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Hathras News: सीवेज फार्म भूमि की नीलामी में हुआ था घोटाला, जांच में खुलासा
Tue, 15 Sep 2026 01:41 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Tue, 15 Sep 2026 01:41 AM IST
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
नगर पालिका परिषद हाथरस के जलेसर रोड स्थित कृषि योग्य सीवेज फार्म भूमि की वर्ष 2024-25 के ठेका नीलामी में घोटाला हुआ था। सभासदों की शिकायत पर हुई जांच में इसकी पुष्टि हुई है।
एसडीएम सदर एवं वरिष्ठ कोषाधिकारी की संयुक्त जांच रिपोर्ट अनुसार, नगर पालिका प्रशासन ने ई-टेंडरिंग प्रक्रिया और नीलामी राशि के आकलन में अनियमितता बरती। नीलामी प्रक्रिया समय से नहीं हुई जिससे नगर पालिका को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी। जिलाधिकारी ने यह जांच रिपोर्ट अग्रिम कार्रवाई के लिए नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव को भेजी है।
2024 में बनी समिति, 2026 में आई रिपोर्ट
नगर पालिका के वार्ड-34 के सभासद पंडित सुनील अग्निहोत्री, वार्ड-27 के सभासद नवीन सबलोक एवं वार्ड-35 के सभासद मनीष अग्रवाल ने 28 अक्तूबर 2024 और 7 नवंबर 2024 को जिलाधिकारी से शिकायत की थी। सभासदों का आरोप था कि सीवेज फार्म की कृषि योग्य भूमि का ठेका अपने चहेते ठेकेदार को देने के लिए नियमों को ताक पर रखकर लाखों रुपये का भ्रष्टाचार किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने इस मामले में 2 दिसंबर 2024 को जांच समिति गठित की। 21 महीने की जांच के बाद समिति ने अगस्त 2026 में रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी है।
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जांच रिपोर्ट में इन अनिमितताओं का उल्लेख
-घट गई नीलामी राशि :
वर्ष 2022-23 में सीवेज फार्म की नीलामी 31,25,853 रुपये तथा वर्ष 2023-24 में 34,38,438 रुपये में हुई थी। वर्ष 2024-25 के लिए अधिशासी अधिकारी ने 30,50,520 रुपये का प्रस्ताव रखा था जिसे बोर्ड ने पास किया। अंत में केवल सात माह (नवंबर 2024 से मई 2025) की अवधि के लिए इस ठेके को मात्र 17,82,000 रुपये में ही स्वीकृत कर दिया गया। नियम के अनुसार यह प्रक्रिया हर वर्ष नए फसली वर्ष की शुरुआत से पहले होनी चाहिए और नीलामी राशि में बढ़ोतरी होनी चाहिए थी।
-ठेका नीलामी में गड़बड़ी :
नियमों के अनुसार सीवेज फार्म का ठेका ई-ऑक्शन के माध्यम से उच्चतम बोलीदाता को दिया जाना चाहिए था। पालिका प्रशासन ने ई-ऑक्शन की जगह ई-निविदा प्रक्रिया अपनाई। लगातार एक ही ठेकेदार या उससे जुड़े पक्ष की ओर से नीलामी प्राप्त करना भी जांच के दायरे में आया है।
-नियम विरुद्ध चेक स्वीकार किया :
निविदा प्रक्रिया में सम्मिलित एक फर्म ने धरोहर राशि के रूप में निर्धारित एफडीआर के स्थान पर चेक प्रस्तुत किया, जो निविदा शर्तों और शासनादेशों के प्रतिकूल था। इसके बावजूद तकनीकी बिड को शर्तों के साथ स्वीकार किया गया, जो पूरी प्रक्रिया की खामी को दर्शाता है।
-आर्थिक हानि : फसली वर्ष एक जून से शुरू होता है, लेकिन पालिका प्रशासन ने समय पर नीलामी प्रक्रिया पूर्ण नहीं की। केवल सात महीने के लिए ठेका उठाया, जिससे पालिका को सीधा वित्तीय नुकसान हुआ।
जांच समिति का अंतिम निष्कर्ष : संयुक्त जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि सीवेज फार्म की कृषि भूमि नीलामी राशि का आकलन तार्किक रूप से नहीं किया गया। समय से नीलामी प्रक्रिया भी नहीं पूरी की गई। ई-निविदा की प्रक्रिया भी देरी से और दोषपूर्ण ढंग से की गई।
