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रौद्र रूप दिखाकर घटने लगी बेतवा, मिली राहत
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कालपी में ग्रामीणों से जानकारी लेते एसडीएम
- फोटो : ORAI
उरई (जालौन)। बाढ़ का रौद्र रूप दिखाकर बेतवा का जल स्तर से घटने लगा है। जिससे जिले के बेतवा पट्टी के किनारे बसे गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली। शनिवार सुबह जैसे ही बेतवा ने खतरे का निशान 122.66 मीटर को छुआ था वैसे ही गांवों में दहशत का माहौल हो गया था, लेकिन शनिवार रात से ही जल स्तर घटना शुरू हो गया था। जल आयोग के प्रभारी हीरालाल के अनुसार शाम पांच बजे तक बेतवा का जल स्तर 122 से घट कर 112 पर पहुंच गया है और अभी भी घटने का सिलसिला लगातार जारी है।
मध्य प्रदेश के क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश की वजह से देश के कई बांध उफना गए हैं और लगातार बांधों का पानी नदियों में छोड़ा जा रहा है। 14 व 15 अगस्त को ललितपुर के माताटीला व राजघाट बांध से चार लाख क्यूसेक पानी बेतवा में छोड़ा गया था। जिससे बेतवा उफान पर हो गई थी। जिससे जिले में बेतवा के किनारे बसे दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्यालय से कट गया है। वहीं दर्जनों गांवों में बाढ़ जैसे हालात हो गए थे, लेकिन शनिवार की रात से बेतवा का जल स्तर घटने लगा है।
जिससे तलहटी के गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार देर रात को बेतवा का जल स्तर खतरे के निशान 122.66 मीटर तक पहुंच गई थी। जिससे प्रशासन ने अलर्ट जारी करते हुए बाढ़ के हालातों से निपटने की तैयारी तेज कर दी थी, लेकिन शनिवार सुबह से ही बेतवा के जल स्तर बढ़ने की रफ्तार थमने लगी थी और रात होते इसमें गिरावट शुरू हो गई। केंद्रीय जल आयोग के प्रभारी हीरालाल ने बताया कि शनिवार रात से बेतवा का जलस्तर घटने लगा है। जो रविवार शाम तक करीब 10 से 12 मीटर तक घट चुका है और अभी भी यह सिलसिला तेजी से जारी है। जिससे आस के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
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आटा व महेबा क्षेत्र में गांवों में घुसा नदियों का पानी
आटा/महेबा। आटा क्षेत्र के परासन में बेतवा नदी के उफान पर होने से इस क्षेत्र के निचले इलाकों के गांवों में पानी भर गया है। इसमें रामपुर, कुईया, छार, अलमोड़ी डेरा, सुनेहठा, काहठा, ददरी, खरका आदि प्रमुख गांव है। पानी भरने से ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं इस क्षेत्र में बोई गई सैकड़ों एकड़ किसानों की फसल भी नष्ट हो गई है, जिससे किसान परेशान है। किसान सुशील तिवारी, जितेंद्र सिंह, सोबरन सिंह, विनोद, अरविंद तिवारी आदि का कहना है कि फसल नष्ट होने से उनके खाने के लाले पड़ गए है। उनका काफी नुकसान हुआ है। वहीं यमुना में उफान की वजह से महेवा क्षेत्र की नून नदी व मलंगा नाले में भी पानी बढ़ गया, जिससे यहां की सैकड़ों एकड़ फसल नष्ट हो गई। इसके साथ ही पिपरोधा के लिए बने रपटे के ऊपर से पानी निकलने की वजह से क्षेत्र के कई गांवों का संपर्क मुख्यालय से कट गया है। जिससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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मध्य प्रदेश के क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश की वजह से देश के कई बांध उफना गए हैं और लगातार बांधों का पानी नदियों में छोड़ा जा रहा है। 14 व 15 अगस्त को ललितपुर के माताटीला व राजघाट बांध से चार लाख क्यूसेक पानी बेतवा में छोड़ा गया था। जिससे बेतवा उफान पर हो गई थी। जिससे जिले में बेतवा के किनारे बसे दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्यालय से कट गया है। वहीं दर्जनों गांवों में बाढ़ जैसे हालात हो गए थे, लेकिन शनिवार की रात से बेतवा का जल स्तर घटने लगा है।
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जिससे तलहटी के गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार देर रात को बेतवा का जल स्तर खतरे के निशान 122.66 मीटर तक पहुंच गई थी। जिससे प्रशासन ने अलर्ट जारी करते हुए बाढ़ के हालातों से निपटने की तैयारी तेज कर दी थी, लेकिन शनिवार सुबह से ही बेतवा के जल स्तर बढ़ने की रफ्तार थमने लगी थी और रात होते इसमें गिरावट शुरू हो गई। केंद्रीय जल आयोग के प्रभारी हीरालाल ने बताया कि शनिवार रात से बेतवा का जलस्तर घटने लगा है। जो रविवार शाम तक करीब 10 से 12 मीटर तक घट चुका है और अभी भी यह सिलसिला तेजी से जारी है। जिससे आस के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
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आटा व महेबा क्षेत्र में गांवों में घुसा नदियों का पानी
आटा/महेबा। आटा क्षेत्र के परासन में बेतवा नदी के उफान पर होने से इस क्षेत्र के निचले इलाकों के गांवों में पानी भर गया है। इसमें रामपुर, कुईया, छार, अलमोड़ी डेरा, सुनेहठा, काहठा, ददरी, खरका आदि प्रमुख गांव है। पानी भरने से ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं इस क्षेत्र में बोई गई सैकड़ों एकड़ किसानों की फसल भी नष्ट हो गई है, जिससे किसान परेशान है। किसान सुशील तिवारी, जितेंद्र सिंह, सोबरन सिंह, विनोद, अरविंद तिवारी आदि का कहना है कि फसल नष्ट होने से उनके खाने के लाले पड़ गए है। उनका काफी नुकसान हुआ है। वहीं यमुना में उफान की वजह से महेवा क्षेत्र की नून नदी व मलंगा नाले में भी पानी बढ़ गया, जिससे यहां की सैकड़ों एकड़ फसल नष्ट हो गई। इसके साथ ही पिपरोधा के लिए बने रपटे के ऊपर से पानी निकलने की वजह से क्षेत्र के कई गांवों का संपर्क मुख्यालय से कट गया है। जिससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।