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कभी बेचे थे सिम, विदेशों में अब बेचते साफ्टवेयर
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उरई। स्कूल की फीस जमा करने के लिए कभी उरई की सड़कों पर ब्रेड तो कभी सिम बेचने वाला युवक आज विदेशी कंपनियों को साफ्टवेयर बेच रहा है। अभाव व संघर्षों में पले बढ़े विकास ने अपने जीवन में जो मुकाम हासिल किया है, वह युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। विकास की आज नोएडा में ड्रीम स्टेप्स टेक्नोलॉजी साफ्टवेयर कंपनी है।
बीहड़ व पिछड़ा क्षेत्र रामपुरा के निवासी विकास की प्राइमरी से लेकर हाईस्कूल तक की शिक्षा रामपुरा में ही हुई। बेटे की लगन देखकर पिता श्याम बिहारी उपाध्याय ने आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के बावजूद उरई के एसआर इंटर कालेज में उसका दाखिला कराया। इसी बीच मां प्रकाशवती की बीमारी ने घर की आर्थिक स्थिति और खराब कर दी। इंटर की कक्षा में फीस जमा न होने पर स्कूल से नाम कटने का अल्टीमेटम मिल गया।
परेशान विकास स्कूल की फीस कैसे जमा हो, इसके उपाय खोजने लगा। फिर उसने ब्रेड बेचने व सिम बेचने का धंधा उरई की सड़कों पर शुरू कर दिया और किसी तरह स्कूल की पढ़ाई जारी रखी। वर्ष 2008 में इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने दयानंद दीनानाथ इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी से बीटेक की पढ़ाई की। आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते यहां भी उसने रात में गार्ड की नौकरी की और दिन में पढ़ाई कर बीटेक किया।
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बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद भी उसकी परेशानियां कम नहीं हुईं। उसने दिल्ली जाकर नौैकरी करने की सोची ताकि मां बाप व छोटा भाई आकाश, बहनें वंशिका व दीपशिखा को आर्थिक विपन्नता से छुटकारा दिला सके। दिल्ली में दो साल के संघर्ष के बाद करीब साढ़े तीन साल पहले अपनी ड्रीम स्टेप्स नाम की कंपनी खोली।
आज वह विदेशी कंपनियों हुंडई(कनाडा), यूके की बुलसाइ, एसकेबाल के लिए फूड डिलेवरी एप, अल्ट्रा एलटीडी लिमिटेड जैसी मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए एप, साफ्टवेयर आदि बनाने काम कर रहा है। विकास ने बताया कि इस साल के अंत तक दुबई में आफिस खोलने की तैयारी है।
विकास ने बताया कि उसकी कंपनी ने पिछले साल पौने दो करोड़ का आईटीआर भरा है। इस समय कंपनी में 45 से 50 लोग काम कर रहे हैं। इसमें अधिकांश बुंदेलखंड के हैं। कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर की तनख्वाह 77 हजार है। जबकि अन्य स्टाफ को भी 40 से 70 हजार के बीच तनख्वाह मिल रही है।
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बीहड़ व पिछड़ा क्षेत्र रामपुरा के निवासी विकास की प्राइमरी से लेकर हाईस्कूल तक की शिक्षा रामपुरा में ही हुई। बेटे की लगन देखकर पिता श्याम बिहारी उपाध्याय ने आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के बावजूद उरई के एसआर इंटर कालेज में उसका दाखिला कराया। इसी बीच मां प्रकाशवती की बीमारी ने घर की आर्थिक स्थिति और खराब कर दी। इंटर की कक्षा में फीस जमा न होने पर स्कूल से नाम कटने का अल्टीमेटम मिल गया।
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परेशान विकास स्कूल की फीस कैसे जमा हो, इसके उपाय खोजने लगा। फिर उसने ब्रेड बेचने व सिम बेचने का धंधा उरई की सड़कों पर शुरू कर दिया और किसी तरह स्कूल की पढ़ाई जारी रखी। वर्ष 2008 में इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने दयानंद दीनानाथ इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी से बीटेक की पढ़ाई की। आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते यहां भी उसने रात में गार्ड की नौकरी की और दिन में पढ़ाई कर बीटेक किया।
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बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद भी उसकी परेशानियां कम नहीं हुईं। उसने दिल्ली जाकर नौैकरी करने की सोची ताकि मां बाप व छोटा भाई आकाश, बहनें वंशिका व दीपशिखा को आर्थिक विपन्नता से छुटकारा दिला सके। दिल्ली में दो साल के संघर्ष के बाद करीब साढ़े तीन साल पहले अपनी ड्रीम स्टेप्स नाम की कंपनी खोली।
आज वह विदेशी कंपनियों हुंडई(कनाडा), यूके की बुलसाइ, एसकेबाल के लिए फूड डिलेवरी एप, अल्ट्रा एलटीडी लिमिटेड जैसी मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए एप, साफ्टवेयर आदि बनाने काम कर रहा है। विकास ने बताया कि इस साल के अंत तक दुबई में आफिस खोलने की तैयारी है।
विकास ने बताया कि उसकी कंपनी ने पिछले साल पौने दो करोड़ का आईटीआर भरा है। इस समय कंपनी में 45 से 50 लोग काम कर रहे हैं। इसमें अधिकांश बुंदेलखंड के हैं। कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर की तनख्वाह 77 हजार है। जबकि अन्य स्टाफ को भी 40 से 70 हजार के बीच तनख्वाह मिल रही है।