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चुनावी किस्सा: टीले पर खड़े होकर इंदिरा गांधी ने दिया था भाषण; तांगे-साइकिल से निकलते थे समर्थक वोट मांगने

Sun, 17 Mar 2024 12:17 PM IST
चमन शर्मा राकेश वार्ष्णेय, अमर उजाला, हाथरस
राकेश वार्ष्णेय, अमर उजाला, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Sun, 17 Mar 2024 12:17 PM IST
सार

कांटेसा कार से इंदिरा गांधी सिकंदराराऊ पहुंची थीं। स्वागत के दौरान गेंदे की फूल माला पहनाने से उन्हें छींके आनी शुरू हो गईं, तब किसी को नहीं पता था कि उन्हें गेंदे के फूल से एलर्जी होती है। उसके बाद उन्होंने फूल माला उतार दी थीं। 

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Supporters used to come out on horse-drawn bicycles to ask for votes
भाषण देतीं इंदिरा गांधी - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

हाथरस सुरक्षित सीट से 1971 में चुनाव जीते चंद्रपाल शैलानी सबसे कम उम्र के सांसद चुने गए थे। उस समय प्रचार करने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी आईं, मंच बनाने के लिए समय नहीं था, तो सैनिक पड़ाव के मिट्टे के बड़े टीले को समतल कर खड़े होने लायक स्थान बनाया और उसी से उन्होंने भाषण दिया था। 

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कस्बे के मोहल्ला नौरंगाबाद निवासी चंद्रपाल शैलानी ने 1967 में अपना पहला चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर लड़ा। उनके सामने अनुभवी नरदेव स्नातक प्रत्याशी थे। शैलानी को इस चुनाव में 80,000 मत मिले, जब कि नरदेव स्नातक को 87,000 मत मिले थे, यह चुनाव तो नरदेव जीत गए, लेकिन शैलानी से इंदिरा गांधी प्रभावित हुईं। उन्होंने 1971 में उन्होंने शैलानी को बुला कर चुनाव लड़ने को कहा। शैलानी के पास मात्र एक जीप थी। चुनाव प्रचार के साइकिलों और तांगों का प्रयोग किया गया।
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प्रात:काल कार्यकर्ता इनसे प्रचार करने निकलते और शाम को वापस आ जाते। शैलानी ने इंदिरा गांधी से जनसभा का आग्रह किया। इंदिरा गांधी सैनिक पड़ाव के टीले पर खड़ी होकर संभा को संबोधित करके गई थीं। इस चुनाव मे चंद्रपाल शैलानी को लगभग एक लाख 22 हजार मत मिले। बीजेएस के प्रत्याशी रामसिंह वर्मा को 60 हजार मत मिले। शैलानी पहली बार 62हजार मतों से जीत कर लोकसभा पहुंचे थे।

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गेंदे के फूल से हो गई थी एलर्जी

कांटेसा कार से इंदिरा गांधी सिकंदराराऊ पहुंची थीं। स्वागत के दौरान  गेंदे की फूल माला पहनाने से उन्हें छींके आनी शुरू हो गईं, तब किसी  को नहीं पता था कि उन्हें गेंदे के फूल से एलर्जी होती है। उसके बाद उन्होंने फूल माला उतार दी थी। 

प्रचार के बाद अपने घर ही खाना खाते थे कार्यकर्ता
संस्मरण सुनाते हुये स्व शैलानी की पत्नी निर्मला शैलानी ने बताया कि उस समय कोई मारा मारी नहीं थी। कार्यकर्ता सच्चे मन से प्रचार में जाते थे। लौट कर अधिकांश अपने घरों पर ही खाना खाते थे। वह भी महिलाओं के साथ प्रात: चुनाव प्रचार में जाने से पहले कार्यकर्ताओं को अपने हाथ से खाना खिला कर भेजती थी।

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