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ग्रामीणों के बहिष्कार ने छुड़ाए अफसरों के पसीने
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मुहम्मदाबाद/ कदौरा। क्षेत्र में सड़क की मांग को लेकर जिले के डकोर ब्लाक व कदौरा ब्लाक के कई गांवों के लोगों ने चुनाव बहिष्कार किया। बहिष्कार की सूचना मिलते ही कई आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने बुझाने का प्रयास किया, लेकिन डकोर ब्लाक के बंधौली, सिमिरिया, खरका, ददरी, टीकर, ऐर, कुरैना तो वहीं कदौरा के जकसिया गांव के बाशिंदे नहीं माने और उन्होंने चुनाव का बहिष्कार किया। इस दौरान कई गांवों में ग्रामीणों को समझाने पहुंचे अधिकारियों व पुलिस कर्मियों से ग्रामीणों की तीखी झड़पें भी हुईं।
सड़क, बिजली, पानी जैसे मूलभूत समस्याओं को लेकर डकोर ब्लाक के बंधौली, सिमिरिया, ऐर, खरका, ददरी, टीकर, कुरैना आदि के ग्रामीण कई सालों से जिले के आला अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी किसी ने भी सुध नहीं ली। स्थिति यह है कि इन गांवों में जाने वाले रास्ते इतने खराब हैं कि इनमें पैदल चलना भी मुश्किल है। कई बार खराब सड़क की वजह से इन गांवों के कई लोग मौत का शिकार बन चुके हैं। जिससे लोगों में आक्रोश व्याप्त था।
आक्रोश की वजह से कई दिन से इन गांवों में चुनाव बहिष्कार को लेकर पोस्टर बेनर लगाए जा रहे थे, जिसे प्रशासनिक अधिकारियों ने गंभीरता से नहीं लिया। सोमवार को जब इन गांवों में बने बूथों पर कोई भी मतदाता नहीं पहुंचा तो प्रशासन के अधिकारी जागे और गांव पहुंचे। पहले स्थानीय पुलिस व तहसीलदार ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण आक्रोशित हो उठे और इस दौरान ग्रामीणों की पुलिस कर्मियों से तीखी झड़प भी हुई।
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इसके बाद सूचना पर एडीएम, एसडीएम, सीओ, डीआईओएस सहित कई आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण नहीं माने और चुनाव का बहिष्कार किया। इस दौरान उन्होंने नारेबाजी की कि सड़क नहीं तो चुनाव नहीं। इसी तरह कदौरा के जकसिया गांव में भी ग्रामीणों ने सड़क की समस्या को लेकर चुनाव बहिष्कार किया। कई बार कालपी एसडीएम सुनील शुक्ला मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाया, लेकिन ग्रामीण नहीं माने। एसडीएम का कहना है कि जल्द ही खराब सड़क का सर्वे कराकर उसे पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा। वहीं उरई एसडीएम विकास कश्यप का कहना है कि ग्रामीणों को काफी समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन वह नहीं माने।
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सड़क, बिजली, पानी जैसे मूलभूत समस्याओं को लेकर डकोर ब्लाक के बंधौली, सिमिरिया, ऐर, खरका, ददरी, टीकर, कुरैना आदि के ग्रामीण कई सालों से जिले के आला अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी किसी ने भी सुध नहीं ली। स्थिति यह है कि इन गांवों में जाने वाले रास्ते इतने खराब हैं कि इनमें पैदल चलना भी मुश्किल है। कई बार खराब सड़क की वजह से इन गांवों के कई लोग मौत का शिकार बन चुके हैं। जिससे लोगों में आक्रोश व्याप्त था।
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आक्रोश की वजह से कई दिन से इन गांवों में चुनाव बहिष्कार को लेकर पोस्टर बेनर लगाए जा रहे थे, जिसे प्रशासनिक अधिकारियों ने गंभीरता से नहीं लिया। सोमवार को जब इन गांवों में बने बूथों पर कोई भी मतदाता नहीं पहुंचा तो प्रशासन के अधिकारी जागे और गांव पहुंचे। पहले स्थानीय पुलिस व तहसीलदार ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण आक्रोशित हो उठे और इस दौरान ग्रामीणों की पुलिस कर्मियों से तीखी झड़प भी हुई।
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इसके बाद सूचना पर एडीएम, एसडीएम, सीओ, डीआईओएस सहित कई आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण नहीं माने और चुनाव का बहिष्कार किया। इस दौरान उन्होंने नारेबाजी की कि सड़क नहीं तो चुनाव नहीं। इसी तरह कदौरा के जकसिया गांव में भी ग्रामीणों ने सड़क की समस्या को लेकर चुनाव बहिष्कार किया। कई बार कालपी एसडीएम सुनील शुक्ला मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाया, लेकिन ग्रामीण नहीं माने। एसडीएम का कहना है कि जल्द ही खराब सड़क का सर्वे कराकर उसे पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा। वहीं उरई एसडीएम विकास कश्यप का कहना है कि ग्रामीणों को काफी समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन वह नहीं माने।