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Jalaun News: जिले में 213 बसें पंजीकृत, एक हफ्ते बाद भी सत्यापन अधूरा
Wed, 17 Jul 2024 01:11 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Wed, 17 Jul 2024 01:11 AM IST
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उरई। जिले में जरूरी कागजात बिना सड़कों पर फर्राटा भरने वाली बसों पर नकेल नहीं लग सकी है। उन्नाव हादसे के एक हफ्ते बाद भी जनपद में पंजीकृत बसों का सत्यापन नहीं हो सका है। जबकि अफसरों का दावा है कि बुधवार तक सभी बसों का सत्यापन कराकर रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी।
उन्नाव में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 10 जुलाई को दायीं ओर से ओवरटेक कर रही स्लीपर बस आगे जा रहे टैंकर में घुस गई थी। हादसे में 18 लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद जांच पड़ताल में पता चला था कि उक्त बस राजस्थान की ट्रेवल्स एजेंसी की थी। जांच पड़ताल में बस का पंजीकरण महोबा जिले के एक व्यक्ति के नाम पर मिला था। पड़ताल में यह बात भी पता चली थी कि उक्त व्यक्ति को पता ही नहीं था कि उक्त बस उसके नाम से चल रही है।
इस मामले के संज्ञान में आने के बाद शासन ने सभी जिलों को अपने जिले में पंजीकृत बसों का सत्यापन कराकर रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए थे। जिस पर एआरटीओ प्रवर्तन विनय कुमार पांडेय ने बताया कि जालौन जिले में 188 सिटिंग बसें, 25 स्लीपर बसें पंजीकृत हैं। सभी बसों का सत्यापन शुरू करा दिया गया है। बुधवार तक सभी बसों का सत्यापन कराकर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
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लोगों की मानें तो ट्रेवल्स एजेंसी से जुड़ीं लगभग एक दर्जन बसें झांसी-कानपुर हाईवे व बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से होकर गुजरती हैं। कई बार इनसे हादसे भी हो चुके हैं। जिम्मेदार अधिकारी हादसा होने के बाद कार्रवाई तो करते हैं, पर इनकी तह तक जाकर संबंधित पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। जिससे एजेंसियों से जुड़े लोगों के हौसले बुलंद रहते हैं।
बीच हाईवे पर भी बसें रोककर बैठाते हैं सवारियांं
उरई। झांसी कानपुर हाईवे से गुजरने वाली यह बसें जगह-जगह रोककर यात्रियों को बैठाती हैं। जिले में इनका खेल कालपी, जोल्हूपुर, कालपी बस स्टैंड, कोंच स्टैंड चौराहा सहित अन्य स्थानों से शुरू होता है। जगह-जगह इन लोगों ने विभिन्न काउंटर भी बना रखे हैं, इसके अलावा ऑनलाइन भी सीट बुकिंग की सुविधा देते हैं। सड़क के किनारे ही जगह-जगह सवारियां भी बैठी रहती है। इससे सड़क पर बसें खड़ी होने से भी हादसों की आशंका बनी रहती है। (संवाद)
यह हो चुके हादसे, फिर भी नहीं चेत रहे जिम्मेदार
केस 1- 10 मई को अहमदाबाद से कानपुर जा रही स्लीपर बस अनियंत्रित होकर झांसी-कानपुर हाईवे स्थित आटा थाना क्षेत्र के साईं मंदिर के पास पलट गई थी। इसमें एक की मौत हो गई थी और 35 लोग गंभीर रूप से घायल हो हुए थे।
केस 2- 7 मई को माधौगढ़ थाना क्षेत्र में बरात ले जा रही बस अज्ञात वाहन से टकराकर गड्ढे में गिर गई थी, जिससे पांच लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 15 लोग घायल हो गए थे। भीषण हादसा होने से हर तरफ कोहराम मचा था। इसके बाद भी बसों को लेकर सख्ती नहीं बरती गई।
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उन्नाव में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 10 जुलाई को दायीं ओर से ओवरटेक कर रही स्लीपर बस आगे जा रहे टैंकर में घुस गई थी। हादसे में 18 लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद जांच पड़ताल में पता चला था कि उक्त बस राजस्थान की ट्रेवल्स एजेंसी की थी। जांच पड़ताल में बस का पंजीकरण महोबा जिले के एक व्यक्ति के नाम पर मिला था। पड़ताल में यह बात भी पता चली थी कि उक्त व्यक्ति को पता ही नहीं था कि उक्त बस उसके नाम से चल रही है।
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इस मामले के संज्ञान में आने के बाद शासन ने सभी जिलों को अपने जिले में पंजीकृत बसों का सत्यापन कराकर रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए थे। जिस पर एआरटीओ प्रवर्तन विनय कुमार पांडेय ने बताया कि जालौन जिले में 188 सिटिंग बसें, 25 स्लीपर बसें पंजीकृत हैं। सभी बसों का सत्यापन शुरू करा दिया गया है। बुधवार तक सभी बसों का सत्यापन कराकर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
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लोगों की मानें तो ट्रेवल्स एजेंसी से जुड़ीं लगभग एक दर्जन बसें झांसी-कानपुर हाईवे व बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से होकर गुजरती हैं। कई बार इनसे हादसे भी हो चुके हैं। जिम्मेदार अधिकारी हादसा होने के बाद कार्रवाई तो करते हैं, पर इनकी तह तक जाकर संबंधित पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। जिससे एजेंसियों से जुड़े लोगों के हौसले बुलंद रहते हैं।
बीच हाईवे पर भी बसें रोककर बैठाते हैं सवारियांं
उरई। झांसी कानपुर हाईवे से गुजरने वाली यह बसें जगह-जगह रोककर यात्रियों को बैठाती हैं। जिले में इनका खेल कालपी, जोल्हूपुर, कालपी बस स्टैंड, कोंच स्टैंड चौराहा सहित अन्य स्थानों से शुरू होता है। जगह-जगह इन लोगों ने विभिन्न काउंटर भी बना रखे हैं, इसके अलावा ऑनलाइन भी सीट बुकिंग की सुविधा देते हैं। सड़क के किनारे ही जगह-जगह सवारियां भी बैठी रहती है। इससे सड़क पर बसें खड़ी होने से भी हादसों की आशंका बनी रहती है। (संवाद)
यह हो चुके हादसे, फिर भी नहीं चेत रहे जिम्मेदार
केस 1- 10 मई को अहमदाबाद से कानपुर जा रही स्लीपर बस अनियंत्रित होकर झांसी-कानपुर हाईवे स्थित आटा थाना क्षेत्र के साईं मंदिर के पास पलट गई थी। इसमें एक की मौत हो गई थी और 35 लोग गंभीर रूप से घायल हो हुए थे।
केस 2- 7 मई को माधौगढ़ थाना क्षेत्र में बरात ले जा रही बस अज्ञात वाहन से टकराकर गड्ढे में गिर गई थी, जिससे पांच लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 15 लोग घायल हो गए थे। भीषण हादसा होने से हर तरफ कोहराम मचा था। इसके बाद भी बसों को लेकर सख्ती नहीं बरती गई।