है। वे भी बता सकते हैं कि उन्हें इसमें क्या आवश्यकता रहेगी और किस तरह से उसे बेहतर कर सकते हैं।

फाइबर की रजाई या कंबल दुकानों से उसी दिन खरीद सकते हैं। रुई की रजाई के लिए ऑर्डर देना पड़ता है। व्यापारी संतोष ने बताया कि पांच किलो रजाई की रुई 600 रुपये से 800 रुपये में आती है। धुनाई में 100 रुपये लगते हैं। धागा डलवाने के 150 से 200 रुपये देने होते हैं। इन सभी कार्य में समय भी लगता है।
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