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आज दिन व रात का समय रहेगा बराबर
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस।
Updated Thu, 21 Sep 2017 11:27 PM IST
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आज शुक्रवार को दिन व रात का मान बराबर रहेगा। 22 सितंबर यानि आज के बाद दिन छोटे और रात बड़ा होने की शुरूआत होगी। श्री कात्र्तवीर्य नक्षत्र ज्योतिष संस्थान के संस्थापक आचार्य विनोद शास्त्री ने कहा कि 22 सितंबर को दिनमान व रात्रिमान बराबर हो जाएगा।
प्रात: सूर्योदय 6 बजकर 30 मिनट पर होगा तो सूर्यास्त का समय भी सायंकाल 6 बजकर 30 मिनट होगा। यानि दिन व रात 12-12 घंटे के होंगे। ऐसी प्रक्रिया पूर्ण होने पर सूर्य दक्षिण गोले हो जाता है अर्थात पृथ्वी अपने परिक्रमा मार्ग पर सूर्य से पूर्ण दक्षिण होती है और यही से शब्द ऋतु आरंभ होती है। पृथ्वी का उत्तरी धु्रव 23अंश 26 कला उत्तर की ओर झुका हुआ है और उसी झुकी अवस्था में ही पृथ्वी सूर्य का चक्कर 365.25 दिन में लगाती है, लेकिन अपने केंद्र बिंदु पर 23 घंटे 56 मिनट में पूरा एक चक्कर लगाती है। यानि प्रत्येक दिन चार दिन कम 24 घंटे में अपनी धुरी पर पूरा एक चक्कर पूरा करती है।
वह भी अपने उत्तरी धु्रव की बिना दिशा बदले। इसी परिक्रमण के कारण ही पृथ्वी पर दिन, रात व ऋतुओं का परिवर्तन होता है। पृथ्वी से धु्रव तारे का आकर्षण समाप्त हो जाए तो पृथ्वी पर ऋतु परिवर्तन होना रुक जाएगा। 22 सितंबर से दिनमान कम होता जाएगा और रात्रिमान बढ़ता जाएगा। ऐसी प्रक्रिया 22 दिसंबर तक चलेगी उस समय रात सर्वाधिक बड़ी होगी और दिन सर्वाधिक छोटा। वहीं 22 दिसंबर 14 जनवरी तक सम रते हुए 14 जनवरी से दिनमान में वृद्धि होती जाएगी व रात्रिमान मेें हृास होता रहेगा जोकि 23 मार्च को पुन: दिन रात बराबर हो जाएंगे तथा पृथ्वी अपने परिक्रमा को पूरा करते हुए 23 जून को दिन बड़ा और रात सर्वाधिक छोटी होती है।
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प्रात: सूर्योदय 6 बजकर 30 मिनट पर होगा तो सूर्यास्त का समय भी सायंकाल 6 बजकर 30 मिनट होगा। यानि दिन व रात 12-12 घंटे के होंगे। ऐसी प्रक्रिया पूर्ण होने पर सूर्य दक्षिण गोले हो जाता है अर्थात पृथ्वी अपने परिक्रमा मार्ग पर सूर्य से पूर्ण दक्षिण होती है और यही से शब्द ऋतु आरंभ होती है। पृथ्वी का उत्तरी धु्रव 23अंश 26 कला उत्तर की ओर झुका हुआ है और उसी झुकी अवस्था में ही पृथ्वी सूर्य का चक्कर 365.25 दिन में लगाती है, लेकिन अपने केंद्र बिंदु पर 23 घंटे 56 मिनट में पूरा एक चक्कर लगाती है। यानि प्रत्येक दिन चार दिन कम 24 घंटे में अपनी धुरी पर पूरा एक चक्कर पूरा करती है।
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वह भी अपने उत्तरी धु्रव की बिना दिशा बदले। इसी परिक्रमण के कारण ही पृथ्वी पर दिन, रात व ऋतुओं का परिवर्तन होता है। पृथ्वी से धु्रव तारे का आकर्षण समाप्त हो जाए तो पृथ्वी पर ऋतु परिवर्तन होना रुक जाएगा। 22 सितंबर से दिनमान कम होता जाएगा और रात्रिमान बढ़ता जाएगा। ऐसी प्रक्रिया 22 दिसंबर तक चलेगी उस समय रात सर्वाधिक बड़ी होगी और दिन सर्वाधिक छोटा। वहीं 22 दिसंबर 14 जनवरी तक सम रते हुए 14 जनवरी से दिनमान में वृद्धि होती जाएगी व रात्रिमान मेें हृास होता रहेगा जोकि 23 मार्च को पुन: दिन रात बराबर हो जाएंगे तथा पृथ्वी अपने परिक्रमा को पूरा करते हुए 23 जून को दिन बड़ा और रात सर्वाधिक छोटी होती है।
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