फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jalaun News ›   तालाबों में नहीं है पानी, प्यासे भटक रहे मवेशी

तालाबों में नहीं है पानी, प्यासे भटक रहे मवेशी

Sat, 08 Jun 2019 12:04 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 08 Jun 2019 12:04 AM IST
विज्ञापन
तालाबों में नहीं है पानी, प्यासे भटक रहे मवेशी
उरई। प्रचंड गर्मी में जहां खराब हैंडपंप लोगों को पेयजल के लिए भटका रहे हैं वहीं सूखे पड़े तालाब और पोखर मवेशियों की परेशानी का कारण बने हैं। किसी तालाब में महीनों से पानी नहीं भरा गया है तो कोई भीषण गर्मी में सूखा पड़ा है। किसान और पशुपालक परेशान है कि खुद के पीने के पानी का इंतजाम करें कि मवेशियों को देखें। कभी घरों के बाहर मवेशियों के लिए बनाई की पानी की हौद अब सूखी पड़ी है। गांव गलियों से पानी नहीं मिलता तो मवेशी तालाब की ओर जाते हैं लेकिन वहां भी पानी न देख उन्हें लौटना पड़ता है। नहर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश तालाबों में पानी है, कुछ जगहों पर पर थोड़ी कमियां हैं, उन्हें भी ग्राम प्रधानों से बात कर जल्द दूर किया जाएगा।
विज्ञापन


तीन तालाब और तीनों ही पानी से खाली
कदौरा। क्षेत्र के परोसा गांव के तीन तालाब और तीनों ही सूखे पड़े हैं। तालाबों में झाड़ झंखाड़ उग आई है लेकिन पानी है कि तालाब तक पहुंचने का नाम ही नहीं ले रहा है। उधर, करीब डेढ़ वर्ष से मटरा गांव का एकमात्र तालाब खुदाई न होने के कारण सूखा पड़ा है। गांव के पालतू और अन्ना मवेशी प्यास से इधर उधर भटक रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है मवेशियों को पानी पर्याप्त मात्रा में न मिलने से उनके दूध में भी कमी आ रही है। प्रशासन है कि तालाब की खुदाई से ही हाथ खींचे हुए है। गांव के प्रदीप कुमार ने बताया कि उन्होंने मामले की शिकायत जिलाधिकारी से भी की थी पर कोई सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीण जल्द ही तालाब खुदाई को लेकर अधिकारियों के घेराव का मन बना रहे हैं। वहीं इस बारे में खंड विकास अधिकारी अतिरंजन सिंह का कहना है कि मामला उनकी जानकारी में नहीं है, फिर भी वे जांच कराकर उचित कार्रवाई कराएंगे।
विज्ञापन


पंद्रह दिन ही चलीं नहरें, सूखे पड़े तालाब
सरावन। लगातार प्रचंड हो रही गर्मी से पशु-पक्षी बेहाल है। तालाब, पोखर और नाले सभी सूख गए हैं। जिस कारण मवेशी प्यास से भटक रहे हैं। प्रशासन ने भी इन तालाबों में पानी भरवाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। सीजन की शुरूआत में 15 दिन तक नहरें चली लेकिन तालाब नाले सूखे पड़े हैं। सरावन सहित आसपास के गांवों चाकी, इकहरा, बदनपुरा, गोहनी, अमखेड़ा, राजपुरा, कंचन पुर, पडकुला, सहाव, नबीपुर, मड़ोरी सहित आसपास के दर्जन भर गांवों के तालाब सूखे पड़े हैं। ग्रामीण जयराम, करन सिंह, शिव सिंह, माताप्रसाद, सतीश कुमार, दशरथ लल्लू आदि का कहना है गांवों में तालाबों की कोई कमी नहीं है, सिर्फ पानी न होने से ही सूखे पड़े हैं। प्रशासन को कम से कम इन सूखे पड़े तालाबों की सुध लेते हुए इन्हें पानी से भरवाना चाहिए। ताकि मवेशियों को प्यास बुझाने के लिए दर-दर भटकना न पड़े।
विज्ञापन
विज्ञापन


कहीं अतिक्रमण तो कहीं झाड़ झंखाड़
ऊमरी। यूं तो ऊमरी में तालाबों की भरमार है पर अतिक्रमण भी है। कुछ तालाब गंदगी से भी पटे हैं। क्षेत्र का मदनताल जहां का पानी कभी ठंडा रहता था, आज वह घास का मैदान नजर आता है। सालों से पानी नहीं भरा गया है। इसी तरह धोबी तालाब, जहां कभी मवेशी पानी पीते थे और गांव वाले नहाने और कपड़े धोने के इस्तेमाल में भी लाते थे, वो तालाब अब गंदगी से पटा है। पूरे तालाब में काई जमी है। जिस कारण मवेशी भी उधर नहीं जाते हैं। इसी तरह क्षेत्र के भुजरिया तालाब पर कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर शौचालय बना रखे हैं। जिससे भी तालाब का अस्तित्व खत्म हो रहा है। कुल मिलाकर मवेशियों के लिए अब यह तालाब न के बराबर ही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार नगर पंचायत से तालाबों की दशा सुधारने के लिए कहा गया, थोड़ा काम हुआ फिर रुक गया। जिससे तालाब दोबारा अपने स्वरूप में नहीं लौट पा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed