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Hathras News: क्रिकेट, भाला फेंक व तीरंदाजी में युवाओं ने फहराया परचम

Fri, 29 Aug 2025 02:15 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 29 Aug 2025 02:15 AM IST
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Youths hoisted the flag in cricket, javelin throw and archery
हाथरस तीरंदाजी संघ में तीरंदाजी करते युवक। संवाद - फोटो : samvad
प्रतिभा किसी साधन या संसाधन की मोहताज नहीं होती है। हाथरस के युवाओं ने क्रिकेट से लेकर एथलेटिक्टस, तीरंदाजी और भाला फेंक में देश में ही नहीं विदेशों में भी अपना परचम फहराया है। खिलाड़ियों की सफलता का यह सिलसिला लगातार बढ़ रहा है, जबकि खेल सुविधाओं के नाम पर शहर या जिले में कोई बड़ा संसाधन नहीं है।
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सात किमी दूर स्टेडियम में सिर्फ तीन कोच

जिले में खेल सुविधाओं की बात करें तो स्टेडियम के नाम पर महज एक मैदान हैं। न कोच और न ही संसाधन हैं। इसके बावजूद विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं ने अपने दम पर बेहतर प्रदर्शन कर हाथरस का नाम रोशन किया है। खेल स्टेडियम में फुटबॉल, एथलेटिक्स, जूडो और वेट लिफ्टिंग के कोच हैं, लेकिन शहर से करीब सात किलोमीटर दूर होने के कारण युवा व बच्चे यहां पहुंच नहीं पाते हैं। जिससे उन्हें बेहतर अभ्यास करने का मौका बहुत कम मिल पाता है।
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भारतीय टीम में नाम रोशन करना चाहते हैं तीरथ चौधरी

क्रिकेट खिलाड़ी तीरथ चौधरी यूपी-टी-20 लीग में गोरखपुर लायंस की तरफ से अपनी गेंदबाजी से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे पहले उनका सेलेक्शन राजस्थान रॉयल्स में बतौर नेट बॉलर के रूप में हुआ था। तीरथ चौधरी हाथरस के गांव नगला चोखा के निवासी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण उन्होंने इंटरमीडिएट करने के बाद अपना जीवन क्रिकेट के लिए समर्पित कर दिया। 2017 से क्रिकेट शुरुआत हाथरस क्रिकेट अकादमी से की। इसके बाद नोएडा में प्रैक्टिस करने लगे। जहां उनकी मुलाकात रणजी खिलाड़ी अनुरीत सिंह से हुई। उनके रोल मॉडल जसप्रीत बुमराह है।
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मोहन के कदमों का नहीं थाम सकी बढ़ती उम्र
65 वर्षीय मोहन सिंह सादाबाद के गांव मंस्या निवासी हैं। बीएसएनएल से सेवानिवृत्त हैं। वह अपने विभाग में 1500 मीटर से लेकर दस हजार मीटर तक की दौड़ के चैंपियन रहे। उन्होंने कहीं भी प्रशिक्षण नहीं लिया। मोहन ने बताया कि सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने दौड़ना जारी रखा। बीते दो माह में उन्होंने दो अंतरराष्ट्रीय मास्टर प्रतियोगिताओं में एक स्वर्ण, एक रजत तथा एक कांस्य पदक जीता है। इससे पहले नेपाल के पोखरा में तीन स्वर्ण पदक, श्रीलंका के दोगमा में रजत एवं कांस्य पदक, थाईलैंड में रजत पदक जीता है। राजस्थान एवं अन्य प्रदेशों हुए राष्ट्रीय खेलों में कई स्वर्ण पदक जीत चुके हैं।
दीपेश के भाले ने कई स्वर्ण पदक दिलाए
नगला विशी मढ़ाका निवासी दीपेश कुमार ने 2025 में दिल्ली वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्राउंड चैंपियनशिप में भाला फेंक कर तीसरा स्थान प्राप्त किया है। जुलाई में बेंगलूरू में इंडिया ओपन पैरा एथलेटिक्स में प्रथम स्थान, 2024 में पेरिस फ्रांस समर ओलंपिक भी खेले। थाईलैंड में जूनियर पैरा खेलों में भाला फेंक पर प्रथम स्थान लेकर विश्व रिकार्ड बनाया। दीपेश ने बताया कि तीन बार नेशनल खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। शुरूआत घर से की और अब सांई स्पोर्ट्स अथाॅरिटी ऑफ इंडिया गांधी नगर में प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांग होने के बाद भी उन्होंने इसको अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
परचम फहराने को तैयार यशु चौधरी
गांव नगला धन सिंह निवासी यशु चौधरी 400 मीटर दौड़ में हिस्सा लेते हैं। 39वें नेशनल जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पांचवां स्थान, 35वीं नॉर्थ जोन जूनियर एथलेटिक चैंपियनशिप में पहला स्थान, 58वें स्टेट जूनियर एथलेटिक चैंपियनशिप में तीसरा स्थान, 19वीं नेशलन इंटर जिला एथलेटिक मीट में उन्होंने चौथा स्थान प्राप्त किया है। यशु चौधरी ने बताया कि अभी भी वह नेशनल खेलने के लिए तैयारी कर रहे हैं।

