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Hathras News: टीबी मुक्त अभियान में लेंगे आयुष चिकित्सकों की मदद
Tue, 05 May 2026 02:15 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Tue, 05 May 2026 02:15 AM IST
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जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग अब आयुष चिकित्सकों की मदद लेगा। सोमवार को सीएमओ डाॅ. राजीव रॉय व क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अधिकारी की मौजूदगी में जिले के सभी आयुष चिकित्सकों की संवेदीकरण बैठक हुई। इस पहल का उद्देश्य जिले की 25 आयुष डिस्पेंसरियों के माध्यम से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में टीबी मरीजों की पहचान और उनकी निगरानी को तेज करना है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डाॅ. प्रवीन कुमार भारती ने आयुष चिकित्सकों को टीबी के लक्षणों और आधुनिक उपचार पद्धति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 24 मार्च से संचालित 100 दिवसीय विशेष अभियान की सफलता आयुष चिकित्सकों के सहयोग पर टिकी है। सभी आयुष चिकित्सकों को फैल्कन ट्यूब और एनेक्जर-15ए वितरित किए गए हैं, ताकि वे अपने पास आने वाले संभावित मरीजों के बलगम के नमूने ले सकें और उन्हें जांच के लिए संदर्भित कर सकें।
अभियान को केवल इलाज तक सीमित न रखकर पोषण से भी जोड़ा गया है। आयुष चिकित्सकों को निक्षय मित्र के रूप में पंजीकृत किया गया। डाॅ. भारती ने अपील की कि चिकित्सक स्वयं या क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्तियों के माध्यम से टीबी मरीजों को हर माह पौष्टिक आहार किट उपलब्ध कराएं। न्यूट्रीशियन सपोर्ट मिलने से मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और वे जल्द स्वस्थ हो सकेंगे।
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निगरानी के लिए डिस्पेंसरी स्टाफ सक्रिय
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी अलीगढ़ मंडल डाॅ. नरेंद्र सिंह की उपस्थिति में तय हुआ कि जिले की सभी 25 आयुष डिस्पेंसरियों का स्टाफ सक्रिय रूप से स्क्रीनिंग कार्य में जुटेगा। आयुष विधा के साथ-साथ ये चिकित्सक एलोपैथिक उपचार ले रहे टीबी मरीजों की काउंसिलिंग और दवा के नियमित सेवन की निगरानी भी करेंगे।
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जिला क्षय रोग अधिकारी डाॅ. प्रवीन कुमार भारती ने आयुष चिकित्सकों को टीबी के लक्षणों और आधुनिक उपचार पद्धति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 24 मार्च से संचालित 100 दिवसीय विशेष अभियान की सफलता आयुष चिकित्सकों के सहयोग पर टिकी है। सभी आयुष चिकित्सकों को फैल्कन ट्यूब और एनेक्जर-15ए वितरित किए गए हैं, ताकि वे अपने पास आने वाले संभावित मरीजों के बलगम के नमूने ले सकें और उन्हें जांच के लिए संदर्भित कर सकें।
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अभियान को केवल इलाज तक सीमित न रखकर पोषण से भी जोड़ा गया है। आयुष चिकित्सकों को निक्षय मित्र के रूप में पंजीकृत किया गया। डाॅ. भारती ने अपील की कि चिकित्सक स्वयं या क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्तियों के माध्यम से टीबी मरीजों को हर माह पौष्टिक आहार किट उपलब्ध कराएं। न्यूट्रीशियन सपोर्ट मिलने से मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और वे जल्द स्वस्थ हो सकेंगे।
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निगरानी के लिए डिस्पेंसरी स्टाफ सक्रिय
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी अलीगढ़ मंडल डाॅ. नरेंद्र सिंह की उपस्थिति में तय हुआ कि जिले की सभी 25 आयुष डिस्पेंसरियों का स्टाफ सक्रिय रूप से स्क्रीनिंग कार्य में जुटेगा। आयुष विधा के साथ-साथ ये चिकित्सक एलोपैथिक उपचार ले रहे टीबी मरीजों की काउंसिलिंग और दवा के नियमित सेवन की निगरानी भी करेंगे।