Hathars News: वैसे तो हैं कई विभाग, 65 सड़कों के निर्माण के लिए एक न हुआ तैयार
हाथरस में 65 सड़कें सामने आई हैं, जिनके निर्माण के लिए कोई भी विभाग तैयार नहीं हो रहा है। ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए अफसरों और जनप्रतिनिधियों के दरवाजे पर दस्तक देते रहे हैं, एक विभाग से दूसरे तक उनके ज्ञापन और पत्र घूमते रहे हैं। हर विभाग का एक ही जवाब, सड़क का स्वामित्व उसके पास नहीं है।
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कहने के लिए तो सड़कों का निर्माण करने वाले कई विभाग हैं, लेकिन जिले में 65 सड़कें ऐसी हैं, जिनका स्वामित्व किसी के पास नहीं है। वर्षों से टूटी पड़ी इन सड़कों के निर्माण व देखभाल करने के लिए एक भी विभाग तैयार नहीं हुआ तो जिलाधिकारी ने सर्वे कराया। सर्वे के बाद उन्होंने इनका स्वामित्व लोकनिर्माण विभाग को देने के लिए शासन को पत्र लिखा है।
ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए अफसरों और जनप्रतिनिधियों के दरवाजे पर दस्तक देते रहे हैं, एक विभाग से दूसरे तक उनके ज्ञापन और पत्र घूमते रहे हैं। हर विभाग का एक ही जवाब, सड़क का स्वामित्व उसके पास नहीं है। बिलखौरा खुर्द और कलां में जिस सड़क की बदहाली को लेकर आंदोलन चल रहा है, उसके लावारिस होने का खुलासा होने के बाद प्रशासन ने जिले भर में ऐसी सड़कों का सर्वे कराया। सर्वे में जिन 65 मार्गों का खुलासा हुआ है, उनकी लंबाई 200 मीटर से लेकर 2.5 किलोमीटर तक है। दूसरी जगह बिलखौरा की तरह आंदोलन की स्थिति न बने, इसके लिए डीएम ने शासन को पत्र लिखा है, ताकि इनके निर्माण, मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी तय हो सके।
अधिकांश सड़कों की लंबाई एक किमी से कम
सर्वे में सामने आए लावारिस मार्गों में पीबी मार्ग से जाऊ नहर की पटरी मार्ग 2.20, अखईपुर से अमरपुर घना मार्ग दो, सासनी-अलीगढ़ मार्ग से बिलखौरा खुर्द मार्ग 2.40 किलोमीटर है। इसमें 17 मार्ग दो किलोमीटर से कम लंबाई के हैं, जबकि 45 मार्ग एक किलोमीटर या उससे कम लंबाई के हैं।,
सड़क निर्माण करने वाले विभाग
लोक निर्माण विभाग के अलावा क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत, मंडी समिति, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग से सड़कें बनाई जाती है। स्थानीय निकायों के बाहर का क्षेत्र और गांव जिला पंचायत की सीमा क्षेत्र में आते हैं। इसके अलावा सांसद और विधायक निधि से भी सड़कें बनवाई जा सकती है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से ग्रामीण संपर्क मार्ग बनवाए जा सकते हैं, लेकिन फिर भी ग्रामीण मुसीबत झेलते रहे।
हमने सर्वे कराकर कुल 65 ऐसी सड़कों की तलाश की हैं, जिनका स्वामित्व किसी के पास नहीं है। अब इन सड़कों का स्वामित्व देने के लिए शासन को पत्र भेजा है। स्वामित्व मिलने के बाद लोगों की समस्याओं का निस्तारण हो जाएगा।-राजेश निगम, अधिशासी अभियंता लोनिवि।