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Hathras News: दिन देखकर जाते हैं अस्पताल, फार्मासिस्ट के भरोसे 18 गांव

Sat, 11 Apr 2026 02:13 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 11 Apr 2026 02:13 AM IST
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Villagers Visit Hospital Based on the Day; 18 Villages Rely on a Pharmacist
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टिकारी में मरीजों को देखते परामर्श देते फार्मासिस्ट। संवाद - फोटो : Samvad
सरकारी दावों से इतर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बेहाल है। सासनी ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टिकारी का हाल भी कुछ ऐसा ही है। यहां डॉक्टर से परामर्श लेने के लिए भी दिन देखना पड़ता है, क्योंकि सप्ताह में केवल तीन दिन ही यहां चिकित्सक आते हैं।
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यहां पर तैनात डॉक्टर की तैनाती सोमवार, मंगलवार और बुधवार को सासनी में रहती है, इसके बाद बृहस्पतिवार, शुक्रवार और शनिवार को वह टिकारी में रहते हैं। इसलिए तीन दिनों तक 18 गांवों की करीब 15 हजार की आबादी एक फार्मासिस्ट के भरोसे रहती है। फार्मासिस्ट भी बुधवार से शनिवार तक ही अस्पताल में मिलते हैं।
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दोपहर 12 बजे : चिकित्सक नहीं, फार्मासिस्ट मिले
जब संवाद न्यूज एजेंसी की टीम दोपहर 12 बजे टिकारी पीएचसी पहुंची तो ओपीडी में चिकित्सक की कुर्सी पर फार्मासिस्ट शिवकुमार मरीजों का परीक्षण कर रहे थे। उस समय तक करीब 30 मरीज देखे जा चुके थे। टीम के सामने ही दो मरीजों को एंटी रेबीज इंजेक्शन भी फार्मासिस्ट ने ही लगाया।
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रोस्टर के खेल में उलझ जाते हैं मरीज

डॉ. अनंत कुमार इस केंद्र के प्रभारी हैं, उनके जिम्मे ही यह अस्पताल है। पीएचसी पर जानकारी मिली कि सोमवार से बुधवार तक उनकी ड्यूटी सासनी सीएचसी पर रहती है। वहां मौजूद मरीजों ने बताया कि उन्हें तो अन्य दिनों में भी चिकित्सक नहीं मिलते।








18 गांव 15 हजार की आबादी

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टिकारी से आसपास के लगभग 18 गांव जुड़े हैं, जिनमें लगभग 15 हजार की आबादी है। पीएचसी की बात करें तो यहां चिकित्सक के अलावा फार्मासिस्ट, एक वार्ड बॉय व एक सफाई कर्मचारी तैनात है। फार्मासिस्ट की सोमवार को सासनी में इमरजेंसी ड्यूटी रहती है। इस कारण वे मंगलवार को अवकाश पर रहते हैं। बुधवार से शनिवार तक वे अस्पताल में रहते हैं।






गर्भवती महिलाएं और बच्चे परेशान
इस केंद्र पर सबसे गंभीर समस्या एएनएम की तैनाती न होना है। अस्पताल में वार्ड बॉय और सफाई कर्मचारी तो हैं, लेकिन महिला स्वास्थ्यकर्मी न होने से गर्भवती महिलाओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। प्रसव या अन्य जांच के लिए महिलाओं को सासनी, हाथरस जंक्शन या जिला महिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है। आपात स्थिति में यहां से हाथरस जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।










स्वास्थ्य केंद्र पर अक्सर चिकित्सक नहीं मिलते, फार्मासिस्ट ही दवा देते हैं। स्टॉफ की कमी से मरीजों को काफी समस्या होती है। कुत्ते द्वारा काटे जाने के कारण मैं एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगवाने आया हूं।

राममोहन, नगला काशी








स्टॉफ नर्स या एएनएम के न होने से आसपास के गांव की महिलाओं को समस्या होती है। गर्भवती महिलाओं को सासनी या हाथरस जंक्शन जाना पड़ता है। यहीं सुविधा हो तो लोगों को दूर नहीं जाना पड़ेगा। दोपहर बाद यहां स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिलतीं।


अनुष्का, गांव टिकारी











ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर किया जा रहा है। सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सक के बैठने के निर्देश हैं। यदि कहीं समस्या आ रही है तो रोस्टर के जरिये उसे दूर कराया जाएगा।



डाॅ. राजीव रॉय, सीएमओ हाथरस।
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