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रोडवेज के नियमित कर्मियों की नहीं लग पा रही ड्यूटी, लौटाए जा रहे वापस
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
हाथरस डिपो में एक तो वैसे नियमित कर्मी कम है। फिर उनको बस नहीं मिल पा रही है। इस कारण वह कार्यशाला से लौट रहे हैं। उनकी छुट्टी लगाई जा रही है। संविदा वाले कर्मियों को कार्यशाला से रूटों पर भेजा जा रहा है। इसे लेकर नियमित कर्मियों में गुस्सा है।
उल्लेखनीय है कि हाथरस डिपो में वर्तमान में 77 बसें हैं। इन बसों के संचालन के लिए करीब दो सौ संविदा व नियमित कर्मी है। लगातार सेवानिवृत्त होने के कारण नियमित कर्मी कम होते जा रह है। कर्मियों की मानें तो वर्कशॉप पहुंचने पर संविदा वालों को बसें प्रदान कर दी जाती है।
उनको रूट के लिए बस नहीं दी जा रही है। काफी काफी देर तक नियमित कर्मी बसों का इंतजार करते हैं। फिर भी उन्हें बस नहीं मिल पा रही है। बस न मिलने के कारण लौट रहे हैं। सूत्रों की मानें तो नियमित कर्मी वर्कशॉप के अधिकारियों के लिए मोर्चा खोलने की रणनीति तैयार कर रहे हैं।
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हाथरस डिपो क बसस्टैंड से लेकर कार्यशाला तक इसकी सुगबुहाट चल रही है। कर्मियों के कामकाज से डिपो के आला अफसर अनजान बने हुए हैं। इस मामले में एआरएम शशी रानी का कहना है कि बसें सुबह चार बजे से निकलना शुरू हो जाती है। नियमित कर्मी देरी से आते हैं। नियमित कर्मियों को बसें न मिलने का कोई मामला नहीं है।
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हाथरस डिपो में एक तो वैसे नियमित कर्मी कम है। फिर उनको बस नहीं मिल पा रही है। इस कारण वह कार्यशाला से लौट रहे हैं। उनकी छुट्टी लगाई जा रही है। संविदा वाले कर्मियों को कार्यशाला से रूटों पर भेजा जा रहा है। इसे लेकर नियमित कर्मियों में गुस्सा है।
उल्लेखनीय है कि हाथरस डिपो में वर्तमान में 77 बसें हैं। इन बसों के संचालन के लिए करीब दो सौ संविदा व नियमित कर्मी है। लगातार सेवानिवृत्त होने के कारण नियमित कर्मी कम होते जा रह है। कर्मियों की मानें तो वर्कशॉप पहुंचने पर संविदा वालों को बसें प्रदान कर दी जाती है।
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उनको रूट के लिए बस नहीं दी जा रही है। काफी काफी देर तक नियमित कर्मी बसों का इंतजार करते हैं। फिर भी उन्हें बस नहीं मिल पा रही है। बस न मिलने के कारण लौट रहे हैं। सूत्रों की मानें तो नियमित कर्मी वर्कशॉप के अधिकारियों के लिए मोर्चा खोलने की रणनीति तैयार कर रहे हैं।
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हाथरस डिपो क बसस्टैंड से लेकर कार्यशाला तक इसकी सुगबुहाट चल रही है। कर्मियों के कामकाज से डिपो के आला अफसर अनजान बने हुए हैं। इस मामले में एआरएम शशी रानी का कहना है कि बसें सुबह चार बजे से निकलना शुरू हो जाती है। नियमित कर्मी देरी से आते हैं। नियमित कर्मियों को बसें न मिलने का कोई मामला नहीं है।