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कहीं बंपर, कहीं कम निकल रहा आलू
Tue, 12 Mar 2019 12:16 AM IST
Mohd Rafeek
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
Published by: Mohd Rafeek
Updated Tue, 12 Mar 2019 12:16 AM IST
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सादाबाद के खेतों में आलू की बिनाई करते मजदूर।
- फोटो : अमर उजाला
सादाबाद। क्षेत्र में आलू की खुदाई तेज हो गई है। समय और मजदूरी बचाने के लिए अब किसान आलू खोदने की मशीनों का प्रयोग कर रहे हैं। इस मशीन के जरिए आलू खोदना तो आसान हुआ ही है, बल्कि इससे किसानों की कई मुसीबतें आसान हो गई हैं। खुदाई में आलू की कहीं बंपर पैदावार निकल रही है तो कहीं आलू किसानों को मायूस कर रहा है। फिलहाल, किसान आलू की खुदाई में जुटे हुए हैं। आलू का अच्छा मूल्य मिलने के प्रति भी किसान आश्वस्त नजर नहीं आ रहा।
गौरतलब हो कि क्षेत्र में सर्वाधिक मात्रा में आलू की पैदावार की जाती है। यहां का किसान आलू की फसल पर ही निर्भर है। लिहाजा, इस साल भी काफी क्षेत्रफल में आलू की फसल किसानों द्वारा की गई थी। खुदाई शुरू हुई तो बिगड़े मौसम ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दीं। एक दो दिन बारिश होने से खुदाई बीच में ही रोकनी पड़ी, लेकिन अब जब मौसम सुधरा है तो किसानों ने तेजी के साथ आलू को खुदवाना शुरू कर दिया है। काफी संख्या में लेबर खेतों तक पहुंच रही है, वहीं कई प्रगतिशील किसान पौटैटो हार्वेटस्टर मशीन के जरिए आलू खुदवा रहे हैं, जिससे समय और मजदूरी दोनों की बचत हो रही है।
ट्रैक्टर से संचालित यह मशीन तीन चार नालियों से आलू निकालकर साइड में रखती जाती है। मशीन से खुदाई में उतना ही वक्त लगता है, जितना कि खेतों की जुताई में, लेकिन हाल यह है कि कहीं खेतों से आलू की बंपर पैदावार निकल रही है तो कहीं काफी कम मात्रा में आलू खेतों से निकल रहा है। फिलहाल तो आलू को खुदवाकर बोरों में पैक कराया जा रहा है। ट्रैक्टर ट्रॉलियों के माध्यम से आलू को शीतगृहों में भंडारित कराया जाना भी शुरू हो गया है, लेकिन कुछ दिनों बाद इस काम में तेजी आ जाएगी। हालांकि आलू किसानों को आलू का अच्छा मूल्य इस बार मिलता नहीं दिख रहा। व्यापारी भी रुचि नहीं दिखा रहे।
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गौरतलब हो कि क्षेत्र में सर्वाधिक मात्रा में आलू की पैदावार की जाती है। यहां का किसान आलू की फसल पर ही निर्भर है। लिहाजा, इस साल भी काफी क्षेत्रफल में आलू की फसल किसानों द्वारा की गई थी। खुदाई शुरू हुई तो बिगड़े मौसम ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दीं। एक दो दिन बारिश होने से खुदाई बीच में ही रोकनी पड़ी, लेकिन अब जब मौसम सुधरा है तो किसानों ने तेजी के साथ आलू को खुदवाना शुरू कर दिया है। काफी संख्या में लेबर खेतों तक पहुंच रही है, वहीं कई प्रगतिशील किसान पौटैटो हार्वेटस्टर मशीन के जरिए आलू खुदवा रहे हैं, जिससे समय और मजदूरी दोनों की बचत हो रही है।
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ट्रैक्टर से संचालित यह मशीन तीन चार नालियों से आलू निकालकर साइड में रखती जाती है। मशीन से खुदाई में उतना ही वक्त लगता है, जितना कि खेतों की जुताई में, लेकिन हाल यह है कि कहीं खेतों से आलू की बंपर पैदावार निकल रही है तो कहीं काफी कम मात्रा में आलू खेतों से निकल रहा है। फिलहाल तो आलू को खुदवाकर बोरों में पैक कराया जा रहा है। ट्रैक्टर ट्रॉलियों के माध्यम से आलू को शीतगृहों में भंडारित कराया जाना भी शुरू हो गया है, लेकिन कुछ दिनों बाद इस काम में तेजी आ जाएगी। हालांकि आलू किसानों को आलू का अच्छा मूल्य इस बार मिलता नहीं दिख रहा। व्यापारी भी रुचि नहीं दिखा रहे।
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