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कई घंटे इंतजार के बाद वापस की टिकटें
ब्यूरो, अमर उजाला, हाथरस।
Updated Fri, 09 Jun 2017 11:30 PM IST
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ट्रेन
- फोटो : अमर उजाला
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कासगंज में आरपीएफ कर्मियों द्वारा लोको पायलट की पिटाई के बाद रेलवे कर्मियों के चक्का जाम का असर हाथरस के रेल यातायात पर भी दिखाई दिया। कासगंज से आने वाली पहली पैसेंजर ट्रेन के इंतजार में यात्रियों को सब्र जवाब दे गया और ज्यादातर यात्री टिकटें वापस कर लौट गए। इनमें से कई यात्री ऐसे भी थे जो मथुरा से मुंबई और गुजरात जैसी दूसरी जगहों के लिए ट्रेन पकड़ते हैं।
दरअसल, लोको पायलट प्रेम प्रभाकर और पायलट आर के त्रिपाठी की पिटाई के बाद पायलटों ने जमकर हंगामा किया था। आरपीएफ थाने पर पथराव करने के बाद कर्मचारी हड़ताल पर चले गएं। हड़ताल के बाद मथुरा, बरेली और कानपुर ट्रैक पर ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया। रेल कर्मी ट्रैक पर इकट्ठा हो गए और चक्का जाम कर दिया।
इस वजह से कई ट्रेन बीच में ही रोक दी गईं। करीब पांच घंटे तक रेल यातायात बंद रहा और आरोपी आरपीएफ कर्मियों पर कार्रवाई के आश्वासन के बाद ही खुल सका। है। ट्रेनों का चक्का जाम होने के कारण हाथरस सिटी स्टेशन पर सुबह नौ बजे पहुंचने वाली पहली पैसेंजर ट्रेन डेढ़ बजे पहुंची। यही ट्रेन मथुरा जाने के बाद वापस कासगंज के लिए लौटती है, इसलिए मथुरा से आने वाले रेल यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। जिन यात्रियों को कासगंज में हंगामे की भनक लग गई, वह अपनी टिकटें वापस कर घर चले गए। दोपहर डेढ़ बजे पहली ट्रेन हाथरस पहुंची तब टिकट खिड़की पर सन्नाटा पसरा था और ज्यादातर यात्री स्टेशन से जा चुके थे।
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इसके बाद दूसरी ट्रेन ढाई बजे आई। कुल मिलाकर चार पैसेंजर ट्रेने कासगंज में हुए हंगामे और चक्का जाम के कारण प्रभावित हुईं। कासगंज से ट्रेन न आने के कारण मथुरा से भी ट्रेनों की वापसी नहीं हो सकी, इसका अगर किसी को फायदा हुआ तो वह शहर के लोग थे। डेढ़ बजे पहली ट्रेन आने के कारण सिटी स्टेशन और तालाब चौराहे के रेलवे फाटक बंद नहीं हुए। इससे रोज बनने वाले जाम के हालात नहीं बने।
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दरअसल, लोको पायलट प्रेम प्रभाकर और पायलट आर के त्रिपाठी की पिटाई के बाद पायलटों ने जमकर हंगामा किया था। आरपीएफ थाने पर पथराव करने के बाद कर्मचारी हड़ताल पर चले गएं। हड़ताल के बाद मथुरा, बरेली और कानपुर ट्रैक पर ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया। रेल कर्मी ट्रैक पर इकट्ठा हो गए और चक्का जाम कर दिया।
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इस वजह से कई ट्रेन बीच में ही रोक दी गईं। करीब पांच घंटे तक रेल यातायात बंद रहा और आरोपी आरपीएफ कर्मियों पर कार्रवाई के आश्वासन के बाद ही खुल सका। है। ट्रेनों का चक्का जाम होने के कारण हाथरस सिटी स्टेशन पर सुबह नौ बजे पहुंचने वाली पहली पैसेंजर ट्रेन डेढ़ बजे पहुंची। यही ट्रेन मथुरा जाने के बाद वापस कासगंज के लिए लौटती है, इसलिए मथुरा से आने वाले रेल यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। जिन यात्रियों को कासगंज में हंगामे की भनक लग गई, वह अपनी टिकटें वापस कर घर चले गए। दोपहर डेढ़ बजे पहली ट्रेन हाथरस पहुंची तब टिकट खिड़की पर सन्नाटा पसरा था और ज्यादातर यात्री स्टेशन से जा चुके थे।
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इसके बाद दूसरी ट्रेन ढाई बजे आई। कुल मिलाकर चार पैसेंजर ट्रेने कासगंज में हुए हंगामे और चक्का जाम के कारण प्रभावित हुईं। कासगंज से ट्रेन न आने के कारण मथुरा से भी ट्रेनों की वापसी नहीं हो सकी, इसका अगर किसी को फायदा हुआ तो वह शहर के लोग थे। डेढ़ बजे पहली ट्रेन आने के कारण सिटी स्टेशन और तालाब चौराहे के रेलवे फाटक बंद नहीं हुए। इससे रोज बनने वाले जाम के हालात नहीं बने।