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रंज-ओ-गम के बीच ताजिए सुपुर्द-ए-खाक

Sat, 24 Oct 2015 11:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूूराे/हाथ्ारस
अमर उजाला ब्यूूराे/हाथ्ारस Updated Sat, 24 Oct 2015 11:36 PM IST
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मोहर्रम की दस तारीख को हजरत मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन की शहादत की याद में ताजियों और अलमों के जुलूस निकाले गए। शहर के अलग-अलग इलाकों से निकले यह जुलूस घंटाघर पहुंचकर एक हो गए और यहां से एक साथ मुरसान गेट स्थित कर्बला पहुंचे। वहां रंज-ओ-गम के माहौल में ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। गमगीन मर्सिए और नौहे गाकर माहौल को गमजदां कर दिया। लोगों की आंखें भर आईं। इस मौके पर शिया नौजवानों ने जहां छुरियों और जंजीरों से मातम कर अपने जिस्म लहूलुहान कर लिए, वहीं सुन्नी अकीदतमंद भी छाती पीटकर इमाम हुसैन और उनके जानिसारों की शहादत का रंज मना रहे थे।
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शिया सोसायटी के जुलूस में खौफनाक मातम
हाथरस। शिया समुदाय का जुलूस ऑल इंडिया शिया सोसायटी की सरपरस्ती में किला गेट स्थित इमाम बारगाह से शुरू हुआ। इससे पहले मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना नवी हैदर ने कहा कि दसवीं तारीख को हजरत इमाम हुसैन और उनके 71 जानिसारों को कर्बला के मैदान में यजीदी फौज ने तीन दिन तक भूखा-प्यासा रखने के बाद शहीद कर दिया था। इमाम हुसैन ने अपनी और अपने जानिसारों की शहादत देकर दीन की हिफाजत की, लेकिन इस्लाम और इंसानियत पर आंच नहीं आने दी। इस मौके पर डॉ. एसजीएस हसन, मुवीन, कमर, तनवीर, सफदर, जाहिद हुसैन, हामिद हुसैन, आबिद हुसैन, हसन मोहम्मद, चांद मियां, एजाज मेहंदी, वकार हुसैन, ताहिर हुसैन, इमरान, सैफ, साहिल, एनुल रजा, शाकिर, मसरूर, जीशान, तकी, बौबी, शुजा, बब्बू, रिजवान, सलमान, कय्यूम, शब्बर आदि अनेक लोग थे।
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अब्बास कमेटी के जुलूस में बांटा शर्बत-लंगर
हाथरस। जौहर की नमाज के बाद ऑल इंडिया शेख जमीअतुल अब्बास कमेटी के बैनर तले भी पूर्व सभासद डॉ. रहीश अहमद अब्बासी के नेतृत्व में किला गेट से जुलूस शुरू हुआ। यहां से लोहट बाजार चौराहा, नजिहाई बाजार, घंटाघर, बांस मंडी चौराहा, मुरसान गेट आदि कदीमी रास्तों से होता हुआ कर्बला पहुंचकर तमाम हुआ। कई जगहों पर शर्बत की प्याऊ लगाई गईं और लंगर बांटा गया। जुलूस में अजीम खान, मिर्जा अजहर बेग, हाजी नवाब, मुशीर अंसारी, राजा, मुस्तकीम, रईस अहमद, शमसाद कुरैशी, साबिर हुसैन, फीरोज अब्बासी, शहजाद खान, वारिस अंसारी, नसरुद्दीन अब्बासी, इस्लाम उस्ताद, गुड्डन, नन्हे अब्बासी, बिल्ले भाई, बाबुद्दीन, चीना भाई, कल्लू भाई, हन्नो भाई, अइया, चौधरी अजमेरी खां, इसरायल खां आदि थे।
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इन इलाकों से भी उठे ताजिए-अलम
शहर के लाला का नगला, कैलाश नगर, नाई का नगला, इगलास अड्डा, मधुगढ़ी आदि इलाकों से भी ताजियों और अलमों के जुलूस गमगीन माहौल में निकाले गए। घंटाघर पहुंचकर यह सभी मुख्य जुलूस में शामिल हो गए और एक साथ कर्बला पहुंचे।


जुलूस में रहे सुरक्षा के तगड़े बंदोबस्त
सिकंदराराऊ में हुई घटना का साया हाथरस पर भी रहा। यही वजह है कि जुलूस के दौरान सुरक्षा के तगड़े इंतजाम रहे। एसडीएम सदर केहरी सिंह, कोतवाली सदर के प्रभारी एके सिंह, कोतवाली हाथरस गेट प्रभारी राजेश्वर त्यागी के अलावा कई थानों की पुलिस फोर्स और पीएसी जुलूस के साथ चल रही थी। ताजियों के सुपुर्द-ए-खाक होने तक फोर्स वहीं जमी रही।



शहर के मुख्य बाजारों में लगा रहा जाम
जुलूस के दौरान शहर के मुख्य बाजारों में जाम लग गया। पहले से ही बेहद संकरे इन बाजारों में वाहन आड़े-तिरछे फंस गए। जुलूस निकलने के बाद भी इन रास्तों पर आवागमन सुचारू होने में काफी वक्त लग गया, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। देर शाम तक शहर के अंदर पूरा ट्रैफिक बाधित था।
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