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बंदरों का उत्पात : सिविल कोर्ट के फैसले को एडीजे कोर्ट की हरी झंडी
Sun, 27 Sep 2026 02:25 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sun, 27 Sep 2026 02:25 AM IST
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शहर में घूमते बंदरों के झुंड। संवाद
- फोटो : samvad
कमल वार्ष्णेय
हाथरस। शहर में उत्पाती और अल्फा बंदरों के उत्पात से लंबे समय से परेशान नागरिकों के लिए राहत भरी खबर है। अपर जनपद न्यायाधीश (कोर्ट संख्या-01) की अदालत ने नगर पालिका परिषद द्वारा दायर सिविल निगरानी याचिका खारिज करते हुए निचली अदालत और स्थायी लोक अदालत के उस आदेश की पुष्टि कर दी है, जिसमें शहर के उत्पाती बंदरों को पकड़कर सुरक्षित व संरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया था।
शहर के समाजसेवी मधुशंकर अग्रवाल ने शहर में लगातार बढ़ते बंदरों के हमले व उत्पात से मुक्ति दिलाने के लिए जिलाधिकारी, नगर पालिका परिषद, प्रमुख वन्य रक्षक जीव और वनाधिकारी के खिलाफ स्थायी लोक अदालत (पीएलए) के समक्ष वाद (संख्या-60/2022) दायर किया था। 21 मई 2023 को पक्षकारों की आपसी सहमति के आधार पर लोक अदालत ने आदेश दिया कि नगर सीमा के भीतर उत्पात मचा रहे बंदरों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाए। संवाद
नगर पालिका ने जताई थी क्षेत्राधिकार पर आपत्ति
आदेश के अनुपालन के लिए जब निष्पादन (इजराय वाद संख्या-23/2023) सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग) के समक्ष दाखिल हुआ, तो नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी ने तकनीकी व आर्थिक क्षेत्राधिकार के आधार पर आपत्ति दर्ज कराई। सिविल जज ने इस आपत्ति को खारिज कर दिया और 26 नवंबर 2025 को स्थायी लोक अदालत के आदेश का पालन करने के निर्देश जारी किए। आपत्ति खारिज किए जाने के बाद नगर पालिका ने अपर जनपद न्यायाधीश के समक्ष सिविल निगरानी याचिका प्रस्तुत की। सिविल जज ने 31 जनवरी को डीएम को भी पत्र लिखा था तथा 17 फरवरी तक रिपोर्ट तलब की थी।
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अदालत का सख्त रुख
अपर जनपद न्यायाधीश कोर्ट संख्या एक संगीता शर्मा की अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों का परिशीलन करते हुए स्पष्ट किया कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 की धारा 22 इ (5) के तहत स्थायी लोक अदालत का कोई भी अधिनिर्णय (अवॉर्ड) सक्षम सिविल न्यायालय द्वारा उसी प्रकार निष्पादित कराया जा सकता है, मानो वह उसी कोर्ट की डिक्री हो।
पैसों का मामला नहीं : कोर्ट ने साफ कि यह मामला किसी वित्तीय लेनदेन (मनी डिक्री) का नहीं है, बल्कि जनहित और जनसुरक्षा में शहर से बंदरों को स्थानांतरित करने का है, इसलिए इसमें आर्थिक क्षेत्राधिकार का प्रश्न ही नहीं उठता।
हर जगह बंदरों का आतंक
बंदर के हमलों में तीन मौत : इस साल बंदरों के हमले में अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है। फरवरी 2026 में सासनी के गांव बांधनू में गुड्डी देवी (50), सात अप्रैल 2026 को अक्रूर कॉलोनी में शिवानी (18) व 17 सितंबर को हाथरस जंक्शन में देवी किशोर (50) की मौत हो गई थी।
6000 हुए शिकार : जिले में जनवरी से अब तक 6000 लोग बंदरों के शिकार हो चुके हैं। काटने व लहूलुहान होने पर ये लोग एआरवी के लिए सरकारी अस्पताल पहुंचे। वहीं 18 लोग छत से गिरने के कारण घायल हुए हैं।
न्यायालय के निर्णय की जानकारी मिली है। आदेश का अनुपालन किया जाएगा। बंदरों को पकड़ने के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। बंदरों को छोड़ने के लिए उचित स्थान तलाशा जा रहा है।
