{"_id":"69cedd9f593e029b6d03c27f","slug":"the-young-man-who-donated-land-for-the-satsang-gave-his-testimony-hathras-news-c-56-1-hts1004-146645-2026-04-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hathras News: सत्संग के लिए जमीन देने वाले युवक ने दी गवाही","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hathras News: सत्संग के लिए जमीन देने वाले युवक ने दी गवाही
Fri, 03 Apr 2026 02:50 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Fri, 03 Apr 2026 02:50 AM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
दो साल पहले हुए सत्संग हादसे के मामले में बृहस्पतिवार को गांव फुलरई के संतोष कुमार ने न्यायालय में अपने बयान दर्ज कराए। गौरतलब है कि सत्संग में भगदड़ मचने से 121 लोगों की मौत हो गई थी।
पुलिस ने आयोजकों को घटना की जिम्मेदार ठहराते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी और 11 लोगों के खिलाफ 3200 पेज की चार्जशीट दाखिल की थी। प्रकरण में 676 गवाह हैं और अगली तिथि नौ अप्रैल लगाई गई है।
संतोष कुमार पेशे से मजदूर हैं। मजदूरी से ही वे परिवार का भरण-पोषण करते हैं। जिस जगह पर दो जुलाई 2024 को सत्संग हुआ, उसमें से कुछ भूमि संतोष की भी थी। संतोष ने न्यायालय को बताया कि वह जमीन का पट्टेदार है और सत्संग से 10 दिन पहले कमेटी के अध्यक्ष देवप्रकाश मधुकर व सुशील कुमार आठ-दस लोगो के साथ उनके घर आए थे तथा सत्संग के लिए जमीन देने का आग्रह किया था।
विज्ञापन
इनमें दो लोग उनके परिचित भी थे। सत्संग से लोगों में सद्भाव व परस्पर प्रेम बढ़े, इसलिए उन्होंने जमीन दे दी थी। संतोष कुमार ने बताया कि सत्संग की अनुमति ली गई थी, लेकिन वे तैनात पुलिस बल व लोगों की संख्या नहीं बता सके। गवाह ने बताया कि किसी व्यक्ति ने चरण रज लेने की घोषणा की थी, लेकिन उन्होंने केवल सुना था, किसी को देखा नहीं था।
घटना स्थल पर किसी व्यक्ति से मारपीट नहीं की गई थी। सत्संग स्थल के दूसरी ओर गड्ढा था, जिसमें पानी भरा हुआ था और फिसलन थी। प्रशासन ने उधर जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग नहीं की थी। भीड़ के दबाव में लोग उसी गड्ढे में फिसलते चले गए।
विज्ञापन
पुलिस ने आयोजकों को घटना की जिम्मेदार ठहराते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी और 11 लोगों के खिलाफ 3200 पेज की चार्जशीट दाखिल की थी। प्रकरण में 676 गवाह हैं और अगली तिथि नौ अप्रैल लगाई गई है।
विज्ञापन
संतोष कुमार पेशे से मजदूर हैं। मजदूरी से ही वे परिवार का भरण-पोषण करते हैं। जिस जगह पर दो जुलाई 2024 को सत्संग हुआ, उसमें से कुछ भूमि संतोष की भी थी। संतोष ने न्यायालय को बताया कि वह जमीन का पट्टेदार है और सत्संग से 10 दिन पहले कमेटी के अध्यक्ष देवप्रकाश मधुकर व सुशील कुमार आठ-दस लोगो के साथ उनके घर आए थे तथा सत्संग के लिए जमीन देने का आग्रह किया था।
विज्ञापन
इनमें दो लोग उनके परिचित भी थे। सत्संग से लोगों में सद्भाव व परस्पर प्रेम बढ़े, इसलिए उन्होंने जमीन दे दी थी। संतोष कुमार ने बताया कि सत्संग की अनुमति ली गई थी, लेकिन वे तैनात पुलिस बल व लोगों की संख्या नहीं बता सके। गवाह ने बताया कि किसी व्यक्ति ने चरण रज लेने की घोषणा की थी, लेकिन उन्होंने केवल सुना था, किसी को देखा नहीं था।
घटना स्थल पर किसी व्यक्ति से मारपीट नहीं की गई थी। सत्संग स्थल के दूसरी ओर गड्ढा था, जिसमें पानी भरा हुआ था और फिसलन थी। प्रशासन ने उधर जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग नहीं की थी। भीड़ के दबाव में लोग उसी गड्ढे में फिसलते चले गए।