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अब मनरेगा में लाखों का गोलमाल
Thu, 09 May 2019 12:03 AM IST
Mohd Rafeek
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
Published by: Mohd Rafeek
Updated Thu, 09 May 2019 12:03 AM IST
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नगला मेवा में कागजों में इंटरलॉकिंग हुई यह सड़क।
- फोटो : अमर उजाला
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हाथरस/सहपऊ। जिले में मनरेगा के तहत गोलमाल सामने आया है। इस गोलमाल ने जिले में मनरेगा के तहत हुए तमाम कार्यों को सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है। ब्लॉक सहपऊ की ग्राम पंचायत सहपऊ देहात के माजरा नगला मेवा में एक सड़क पर इंटरलॉकिंग और नाली का निर्माण कागजों में होने का मामला सामने आया है। यहां तक कि ग्राम्य विकास विभाग की ओर से इस काम को कराने के लिए कोई मस्टररोल भी जारी नहीं किया गया। हैरानी तब हुई, जब विभाग ने इस काम के लिए मेटेरियल खरीदने के नाम पर 3.06 लाख रुपये का भुगतान भी दो किश्तों में फर्म को कर दिया। अब इस मामले के सामने आने के बाद संबंधित विभागीय अधिकारी चुप्पी साध रहे हैं।
मनरेगा के तहत ग्रामीण तबके के मजदूरों को गांव में ही मजदूरी मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक्ट पारित किया गया था। यहां जिले में मनरेगा के तहत एक घोटाले ने जिले में चल रहे तमाम कार्यों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मनरेगा के तहत ब्लॉक सहपऊ की ग्राम पंचायत सहपऊ के माजरा नगला मेवा में पीपल के पेड़ से लेकर गीतम सिंह के खेत तक इंटरलॉकिंग व नाली निर्माण का कार्य विभाग की ओर से दर्शाया गया है। संबंधित विभागीय अधिकारियों की ओर से इस काम के प्रस्ताव को 14 दिसंबर 2018 को स्वीकृति दी गई।
विभागीय दस्तावेजों के आधार पर 14 दिसंबर को ही यह काम शुरू किया गया। इस काम को पूरा करने के लिए तीन महीने का समय भी निर्धारित किया गया। विभाग को 08 फरवरी 2019 को इस कार्य को कराए जाने के लिए मेटेरियल का बिल दो किश्तों में प्राप्त हुआ है। पहले बिल 138515 का और दूसरा बिल 168049.94 रुपये का था। विभाग की ओर से दोनों बिलों का भुगतान मनरेगा से 26 मार्च 2019 को वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले कर दिया गया। अब इस मामले के सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। यहां तक कि विभाग की ओर से मस्टररोल भी फीड नहीं किए गए हैं। इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से मजदूरों का भुगतान के ही कागजों में निर्माण कार्य को पूरा कर दिया है। संबंधित टीएम द्वारा एमबी को दर्शा दिया गया है। ब्यूरो
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मनरेगा के तहत ग्रामीण तबके के मजदूरों को गांव में ही मजदूरी मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक्ट पारित किया गया था। यहां जिले में मनरेगा के तहत एक घोटाले ने जिले में चल रहे तमाम कार्यों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मनरेगा के तहत ब्लॉक सहपऊ की ग्राम पंचायत सहपऊ के माजरा नगला मेवा में पीपल के पेड़ से लेकर गीतम सिंह के खेत तक इंटरलॉकिंग व नाली निर्माण का कार्य विभाग की ओर से दर्शाया गया है। संबंधित विभागीय अधिकारियों की ओर से इस काम के प्रस्ताव को 14 दिसंबर 2018 को स्वीकृति दी गई।
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विभागीय दस्तावेजों के आधार पर 14 दिसंबर को ही यह काम शुरू किया गया। इस काम को पूरा करने के लिए तीन महीने का समय भी निर्धारित किया गया। विभाग को 08 फरवरी 2019 को इस कार्य को कराए जाने के लिए मेटेरियल का बिल दो किश्तों में प्राप्त हुआ है। पहले बिल 138515 का और दूसरा बिल 168049.94 रुपये का था। विभाग की ओर से दोनों बिलों का भुगतान मनरेगा से 26 मार्च 2019 को वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले कर दिया गया। अब इस मामले के सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। यहां तक कि विभाग की ओर से मस्टररोल भी फीड नहीं किए गए हैं। इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से मजदूरों का भुगतान के ही कागजों में निर्माण कार्य को पूरा कर दिया है। संबंधित टीएम द्वारा एमबी को दर्शा दिया गया है। ब्यूरो
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