-रोहित सिंह, ईओ नगर पालिका परिषद हाथरस
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हाथरस। शहर में उत्पाती और अल्फा बंदरों के उत्पात से लंबे समय से परेशान नागरिकों के लिए राहत भरी खबर है। अपर जनपद न्यायाधीश (कोर्ट संख्या-01) की अदालत ने नगर पालिका परिषद द्वारा दायर सिविल निगरानी याचिका खारिज करते हुए निचली अदालत और स्थायी लोक अदालत के उस आदेश की पुष्टि कर दी है, जिसमें शहर के उत्पाती बंदरों को पकड़कर सुरक्षित व संरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया था।
शहर के समाजसेवी मधुशंकर अग्रवाल ने शहर में लगातार बढ़ते बंदरों के हमले व उत्पात से मुक्ति दिलाने के लिए जिलाधिकारी, नगर पालिका परिषद, प्रमुख वन्य रक्षक जीव और वनाधिकारी के खिलाफ स्थायी लोक अदालत (पीएलए) के समक्ष वाद (संख्या-60/2022) दायर किया था। 21 मई 2023 को पक्षकारों की आपसी सहमति के आधार पर लोक अदालत ने आदेश दिया कि नगर सीमा के भीतर उत्पात मचा रहे बंदरों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाए। संवाद
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नगर पालिका ने जताई थी क्षेत्राधिकार पर आपत्ति
आदेश के अनुपालन के लिए जब निष्पादन (इजराय वाद संख्या-23/2023) सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग) के समक्ष दाखिल हुआ, तो नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी ने तकनीकी व आर्थिक क्षेत्राधिकार के आधार पर आपत्ति दर्ज कराई। सिविल जज ने इस आपत्ति को खारिज कर दिया और 26 नवंबर 2025 को स्थायी लोक अदालत के आदेश का पालन करने के निर्देश जारी किए। आपत्ति खारिज किए जाने के बाद नगर पालिका ने अपर जनपद न्यायाधीश के समक्ष सिविल निगरानी याचिका प्रस्तुत की। सिविल जज ने 31 जनवरी को डीएम को भी पत्र लिखा था तथा 17 फरवरी तक रिपोर्ट तलब की थी।
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अदालत का सख्त रुख
अपर जनपद न्यायाधीश कोर्ट संख्या एक संगीता शर्मा की अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों का परिशीलन करते हुए स्पष्ट किया कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 की धारा 22 इ (5) के तहत स्थायी लोक अदालत का कोई भी अधिनिर्णय (अवॉर्ड) सक्षम सिविल न्यायालय द्वारा उसी प्रकार निष्पादित कराया जा सकता है, मानो वह उसी कोर्ट की डिक्री हो।
पैसों का मामला नहीं : कोर्ट ने साफ कि यह मामला किसी वित्तीय लेनदेन (मनी डिक्री) का नहीं है, बल्कि जनहित और जनसुरक्षा में शहर से बंदरों को स्थानांतरित करने का है, इसलिए इसमें आर्थिक क्षेत्राधिकार का प्रश्न ही नहीं उठता।
हर जगह बंदरों का आतंक
बंदर के हमलों में तीन मौत : इस साल बंदरों के हमले में अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है। फरवरी 2026 में सासनी के गांव बांधनू में गुड्डी देवी (50), सात अप्रैल 2026 को अक्रूर कॉलोनी में शिवानी (18) व 17 सितंबर को हाथरस जंक्शन में देवी किशोर (50) की मौत हो गई थी।
6000 हुए शिकार : जिले में जनवरी से अब तक 6000 लोग बंदरों के शिकार हो चुके हैं। काटने व लहूलुहान होने पर ये लोग एआरवी के लिए सरकारी अस्पताल पहुंचे। वहीं 18 लोग छत से गिरने के कारण घायल हुए हैं।
न्यायालय के निर्णय की जानकारी मिली है। आदेश का अनुपालन किया जाएगा। बंदरों को पकड़ने के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। बंदरों को छोड़ने के लिए उचित स्थान तलाशा जा रहा है।
-रोहित सिंह, ईओ नगर पालिका परिषद हाथरस