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बैंकों के बाहर कैश खत्म की तख्ती, भीड़ छंटी
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Fri, 18 Nov 2016 10:55 PM IST
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बंद एक्सिस बैंक का एटीएम।
- फोटो : अमर उजाला
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नोट बंदी के आठवें दिन शुक्रवार को भी जनजीवन सामान्य नहीं हो सका है। तीन चार दिन तक बैंकों में लंबी लाइनों के लगने का सिलसिला जारी रहा। शुक्रवार को जब अमर उजाला संवाददाता ने शहर का दौरा किया तो अधिकतर बैंकों के बाहर भीड़ गायब मिली। पूछने पर पता चला कि बैंक में कैश है ही नहीं। अधिकतर बैंकों ने बैंक के बाहर तख्तियां टांग रखी थीं
जिसमें पैसे न होने और केवल खाते धारकों के पैसे ही जमा करने की बात कही गई थी। बैंक आए कुछ लोगाें ने बताया कि आरबीआई के नियम के अनुरूप स्याही न ा आने से भी बैंक पैसे नहीं बदल रहे हैं। ऐसे में परेशानी बढ़ती जा रही है। शहर का भी दौरा किया गया और इस दौरान कुछ गृहणियों से बात भी की गई। अधिकतर ने बताया कि उनके पास छुट्टे
पैसों की कमी हो गई है। इससे रोजमर्रा की चीजें खरीदने में परेशानी हो रही है। दुकानदार चाहे वह सब्जी का हो या परचून का, छुट्टे पैसे ही मांगता है। ऐसे में साग भाजी तक लेना मुश्किल हो गया है। वहीं व्यापारियों ने बताया कि उनकी दुकानों में सामान भरा है पर लेने वाला कोई नहीं। एक कपड़ा व्यापारी मंटू भट्ठावाले ने बताया कि शादी का सीजन होने के
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बावजूद अब तक केवल दस प्रतिशत ही धंधा हुआ है जबकि पिछले वर्ष 90 प्रतिशत से भी अधिक बिजनेस हुआ था। यही हाल निर्माण सामग्री बेचने वालों का भी है। एक व्यापारी श्याम कुमार ने बताया कि नोट बंदी के बाद कालेधन पर जबरदस्त तरीके से रोक लगी है। लोगाें के पास इस वक्त घर का खर्च चलाने के लिए तक पैसे नहीं हैं। ऐसे में सभी निर्माण कार्य रुके
हुए हैं। उनकी दुकान पर इन दिनों कोई नहीं आ रहा। बताया कि इसके चलते मजदूरों का भी नुकसान हुआ है। निर्माण कार्य बंद होने से उनकी मजदूरी मारी जा रही है।
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जिसमें पैसे न होने और केवल खाते धारकों के पैसे ही जमा करने की बात कही गई थी। बैंक आए कुछ लोगाें ने बताया कि आरबीआई के नियम के अनुरूप स्याही न ा आने से भी बैंक पैसे नहीं बदल रहे हैं। ऐसे में परेशानी बढ़ती जा रही है। शहर का भी दौरा किया गया और इस दौरान कुछ गृहणियों से बात भी की गई। अधिकतर ने बताया कि उनके पास छुट्टे
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पैसों की कमी हो गई है। इससे रोजमर्रा की चीजें खरीदने में परेशानी हो रही है। दुकानदार चाहे वह सब्जी का हो या परचून का, छुट्टे पैसे ही मांगता है। ऐसे में साग भाजी तक लेना मुश्किल हो गया है। वहीं व्यापारियों ने बताया कि उनकी दुकानों में सामान भरा है पर लेने वाला कोई नहीं। एक कपड़ा व्यापारी मंटू भट्ठावाले ने बताया कि शादी का सीजन होने के
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बावजूद अब तक केवल दस प्रतिशत ही धंधा हुआ है जबकि पिछले वर्ष 90 प्रतिशत से भी अधिक बिजनेस हुआ था। यही हाल निर्माण सामग्री बेचने वालों का भी है। एक व्यापारी श्याम कुमार ने बताया कि नोट बंदी के बाद कालेधन पर जबरदस्त तरीके से रोक लगी है। लोगाें के पास इस वक्त घर का खर्च चलाने के लिए तक पैसे नहीं हैं। ऐसे में सभी निर्माण कार्य रुके
हुए हैं। उनकी दुकान पर इन दिनों कोई नहीं आ रहा। बताया कि इसके चलते मजदूरों का भी नुकसान हुआ है। निर्माण कार्य बंद होने से उनकी मजदूरी मारी जा रही है।