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हाथरस में खुलेगा न्यू बोर्न केयर यूनिट 

Fri, 18 Mar 2016 12:17 AM IST
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 18 Mar 2016 12:17 AM IST
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New Born Care Unit will open in Hathras
जिला महिला अस्पताल का भवन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो हाथरस
अखिलेश वार्ष्णेय
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हाथरस। प्रसव के बाद अब नवजात शिशु को लेकर इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि जिला महिला अस्पताल में विशेष नवजात देखभाल इकाई (एसएनसीयू) खुलने वाला है। इसके लिए अस्पताल परिसर में ही अलग वार्ड बनाया जाएगा, जिसमें नवजात शिशु की समस्त बीमारी और देखभाल विशेषज्ञ डॉक्टर और आधुनिक उपकरण द्वारा की जाएगी। यहां गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं का इलाज किया जाएगा। 
यूनिट में आधुनिक उपकरण होंगे। प्रसव के बाद नवजात शिशुओं की देखभाल बहुत जरूरी होती है। जानकारों के अनुसार जन्म के बाद एक महीने तक शिशु को सबसे ज्यादा गंभीर बीमारी का खतरा रहता है। देखभाल में थोड़ी भी लापरवाही बच्चों पर भारी साबित होती है। ऐसे में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन ने शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए जिला अस्पताल में नवजात बच्चों की देखभाल के लिए सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट की स्थापना की स्वीकृति दे दी है। जिला अस्पताल स्थित महिला अस्पताल में पुराने लेबर रूम में यूनिट का वार्ड बनाने के लिए जगह का चयन भी कर लिया गया है। करीब 32 लाख रुपये इसके लिए स्वीकृत भी हो चुके हैं। एसएनसीयू बनने के बाद लोगों को प्रसव के बाद नवजात को निजी अस्पताल या बाहरी बड़े अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। गंभीर बीमारी सहित उचित देखभाल जिला महिला अस्पताल में ही मिलने लगेगी। सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट में उन बच्चों को भर्ती किया जाएगा, जो जन्म लेते ही बीमारी से ग्रसित हो जाते हैं। इस यूनिट में तीन बाल रोग विशेषज्ञ और आठ संविदा नर्स को तैनात किया जाएगा, जो कि हर समय बच्चे की देखभाल और साफ सफाई पर ध्यान देंगे। इस यूनिट में अत्याधुनिक मशीनें रहेंगी और जन्म से 28 दिन के बच्चों का परीक्षण के साथ उपचार किया जाएगा। 
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क्या है एसएनसीयू 
सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट(एसएनसीयू) एक प्रकार से नवजात शिशु का वार्ड होगा, जहां पर एक माह तक के बच्चों की गंभीर बीमारी का इलाज किया जाएगा। इस यूनिट में रेडिएंट वार्मर, फोटो थैरेपी यूनिट, वेंटिलर सहित कई प्रकार के आधुनिक चिकित्सकीय उपकरण होंगे। सीएचसी पीएचसी से रेफर बच्चों का इलाज किया जाएगा। 
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मासूमों के लिए साबित होगी संजीवनी
नवजात शिशुओं पर जन्म के बाद बीमारियों का हमला होने की शिकायतें आम होती जा रही हैं। बच्चे को कहीं पीलिया तो नहीं हो गया, वजन कम तो नहीं रह गया या कोई और परेशानी तो नहीं आ गई। इस तरह की सोच में डूबकर अभिभावक तुरंत डॉक्टर के पास दौड़ते हैं। इसके बाद बच्चे का खून टेस्ट कराने की बारी आती है। सबसे पहले एक्सपर्ट की तलाश होती है, जो नन्हीं कलाइयों से नस ढूंढकर खून निकाल सके। कई बार तो बच्चे की नस नहीं मिलती। ऐसे में कई बार बच्चे को हैपेटाइटिस बी और पीलिया जकड़ लेता था, लेकिन यह सब अब हाथरस के जिला महिला अस्पताल में पुरानी बातें होंगी। एनएससीयू में सिर्फ एक मशीन को बच्चे के शरीर से टच करते ही पीलिया की जानकारी हो जाएगी, वहीं चिकित्सक भी चंद मिनटों में बच्चे का उपचार शुरू कर देंगे।  


- एसएनसीयू के लिए प्रस्ताव भेजा गया था, जिसकी स्वीकृति मिल गई है। इसी वित्तीय वर्ष में यह यूनिट खोल दी जाएगी। स्टाफ भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जो कि 26 मार्च तक पूरी कर ली जाएगी। 32 लाख रूपये इस यूनिट के लिए स्वीकृत हो गए हैं। 
- डॉ. रामवीर सिंह, सीएमओ हाथरस
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