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Hathras News: अपहरण व हत्या में महिला सहित दो को आजीवन कारावास
Thu, 11 Jun 2026 02:24 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Thu, 11 Jun 2026 02:24 AM IST
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
शहर के 10 साल पुराने चर्चित रोकेंद्र हत्याकांड में एडीजे कोर्ट प्रथम संगीता शर्मा ने गांजा तस्कर रिंकू की पत्नी सहित दो को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। शक के चलते युवक की हत्या कर दी गई थी और एक स्कूल परिसर में शव जलाकर राख गंदे नाले में बहा दी गई थी। कोतवाली हाथरस गेट पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। मुख्य आरोपी रिंकू गुप्ता की मौत हो चुकी है।
गांव लहरा का रहने वाला रोकेंद्र बागला कॉलेज मार्ग निवासी रिंकू गुप्ता उर्फ रमन कुमार के यहां गाड़ी चलाता था। रोकेंद्र के पिता चंद्रपाल ने 13 जनवरी को अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि रिंकू, उसकी पत्नी कुसुम गुप्ता व साथी सुनील कुमार ने फोन कर रोकेंद्र को बुलाया था। इसके बाद उसका अपहरण कर लिया।
पुलिस ने रोकेंद्र की तलाश की। छानबीन में सामने आया कि रुपये के विवाद में रिंकू ने अपने साथियों के साथ मिलकर रोकेंद्र की 13 जनवरी की रात को ही हत्या कर दी थी और शव जला दिया था। राख जलेसर रोड स्थित गंदे नाले में डाल दी गई थी। उसे अपनी पत्नी के चरित्र पर भी शक था।
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पुलिस ने रिंकू व कुसुम गुप्ता निवासी अक्रूर इंटर कॉलेज के पास, सुनील कुमार, मुकेश उर्फ खन्ना व रूपचंद्र निवासी जिंद की मढ़ैया नगला चौबे के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। जमानत के बाहर आने कुछ दिनों बाद ही रिंकू गुप्ता की मौत हो गई थी। इधर, मुकदमा ट्रायल पर एडीजे कोर्ट प्रथम में पहुंचा।
कोर्ट ने सबूत व गवाहों के आधार पर रिंकू की पत्नी कुसुम गुप्ता व उसके साथी सुनील को हत्या का दोषी ठहराया। कोर्ट ने कुसुम व सुनील को हत्या में आजीवन कारावास व 20-20 हजार रुपये अर्थदंड, अपहरण में पांच-पांच वर्ष सश्रम कारावास व 10-10 हजार रुपये जुर्माना, साक्ष्य मिटाने पर दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास और पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। साक्ष्य के अभाव में मुकेश व रूपचंद्र को दोषमुक्त किया गया है।
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गांव लहरा का रहने वाला रोकेंद्र बागला कॉलेज मार्ग निवासी रिंकू गुप्ता उर्फ रमन कुमार के यहां गाड़ी चलाता था। रोकेंद्र के पिता चंद्रपाल ने 13 जनवरी को अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि रिंकू, उसकी पत्नी कुसुम गुप्ता व साथी सुनील कुमार ने फोन कर रोकेंद्र को बुलाया था। इसके बाद उसका अपहरण कर लिया।
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पुलिस ने रोकेंद्र की तलाश की। छानबीन में सामने आया कि रुपये के विवाद में रिंकू ने अपने साथियों के साथ मिलकर रोकेंद्र की 13 जनवरी की रात को ही हत्या कर दी थी और शव जला दिया था। राख जलेसर रोड स्थित गंदे नाले में डाल दी गई थी। उसे अपनी पत्नी के चरित्र पर भी शक था।
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पुलिस ने रिंकू व कुसुम गुप्ता निवासी अक्रूर इंटर कॉलेज के पास, सुनील कुमार, मुकेश उर्फ खन्ना व रूपचंद्र निवासी जिंद की मढ़ैया नगला चौबे के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। जमानत के बाहर आने कुछ दिनों बाद ही रिंकू गुप्ता की मौत हो गई थी। इधर, मुकदमा ट्रायल पर एडीजे कोर्ट प्रथम में पहुंचा।
कोर्ट ने सबूत व गवाहों के आधार पर रिंकू की पत्नी कुसुम गुप्ता व उसके साथी सुनील को हत्या का दोषी ठहराया। कोर्ट ने कुसुम व सुनील को हत्या में आजीवन कारावास व 20-20 हजार रुपये अर्थदंड, अपहरण में पांच-पांच वर्ष सश्रम कारावास व 10-10 हजार रुपये जुर्माना, साक्ष्य मिटाने पर दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास और पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। साक्ष्य के अभाव में मुकेश व रूपचंद्र को दोषमुक्त किया गया है।