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हादसों को आमंत्रण दे रहा जर्जर विद्युत पोल
Jalaun
Updated Sun, 13 Jan 2013 05:30 AM IST
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कोंच(जालौन)। मुहल्ला गांधीनगर में बिजली का जर्जर खंभा कभी भी धराशाई होकर किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकता है। मुहल्ले के लोग इस पोल की जर्जर स्थिति को लेकर काफी डरे हैं और इसे बदलने की मांग कर रहे हैं।
गांधी नगर के सैरा इलाके में सुनील दूध डेयरी के पास बिजली का एक पोल नीचे से बिलकुल जर्जर हालत में है, इसका पंचानवे फीसदी हिस्सा गल चुका है और कभी भी धराशाई हो सकता है। इलाकाई बाशिंदों पुष्पेंद्र शर्मा, सुनील पटेल, प्रमोद रावत, जगदीशप्रसाद, अरविंद खन्ना, राहुल शर्मा आदि ने एसडीएम वैभव मिश्रा को ज्ञापन देकर कहा है कि नागरिकों ने कई दफा तहसील दिवसों में प्रार्थना पत्र देकर अवगत कराया है यह विद्युत पोल कभी भी गिर सकता है, लिहाजा इसका अविलंब बदलवाना जरूरी है।
इंसेट में-
चार माह से अंधेरे में है फुलैला गांव
कोंच। ग्राम फुलैला में चार महीने से ग्रामीण अंधेरे में जीने को मजबूर हैं। गांव की आबादी लगभग तीन हजार के आसपास है लेकिन यहां महज 63 केबीए की क्षमता का ट्रांसफार्मर लगा है जो आएदिन फुंकता है। गांव के निवासी और उम्मीद सामाजिक संस्था के संस्थापक आदित्यराज का कहना है कि चार माह पहले लगाया गया 63 की क्षमता का ट्रांसफार्मर दस दिन में फुंक गया और तबसे गांव अंधेरे में है। उन्होंने मांग की है कि यहां 100 केबीए की क्षमता का ट्रांसफार्मर लगाया जाए।
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गांधी नगर के सैरा इलाके में सुनील दूध डेयरी के पास बिजली का एक पोल नीचे से बिलकुल जर्जर हालत में है, इसका पंचानवे फीसदी हिस्सा गल चुका है और कभी भी धराशाई हो सकता है। इलाकाई बाशिंदों पुष्पेंद्र शर्मा, सुनील पटेल, प्रमोद रावत, जगदीशप्रसाद, अरविंद खन्ना, राहुल शर्मा आदि ने एसडीएम वैभव मिश्रा को ज्ञापन देकर कहा है कि नागरिकों ने कई दफा तहसील दिवसों में प्रार्थना पत्र देकर अवगत कराया है यह विद्युत पोल कभी भी गिर सकता है, लिहाजा इसका अविलंब बदलवाना जरूरी है।
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इंसेट में-
चार माह से अंधेरे में है फुलैला गांव
कोंच। ग्राम फुलैला में चार महीने से ग्रामीण अंधेरे में जीने को मजबूर हैं। गांव की आबादी लगभग तीन हजार के आसपास है लेकिन यहां महज 63 केबीए की क्षमता का ट्रांसफार्मर लगा है जो आएदिन फुंकता है। गांव के निवासी और उम्मीद सामाजिक संस्था के संस्थापक आदित्यराज का कहना है कि चार माह पहले लगाया गया 63 की क्षमता का ट्रांसफार्मर दस दिन में फुंक गया और तबसे गांव अंधेरे में है। उन्होंने मांग की है कि यहां 100 केबीए की क्षमता का ट्रांसफार्मर लगाया जाए।
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