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थरौरा की आधी आबादी में नहीं है बिजली
अमर उजाला, हाथ्ारस
Updated Thu, 25 Aug 2016 12:16 AM IST
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electric poll
- फोटो : amar ujala
सहपऊ का गांव थरौरा भी जुगाड़ की बिजली पर निर्भर है। राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में विद्युतीकरण की मंजूरी पिछले साल ही मिल गई थी। पोल लगाने और नई लाइन खींचने का ठेका भी उठाया, लेकिन कुछ गलियों में ही लाइन खींचकर काम अधूरा छोड़ दिया है।
सन 1962 में जिन खंभों पर तार खिंचे थे, वह भी विभाग ने उतरवा लिए। खंभे उसी तरह खड़े हैं। थरौरा की आधे से अधिक आबादी बिजली को तरस रही है।
बुजुर्गों के अनुासर गांव का विद्युतीकरण सन 1962 में हो गया था। जनसंख्या परिवार एवं घरों की संख्या बढ़ती गई। नए मोहल्ले बन गए, लेकिन इन मोहल्लों-गलियों में बिजली की लाइन नहीं पहुंची। गांव में पहले 300 कनेक्शन मंजूर हुए थे।
उपभोक्ताओं के यहां मीटर भी लग गए। उनमें 210 घर तक ही तार खिंचे। हालांकि बगैर केबिल खिंचे ही बिल उपभोक्ताओं तक पहुंचने लगे हैं। खास बात यह कि सपा सरकार की महत्वाकांक्षी जनेश्वर मिश्र विकास योजना में गांव चयनित है।
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सन 1962 में जिन खंभों पर तार खिंचे थे, वह भी विभाग ने उतरवा लिए। खंभे उसी तरह खड़े हैं। थरौरा की आधे से अधिक आबादी बिजली को तरस रही है।
बुजुर्गों के अनुासर गांव का विद्युतीकरण सन 1962 में हो गया था। जनसंख्या परिवार एवं घरों की संख्या बढ़ती गई। नए मोहल्ले बन गए, लेकिन इन मोहल्लों-गलियों में बिजली की लाइन नहीं पहुंची। गांव में पहले 300 कनेक्शन मंजूर हुए थे।
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उपभोक्ताओं के यहां मीटर भी लग गए। उनमें 210 घर तक ही तार खिंचे। हालांकि बगैर केबिल खिंचे ही बिल उपभोक्ताओं तक पहुंचने लगे हैं। खास बात यह कि सपा सरकार की महत्वाकांक्षी जनेश्वर मिश्र विकास योजना में गांव चयनित है।
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