{"_id":"60bfb60e8ebc3eb4e76c944e","slug":"art-film-market-drama-artist-orai-news-knp633016523","type":"story","status":"publish","title_hn":"अभिनेता को वास्तविक संतुष्टि थिएटर से ही मिलती है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अभिनेता को वास्तविक संतुष्टि थिएटर से ही मिलती है
विज्ञापन
कोंच। भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) की निशुल्क ग्रीष्मकालीन बाल एवं युवा रंगकर्मी नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला के आठवें दिन मंगलवार को वर्चुअल माध्यम प्रशिक्षण में जानकारी दी गई। लोक कला, किन्नर विमर्श विशेषज्ञ एवं दूरदर्शन के सीरियलों में अभिनय कर चुकी अभिनेत्री गीतिका वेदिका ने रंगकर्मियों को संबोधित करते हुए रंगकर्मियों की जिज्ञासाओं को शांत किया। कहा कि सिनेमा पैसा कमाने का माध्यम हो सकता पर अभिनेता को वास्तविक संतुष्टि थिएटर से ही मिलती है। रंगकर्म जनसंवाद का भी सशक्त माध्यम है और रंगकर्मी सिनेमा और जनता के बीच के लिए बांधने का काम करता है। उन्होंने कहा कि रंगकर्मी में समस्त कलाओं का समावेश होता है। एक श्रेष्ठ कलाकार को न केवल अभिनय बल्कि गायन, वादन, मंच सज्जा, कोरियोग्राफी आदि की भी आधारभूत जानकारी होनी चाहिए।
संजीव स्वर्णकार सरस ने कहा कि काम कुछ तो ऐसे निश्चित कर रहा है आदमी, बेवजह दुनिया में जिस तरह मर रहा है आदमी, बंद हैं बाजार सारे और गलियां बंद हैं, अपने द्वारे खोने से डर रहा है आदमी। इप्टा के प्रांतीय सचिव डॉ मोहम्मद नईम ने कहा कि अभिनय हर व्यक्ति के अंदर छिपा होता है बस जरूरत होती है उसे पहचानने की और एक सही दिशा और दशा देने की। यदि प्रयास पूरी इमानदारी और निष्ठा के साथ किया गया हो तो वह जरूर सफल होता है। सरंक्षक अनिल ने कहा कि इप्टा कोंच का हमेशा यही प्रयास रहता है कि आपके प्रयास को एक साकार रूप देने की कोशिश की जाए। इस दौरान निर्मला, प्रदीप, अनूप, अफसर खान, अक्षय सिंह, अंकित राय, अंशिका त्यागी, साक्षी, निखिल मोदी आदि ने सहभाग किया। संचालन पारसमणि अग्रवाल ने व आभार ट्विंकल राठौर ने जताया।
विज्ञापन
संजीव स्वर्णकार सरस ने कहा कि काम कुछ तो ऐसे निश्चित कर रहा है आदमी, बेवजह दुनिया में जिस तरह मर रहा है आदमी, बंद हैं बाजार सारे और गलियां बंद हैं, अपने द्वारे खोने से डर रहा है आदमी। इप्टा के प्रांतीय सचिव डॉ मोहम्मद नईम ने कहा कि अभिनय हर व्यक्ति के अंदर छिपा होता है बस जरूरत होती है उसे पहचानने की और एक सही दिशा और दशा देने की। यदि प्रयास पूरी इमानदारी और निष्ठा के साथ किया गया हो तो वह जरूर सफल होता है। सरंक्षक अनिल ने कहा कि इप्टा कोंच का हमेशा यही प्रयास रहता है कि आपके प्रयास को एक साकार रूप देने की कोशिश की जाए। इस दौरान निर्मला, प्रदीप, अनूप, अफसर खान, अक्षय सिंह, अंकित राय, अंशिका त्यागी, साक्षी, निखिल मोदी आदि ने सहभाग किया। संचालन पारसमणि अग्रवाल ने व आभार ट्विंकल राठौर ने जताया।
विज्ञापन