सभासदों की शिकायत पर नगर पालिका के सीवेज फार्म के ठेका नीलामी प्रक्रिया की जांच कराई गई थी। संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट मिल चुकी है। अग्रिम कार्रवाई के लिए जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
अतुल वत्स, जिलाधिकारी
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एसडीएम सदर एवं वरिष्ठ कोषाधिकारी की संयुक्त जांच रिपोर्ट अनुसार, नगर पालिका प्रशासन ने ई-टेंडरिंग प्रक्रिया और नीलामी राशि के आकलन में अनियमितता बरती। नीलामी प्रक्रिया समय से नहीं हुई जिससे नगर पालिका को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी। जिलाधिकारी ने यह जांच रिपोर्ट अग्रिम कार्रवाई के लिए नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव को भेजी है।
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2024 में बनी समिति, 2026 में आई रिपोर्ट
नगर पालिका के वार्ड-34 के सभासद पंडित सुनील अग्निहोत्री, वार्ड-27 के सभासद नवीन सबलोक एवं वार्ड-35 के सभासद मनीष अग्रवाल ने 28 अक्तूबर 2024 और 7 नवंबर 2024 को जिलाधिकारी से शिकायत की थी। सभासदों का आरोप था कि सीवेज फार्म की कृषि योग्य भूमि का ठेका अपने चहेते ठेकेदार को देने के लिए नियमों को ताक पर रखकर लाखों रुपये का भ्रष्टाचार किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने इस मामले में 2 दिसंबर 2024 को जांच समिति गठित की। 21 महीने की जांच के बाद समिति ने अगस्त 2026 में रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी है।
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जांच रिपोर्ट में इन अनिमितताओं का उल्लेख
-घट गई नीलामी राशि :
वर्ष 2022-23 में सीवेज फार्म की नीलामी 31,25,853 रुपये तथा वर्ष 2023-24 में 34,38,438 रुपये में हुई थी। वर्ष 2024-25 के लिए अधिशासी अधिकारी ने 30,50,520 रुपये का प्रस्ताव रखा था जिसे बोर्ड ने पास किया। अंत में केवल सात माह (नवंबर 2024 से मई 2025) की अवधि के लिए इस ठेके को मात्र 17,82,000 रुपये में ही स्वीकृत कर दिया गया। नियम के अनुसार यह प्रक्रिया हर वर्ष नए फसली वर्ष की शुरुआत से पहले होनी चाहिए और नीलामी राशि में बढ़ोतरी होनी चाहिए थी।
-ठेका नीलामी में गड़बड़ी :
नियमों के अनुसार सीवेज फार्म का ठेका ई-ऑक्शन के माध्यम से उच्चतम बोलीदाता को दिया जाना चाहिए था। पालिका प्रशासन ने ई-ऑक्शन की जगह ई-निविदा प्रक्रिया अपनाई। लगातार एक ही ठेकेदार या उससे जुड़े पक्ष की ओर से नीलामी प्राप्त करना भी जांच के दायरे में आया है।
-नियम विरुद्ध चेक स्वीकार किया :
निविदा प्रक्रिया में सम्मिलित एक फर्म ने धरोहर राशि के रूप में निर्धारित एफडीआर के स्थान पर चेक प्रस्तुत किया, जो निविदा शर्तों और शासनादेशों के प्रतिकूल था। इसके बावजूद तकनीकी बिड को शर्तों के साथ स्वीकार किया गया, जो पूरी प्रक्रिया की खामी को दर्शाता है।
-आर्थिक हानि : फसली वर्ष एक जून से शुरू होता है, लेकिन पालिका प्रशासन ने समय पर नीलामी प्रक्रिया पूर्ण नहीं की। केवल सात महीने के लिए ठेका उठाया, जिससे पालिका को सीधा वित्तीय नुकसान हुआ।
जांच समिति का अंतिम निष्कर्ष : संयुक्त जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि सीवेज फार्म की कृषि भूमि नीलामी राशि का आकलन तार्किक रूप से नहीं किया गया। समय से नीलामी प्रक्रिया भी नहीं पूरी की गई। ई-निविदा की प्रक्रिया भी देरी से और दोषपूर्ण ढंग से की गई।
सभासदों की शिकायत पर नगर पालिका के सीवेज फार्म के ठेका नीलामी प्रक्रिया की जांच कराई गई थी। संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट मिल चुकी है। अग्रिम कार्रवाई के लिए जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
अतुल वत्स, जिलाधिकारी