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बसपा से पूर्व विधायक निष्कासित
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उरई/कालपी। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बसपा में एक बार फिर घमासान छिड़ गया है। कोआर्डिनेटर और पूर्व विधायक आमने-सामने हैं। शुक्रवार को देर रात पार्टी के पूर्व विधायक संतराम कुशवाह के आवास पर हुई बैठक में मुख्य अतिथि एवं मंडल के जोन इंचार्ज लालाराम अहिरवार ने कालपी के पूर्व विधायक छोटे सिंह चौहान को अनुशासनहीनता और गुटबाजी के आरोप में पार्टी से निष्कासित कर दिया।
बता दें कि सप्ताह भर पूर्व ही बसपा ने पूर्व विधायक अजय उर्फ पंकज अहिरवार को लोकसभा प्रभारी घोषित किया है। लिहाजा कार्यकर्ता चुनाव की तैयारियों में भी जुटे नजर आने लगे थे। इस बीच शुक्रवार को अचानक हुई बैठक में पूर्व विधायक के निष्कासन का फैसला आने से बसपा में खलबली मच गई है।
पुराने कार्यकर्ताओं का कहना है कि चुनाव के वक्त इस तरह के फैसले पार्टी में गुटबाजी को बढ़ावा देंगे, क्योंकि निष्कासन का कोई सटीक कारण भी नहीं बताया जा रहा है। बैठक के दौरान 12 मार्च को सपा-बसपा गठबंधन के कार्यकर्ता सम्मेलन की तैयारियों को लेकर सभी को जिम्मेदारी भी बांटी गई। बैठक में जिलाध्यक्ष परसुराम पाल, पूर्व मंत्री अनवर अली, कन्हैयालाल कुशवाह, बृजेश जाटव, कीरत सिंह दोहरे, संजय गौतम आदि रहे।
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मुख्य जोन इंचार्ज लालाराम का कहना है कि छोटे सिंह के निष्कासन का निर्णय लखनऊ में पार्टी की हाईकमान की ओर से लिया गया है। उन्हें तो सिर्फ इतना ही मालूम है कि लगातार अनुशासनहीनता और गुटबाजी के आरोप में कार्रवाई की गई है, क्योंकि इन दोनों कारणों से पार्टी चुनाव में कमजोर पड़ सकती थी।
वहीं पूर्व विधायक छोटे सिंह का कहना है कि कोआर्डिनेटर बहन जी को गुमराह करते हैं, इसमें बहन जी की कोई गलती नहीं है। वे अभी भी पार्टी प्रत्याशी को जिताने का हर संभव प्रयास करेंगे। इस बीच मौका निकालकर बहन जी से मिलेंगे और कम से कम निष्कासन का कारण तो जरूर जानने का प्रयास करेंगे।
तीसरी बार हुआ पार्टी से निष्कासन
2007 में कालपी से बसपा के विधायक रहे छोटे सिंह का यह तीसरा निष्कासन है। सबसे पहले 2012 में निष्कासित हुए, फिर 2017 में बसपा से कालपी सीट पर चुनाव लड़ा और 2018 में दोबारा निष्कासित किए गए। तीन तीन बार निष्कासित होने के बाद भी छोटे सिंह ने कभी पार्टी नहीं छोड़ी।
लोकसभा का टिकट तो नहीं बना वजह
पार्टी सूत्रों की मानें तो लोकसभा प्रभारी की घोषणा से पहले कालपी के ही अनुसूचित जाति के कद्दावर नेता का नाम सूची में सबसे ऊपर था लेकिन ऐन वक्त पर कोंच के अजय उर्फ पंकज को प्रभारी घोषित कर दिया गया। इस पर संदेश फैल गया कि छोटे सिंह ने ही कालपी के कद्दावर नेता का नाम हटवाया है। बस फिर क्या था, उसी कद्दावर नेता ने समर्थकों समेत शुक्रवार को लखनऊ पहुंचकर छोटे सिंह पर जाति के लोगों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया। जिसके बाद ही निष्कासन का फरमान जारी हो गया। सूत्रों के मुताबिक छोटे सिंह और कद्दावर नेता के बीच कालपी में शुरू से ही पाला सा खिंचा रहा है। माना जा रहा है कि घोषित लोकसभा प्रभारी अजय अहिरवार भी अब पूर्व विधायक की पैरवी में लखनऊ जाने की तैयारी कर रहे हैं।