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युवा तीरंदाज तैयार कर रहे हैं वेद कुमार
ग्राम नगला शेखा निवासी आचार्य वेद कुमार अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज एवं लक्ष्मण अवार्डी हैं। वर्तमान में संयुक्त सचिव उत्तर प्रदेश तीरंदाजी संघ तथा अध्यक्ष हाथरस तीरंदाजी संघ के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि 2004 में एथेंस ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर चुके हैं और एशियाई पदक विजेता भी हैं। राष्ट्रीय स्तर पर 27 पदक और 2 राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किए। उनके पास तीरंदाजी प्रशिक्षण का 15 वर्षों का अनुभव है। भारतीय तीरंदाजी टीम के प्रशिक्षक भी रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय कोचिंग सेमिनार एवं राष्ट्रीय न्यायाधीश के रूप में भी मान्यता प्राप्त हैं। उनके शिष्यों ने राष्ट्रीय स्तर पर 27 और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 17 पदक अर्जित किए हैं। भारत सरकार द्वारा वर्ष 1999 में विशेष पुरस्कार तथा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2003 में लक्ष्मण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पूर्व सहायक कमांडेंट (आईटीबीपी) रहे आचार्य वेद कुमार आज युवाओं को तीरंदाजी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहे हैं।
डॉ. विकास गौतम कोच से बने शिक्षक
डॉ. विकास गौतम तीरंदाजी संघ हाथरस सचिव हैं। राष्ट्रीय स्तर के तीरंदाज हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया। इस उपलब्धि पर वर्ष 2011 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सम्मानित किया गया। वर्तमान में वे राजकीय इंटर कॉलेज, आगरा में अध्यापक हैं और शिक्षा व खेल दोनों क्षेत्रों में सक्रिय योगदान दे रहे हैं।

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सटीक निशाना लगाते हैं वंश कुमार
पिपरामई निवासी वंश कुमार ने तीरंदाजी में सीबीएसई नॉर्थ जोन-1 चैंपियनशिप में तृतीय स्थान प्राप्त कर राष्ट्रीय स्तर पर क्वालिफाई किया। उन्होंने बताया कि सीबीएसई राष्ट्रीय चैंपियनशिप (अंडर-13 वर्ग) में चतुर्थ स्थान, 11वीं राज्य स्तरीय चैंपियनशिप में छठा स्थान, अखिल भारतीय राज्य स्तरीय चैंपियनशिप में तृतीय स्थान तथा उत्तर प्रदेश राज्य चैंपियनशिप में चतुर्थ स्थान प्राप्त किया। बुलंदशहर जिला चैंपियनशिप (अंडर-13 वर्ग) में प्रथम स्थान के साथ उन्होंने विभिन्न जिला एवं राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भी पदक हासिल किए हैं।
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