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विश्व गौरैया दिवस: कीटनाशक दवाओं से गिरी गौरैया की संख्या, छत पर रखें दाना-पानी, तभी सुनाई देगी चहचहाट

Mon, 20 Mar 2023 02:20 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Mon, 20 Mar 2023 02:20 AM IST
सार

गौरैया को बचाने के लिए अपने घर के कोने में लकड़ी का घोसला लगाए। या फिर जूता वाले डिब्बे को चार सेंटीमीटर का छेद करके लटका दें। उसमें गौरैया अपना घोसला स्वयं बना लेगी।

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number of sparrows fell due to insecticides keep grains and water on roof
गौरैया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

किसानों द्वारा फसलों को बचाने के लिए कीटनाशक दवाओं का प्रयोग किया जाता है, जिससे गौरैया की संख्या कम हुई है। लोगों ने पक्के मकान बना लिए। इस कारण गौरैया घोसला नहीं बना पाती हैं। यह कहना है डीएफओ डॉ. सीपी सिंह का।

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हमारे जीवन में जितने पौधे आवश्यक है, उसी तरह पक्षियों की भी विशेष महत्ता है। किसानों द्वारा ग्रामीण अंचल में फसलों को कीट से बचाने के लिए कीटनाशक दवाओं का प्रयोग कर रहे हैं। इससे गौरैया की संख्या कम हो गई है। कुछ समय पहले वन विभाग द्वारा गौरैया को बचाने के लिए लकड़ी के घोसले भी बांटे गए थे। इससे जिले में गौरैया का संरक्षण हुआ था और चहचहाट फिर से सुनने को मिली। वहीं, वन विभाग के अधिकारी गौरैया व अन्य पक्षियों के लिए गर्मी को देखते हुए छतों पर दाना व पानी रखने की अपील कर रहे हैं।
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गौरैया के लिए लोग लगाए नेस्ट हाउस
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गौरैया को बचाने के लिए अपने घर के कोने में लकड़ी का घोसला लगाए। या फिर जूता वाले डिब्बे को चार सेंटीमीटर का छेद करके लटका दें। उसमें गौरैया अपना घोसला स्वयं बना लेगी।
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गौरैया का सर्वे आज तक नहीं किसी का ध्यान
शासन स्तर से पर्यावरण व पक्षियों की प्रजाति को बचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अभी तक जिले में वन विभाग ने गौरैया का सर्वे नहीं कराया है। इस कारण वन विभाग के पास जिले में गौरैया का आंकड़ा नहीं है।


किसानों द्वारा फसलों को कीटों से बचाने के लिए कीटनाशक दवा का प्रयोग किया जाता है। यह गौरैया के विलुप्त होने का सबसे बड़ा कारण है। जिले में गौरैया के संरक्षण के लिए लोगों को घरों में नेस्ट हाउस लगाने चाहिए। ताकि आने वाली पीढ़ी गौरैया के बारे में जान सके। - डॉ सीपी सिंह, डीएफओ
 

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