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नहीं डाला जलरोक बांध, बिना काम हुआ भुगतान
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कदौरा। ग्राम पंचायत जकसिया में परलोक सिधारी दुलारी ने जिस जलरोक बांध (चकरोड) में काम किया था, दरअसल उस बांध पर काम ही नहीं हुआ है। इस बांध को बनाने के नाम पर मनरेगा से 15 लाख रुपये से अधिक का भुगतान भी कर दिया गया है। मामला खुलने के बाद अधिकारी जांच के नाम पर कई बार जकसिया गांव की दौड़ लगा चुके हैं। अधिकारी इस मामले में कार्रवाई करने के बजाय लीपापोती करने में जुटे हैं।
ग्राम जकसिया में अखिलेश के खेत से श्रीधर के खेत तक जलरोक बांध (चकरोड) में काम कराना दिखाया गया था। इसी में मृतका दुलारी के नाम से 28 दिन की मजदूरी 5712 रुपये निकाले गए थे। उसके बाद उसके दोनों पुत्र सुरेश, सत्य सिंह और बहू मोनिका को भी काम में दिखाकर उनके नाम से भी 28-28 दिन की मजदूरी निकाल ली। इनको 100 का दिवस काम मिलने पर बीडीओ ने प्रशस्ति पत्र भी दिया था।
इस मामले में एक और फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। कार्य स्थल में लिखे किसान अखिलेश और श्रीधर ने बताया जिस बांध में कार्य को दिखाया जा रहा है वहां एक वर्ष से फावड़ा भी नहीं लगाया गया है। गांव के छोटेलाल, अनिल कुमार, मनफूल, रामबाबू, सुरेश कुमार कहते हैं कि इस कार्य में प्रधान की भी मिलीभगत है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें इस सड़क के बनने की जानकारी अखबार में खबर छपने के बाद पता चली।
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बगैर एमबी के हुआ लाखों का भुगतान
जकसिया ग्राम पंचायत में मनरेगा से जलरोक बांध (चकरोड) में कराए गए कार्य की एमबी नहीं बनाई गई। 51 डिमांड और सात हजार मजदूर दिवस सृजित दिखा कर 15 लाख रुपये से अधिक की रकम हड़प ली गई। फर्जीवाड़े की शिकायत 15 दिन पूर्व आरटीआई कार्यकर्ता अरुण कुमार ने भी डीएम और सीडीओ को पत्र भेज कर चुके हैं। शिकायत पर डीएम ने परियोजना निदेशक ( पीडी ) की अगुवाई में दो सदस्यीय टीम गठित की है।
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ग्राम जकसिया में अखिलेश के खेत से श्रीधर के खेत तक जलरोक बांध (चकरोड) में काम कराना दिखाया गया था। इसी में मृतका दुलारी के नाम से 28 दिन की मजदूरी 5712 रुपये निकाले गए थे। उसके बाद उसके दोनों पुत्र सुरेश, सत्य सिंह और बहू मोनिका को भी काम में दिखाकर उनके नाम से भी 28-28 दिन की मजदूरी निकाल ली। इनको 100 का दिवस काम मिलने पर बीडीओ ने प्रशस्ति पत्र भी दिया था।
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इस मामले में एक और फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। कार्य स्थल में लिखे किसान अखिलेश और श्रीधर ने बताया जिस बांध में कार्य को दिखाया जा रहा है वहां एक वर्ष से फावड़ा भी नहीं लगाया गया है। गांव के छोटेलाल, अनिल कुमार, मनफूल, रामबाबू, सुरेश कुमार कहते हैं कि इस कार्य में प्रधान की भी मिलीभगत है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें इस सड़क के बनने की जानकारी अखबार में खबर छपने के बाद पता चली।
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बगैर एमबी के हुआ लाखों का भुगतान
जकसिया ग्राम पंचायत में मनरेगा से जलरोक बांध (चकरोड) में कराए गए कार्य की एमबी नहीं बनाई गई। 51 डिमांड और सात हजार मजदूर दिवस सृजित दिखा कर 15 लाख रुपये से अधिक की रकम हड़प ली गई। फर्जीवाड़े की शिकायत 15 दिन पूर्व आरटीआई कार्यकर्ता अरुण कुमार ने भी डीएम और सीडीओ को पत्र भेज कर चुके हैं। शिकायत पर डीएम ने परियोजना निदेशक ( पीडी ) की अगुवाई में दो सदस्यीय टीम गठित की है।