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बता दें कि सप्ताह भर पूर्व ही बसपा ने पूर्व विधायक अजय उर्फ पंकज अहिरवार को लोकसभा प्रभारी घोषित किया है। लिहाजा कार्यकर्ता चुनाव की तैयारियों में भी जुटे नजर आने लगे थे। इस बीच शुक्रवार को अचानक हुई बैठक में पूर्व विधायक के निष्कासन का फैसला आने से बसपा में खलबली मच गई है।
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पुराने कार्यकर्ताओं का कहना है कि चुनाव के वक्त इस तरह के फैसले पार्टी में गुटबाजी को बढ़ावा देंगे, क्योंकि निष्कासन का कोई सटीक कारण भी नहीं बताया जा रहा है। बैठक के दौरान 12 मार्च को सपा-बसपा गठबंधन के कार्यकर्ता सम्मेलन की तैयारियों को लेकर सभी को जिम्मेदारी भी बांटी गई। बैठक में जिलाध्यक्ष परसुराम पाल, पूर्व मंत्री अनवर अली, कन्हैयालाल कुशवाह, बृजेश जाटव, कीरत सिंह दोहरे, संजय गौतम आदि रहे।
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मुख्य जोन इंचार्ज लालाराम का कहना है कि छोटे सिंह के निष्कासन का निर्णय लखनऊ में पार्टी की हाईकमान की ओर से लिया गया है। उन्हें तो सिर्फ इतना ही मालूम है कि लगातार अनुशासनहीनता और गुटबाजी के आरोप में कार्रवाई की गई है, क्योंकि इन दोनों कारणों से पार्टी चुनाव में कमजोर पड़ सकती थी।
वहीं पूर्व विधायक छोटे सिंह का कहना है कि कोआर्डिनेटर बहन जी को गुमराह करते हैं, इसमें बहन जी की कोई गलती नहीं है। वे अभी भी पार्टी प्रत्याशी को जिताने का हर संभव प्रयास करेंगे। इस बीच मौका निकालकर बहन जी से मिलेंगे और कम से कम निष्कासन का कारण तो जरूर जानने का प्रयास करेंगे।
तीसरी बार हुआ पार्टी से निष्कासन
2007 में कालपी से बसपा के विधायक रहे छोटे सिंह का यह तीसरा निष्कासन है। सबसे पहले 2012 में निष्कासित हुए, फिर 2017 में बसपा से कालपी सीट पर चुनाव लड़ा और 2018 में दोबारा निष्कासित किए गए। तीन तीन बार निष्कासित होने के बाद भी छोटे सिंह ने कभी पार्टी नहीं छोड़ी।
लोकसभा का टिकट तो नहीं बना वजह
पार्टी सूत्रों की मानें तो लोकसभा प्रभारी की घोषणा से पहले कालपी के ही अनुसूचित जाति के कद्दावर नेता का नाम सूची में सबसे ऊपर था लेकिन ऐन वक्त पर कोंच के अजय उर्फ पंकज को प्रभारी घोषित कर दिया गया। इस पर संदेश फैल गया कि छोटे सिंह ने ही कालपी के कद्दावर नेता का नाम हटवाया है। बस फिर क्या था, उसी कद्दावर नेता ने समर्थकों समेत शुक्रवार को लखनऊ पहुंचकर छोटे सिंह पर जाति के लोगों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया। जिसके बाद ही निष्कासन का फरमान जारी हो गया। सूत्रों के मुताबिक छोटे सिंह और कद्दावर नेता के बीच कालपी में शुरू से ही पाला सा खिंचा रहा है। माना जा रहा है कि घोषित लोकसभा प्रभारी अजय अहिरवार भी अब पूर्व विधायक की पैरवी में लखनऊ जाने की तैयारी कर रहे हैं।