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गेहूं, जौ के लिए वरदान तो चना, मटर को नुकसान
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राजीव
- फोटो : ORAI
जालौन। गुरुवार रात मौसम में अचानक आए बदलाव से जहां तेज हवाएं चलने लगीं वहीं झमाझम बारिश भी हुई। एकाएक हुई बारिश से कहीं किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें नजर आईं तो कहीं उनके चेहरों पर मुस्कुराहट भी दी।
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बेमौसम हुई बारिश गेहूं व जौ की फसल के लिए लाभदायक है। किसानों का कहना है कि वे नहरों और रजबहों में पानी न होने से परेशान थे, बारिश तो गेहूं व जौ के लिए अमृत समान साबित हुई है। वहीं यही बारिश मटर और सरसों के लिए नुकसान दायक भी है।
प्रगतिशील कृषक कृपाशंकर खत्री बताते हैं कि गेहूं व जौ की फसलों को पानी चाहिए था, नहरें भी फुलगेज से नहीं चल रहीं थी। जिस कारण किसान परेशान था। शुक्रवार रात अचानक हुई बारिश वाकई किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। किसानों को इससे काफी राहत मिली है।
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किसान राजीव माहेश्वरी का कहना है कि इस समय खेतों में मटर, चना आदि की फसल खड़ी है। बारिश के चलते फसल जमीन पर बिछ गई है। मटर की जो फलियां जमीन से चिपक गई हैं समझो वह खराब ही हो जाएंगी। इसी प्रकार चना की फसल को भी नुकसान पहुंचा है।
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कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बेमौसम हुई बारिश गेहूं व जौ की फसल के लिए लाभदायक है। किसानों का कहना है कि वे नहरों और रजबहों में पानी न होने से परेशान थे, बारिश तो गेहूं व जौ के लिए अमृत समान साबित हुई है। वहीं यही बारिश मटर और सरसों के लिए नुकसान दायक भी है।
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प्रगतिशील कृषक कृपाशंकर खत्री बताते हैं कि गेहूं व जौ की फसलों को पानी चाहिए था, नहरें भी फुलगेज से नहीं चल रहीं थी। जिस कारण किसान परेशान था। शुक्रवार रात अचानक हुई बारिश वाकई किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। किसानों को इससे काफी राहत मिली है।
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किसान राजीव माहेश्वरी का कहना है कि इस समय खेतों में मटर, चना आदि की फसल खड़ी है। बारिश के चलते फसल जमीन पर बिछ गई है। मटर की जो फलियां जमीन से चिपक गई हैं समझो वह खराब ही हो जाएंगी। इसी प्रकार चना की फसल को भी नुकसान पहुंचा है।