सेहत से खिलबाड़: वायरल के बीच अप्रशिक्षितों का ‘इलाज’, जांच-ड्रिप के नाम पर दो से पांच हजार की वसूली
कई निजी क्लीनिकों पर मरीजों को रक्त परीक्षण के लिए संबंधित पैथोलॉजी लैबों पर भेजा जाता है। सीबीसी, मलेरिया और विडाल समेत विभिन्न जांचों के नाम पर मरीजों को खर्च उठाना पड़ रहा है। आरोप है कि कुछ जगह जांच के बाद मरीज को जरूरत हो या न हो, उसे ड्रिप लगा दी जाती है।
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मौसम में बदलाव और खेतों में भरे पुराने पानी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के साथ क्षेत्र में वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। सर्दी-जुकाम, खांसी, तेज बुखार और बदन दर्द की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में लोग सरकारी अस्पताल पहुंच रहे हैं। इसी बीच कस्बे और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित बताए जा रहे अवैध निजी क्लीनिकों और पैथोलॉजी लैबों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि अप्रशिक्षित लोगों द्वारा वायरल बुखार, मलेरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों का इलाज किया जा रहा है और जांच व उपचार के नाम पर मरीजों से मनमानी रकम वसूली जा रही है।
जांच से लेकर ड्रिप तक का खेल
स्थानीय लोगों के अनुसार, कई निजी क्लीनिकों पर मरीजों को रक्त परीक्षण के लिए संबंधित पैथोलॉजी लैबों पर भेजा जाता है। सीबीसी, मलेरिया और विडाल समेत विभिन्न जांचों के नाम पर मरीजों को खर्च उठाना पड़ रहा है। आरोप है कि कुछ जगह जांच के बाद मरीज को जरूरत हो या न हो, उसे ड्रिप लगा दी जाती है। उपचार और जांच के नाम पर एक मरीज से करीब दो हजार से पांच हजार रुपये तक लिए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। क्षेत्र में एक परिवार के सदस्य के बीमार पड़ने के बाद दूसरे सदस्यों के भी संक्रमण की चपेट में आने की शिकायतें हैं। ऐसे में लोग सरकारी अस्पताल में उपचार और परामर्श लेने के बाद भी राहत न मिलने पर निजी क्लीनिकों का रुख कर रहे हैं। इसी का फायदा उठाकर अप्रशिक्षित लोगों द्वारा मरीजों का उपचार किए जाने के आरोप हैं।
नोटिस के बाद फिर शुरू हो गए क्लीनिक
हसायन कस्बे के मुख्य बाजार, गली-मोहल्लों से लेकर देहात क्षेत्र तक कई निजी क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब संचालित होने की शिकायतें हैं। कुछ दिन पहले स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभियान चलाकर कई क्लीनिकों और पैथोलॉजी लैबों पर कार्रवाई करते हुए नोटिस जारी किए गए थे। कुछ केंद्रों को बंद भी कराया गया था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के दो दिन बाद ही कई जगह फिर से काम शुरू हो गया। इसके बाद दोबारा प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से अवैध क्लीनिक संचालकों के हौसले बढ़े हुए हैं। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर अभियान चलाने और कार्रवाई की बात कही जाती है, लेकिन नोटिस जारी होने के बाद मामला ठंडा पड़ जाता है। इससे अवैध क्लीनिक और जांच केंद्र फिर संचालित होने लगते हैं।
जिम्मेदार बोले- कई क्लीनिकों पर हुई कार्रवाई
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. वरुण चौधरी ने बताया कि क्षेत्र में कई क्लीनिकों पर कार्रवाई की गई थी। उन्होंने कहा कि वह मौके पर आकर स्थिति देखेंगे। उनका कहना था कि कई मामलों में प्रक्रिया विचाराधीन रहती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति चिकित्सक से संबंधित कागजात प्रस्तुत कर पंजीकरण करा लेता है तो स्थिति अलग हो जाती है।