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नारायण साकार हरि भोले बाबा: सत्संग के बाद मची भगदड़, 116 की मौत, मरने वालों में महिला-बच्चे अधिक

Tue, 02 Jul 2024 10:47 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Tue, 02 Jul 2024 10:47 PM IST
सार

2 जुलाई दोपहर यह हादसा उस समय हआ, जब भोले बाबा के काफिले के निकलते समय उनकी चरण धूल लेने के लिए अनुयायियों में अफरा-तफरी मच गई। भगदड़ के बीच हाईवे के सहारे के कीचड़युक्त खेत में तमाम लोग गिर गए और उनके ऊपर से भीड़ गुजर गई।

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Sikandra Rao Narayan Sakar Hari Bhole Baba Satsang Incident
नारायण साकार हरि भोले बाबा - फोटो : संवाद

विस्तार

सिकंदराराऊ  तहसील क्षेत्र के नेशनल हाईवे स्थित गांव फुलरई मुगलगढ़ी के सहारे खेतों में आयोजित नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा के सत्संग के समापन के बाद मची भगदड़ में करीब 116 लोगों की मौत हो गई। 

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2 जुलाई दोपहर यह हादसा उस समय हआ, जब भोले बाबा के काफिले के निकलते समय उनकी चरण धूल लेने के लिए अनुयायियों में अफरा-तफरी मच गई। भगदड़ के बीच हाईवे के सहारे के कीचड़युक्त खेत में तमाम लोग गिर गए और उनके ऊपर से भीड़ गुजर गई। हादसे के बाद मची चीख पुकार के बीच अफरा-तफरी भरे माहौल में शवों व घायलों को सिकंदराराऊ के ट्रामा सेंटर और एटा के मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। मरने वालों में महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक है। मरने वालों में चार की पहचान हुई है। 
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अनुयायी
मंडलायुक्त अलीगढ़ चैत्रा वी की अगुवाई में जांच समिति गठित की गई है। 24 घंटे के भीतर इसे अपनी रिपोर्ट देनी है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि 20 हजार लोगों के कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति मांगी गई थी, इसमें 50 हजार से अधिक लोग शामिल हुए। कार्यक्रम स्थल पर जगह भी समतल नहीं थी, भोले के बाबा के पैर छूने की होड़ में भगदड़ मची है। मंडलायुक्त ने अभी 116 की मौत और 18 लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की पुष्टि की है। इस संबंध में आयोजकों के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज करने की तैयारी चल रही है। 

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हादसा 2 जुलाई दोपहर करीब दो बजे हुआ। उस समय सत्संग समाप्त हो गया था और भीड़ अपने वाहनों की ओर जा रही थी। इसी दौरान सत्संग में स्वयंसेवकों भोले बाबा के वाहनों के काफिले को निकालने भीड़ रोक दिया। स्वयंसेवकों ने लाठी डंडों से भीड़ को धकियाकर रोकने और बाबा के काफिले की चरण धूल लेने की होड़ के बीच कुछ महिलाएं गिर पड़ी। इसी बीच स्वयं सेवकों ने उन्हें धकेला तो वहां भगदड़ मच गई और गिरे लोगों को पीछे से आ रहे लोग कुचलते गए। इस भगदड़ के दौरान काफी संख्या में लोग एनएच के सहारे कीचड़युक्त खेत में गिर गए और उनके ऊपर से भी भीड़ गुजरती चली गई। आनन-फानन आसपास के ग्रामीणों ने राहत व बचाव कार्य शुरू किए और प्रशासन को सूचना दी। तब जाकर घायलों और शवों को जो भी वाहन मिला, उससे सिकंदराराऊ के ट्रामा सेंटर और एटा के मेडिकल कॉलेज भिजवाया गया।
सिकन्दराराऊ ट्रॉमा सेंटर पर जमा भीड़
पुलिस-प्रशासन ने भले ही 116 की मरने की पुष्टि की है, लेकिन यह आंकड़ा अधिक हो सकता है। शाम तक करीब 97 शव सिकंदराराऊ के ट्रामा सेंटर पर लाए गए। इनमें 85 महिलाएं, चार बच्चों और तीन पुरुषों के शव थे। 27 शव एटा मेडिकल कॉलेज पहुंचे हैं। इनकी संख्या और बढ़ सकती है। कुछ शवों को परिजन सिकंदराराऊ से बिना पोस्टमार्टम और पंचनामा भरवाए लेकर चले गए। सत्संग में अलीगढ़, एटा, मैनपुरी, कासगंज, आगरा सहित हरियाणा से भी अनुयायी पहुंचे थे। 

बताया जा रहा है कि सत्संग के पंडाल में हजारों की संख्या लोग पहुंचे थे और वहां गर्मी व उमस भरा माहौल था। सत्संग के समाप्त होने के बाद लोग वहां निकलकर अपने वाहनों तक पहुंचने की जल्दी में थे। मरने वालों में दो की पहचान हाथरस के गांव नगला बिहारी निवासी शीला देवी और इंद्रवती के रूप में हुई है। बाकी लोगों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। एक महिला की पहचान प्रेमवती देवी (72) पत्नी दलवीर सिंह निवासी तुलसी विहार दादरी गौतमबुद्धनगर के रूप में हुई है। एक की पहचान एटा में हुई है।

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