फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   Rambhadracharya said this in Ramkatha regarding Krishna temple of Mathura

रामभद्राचार्य: मथुरा का कृष्ण मंदिर झूठा है, वह गर्भगृह पर नहीं बना है

Sun, 28 Jan 2024 02:07 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Updated Sun, 28 Jan 2024 02:07 AM IST
सार

हाथरस के लाड़पुर में रामभद्राचार्य की श्रीराम कथा चल रही है। रामभद्रााचार्य ने रामकथा में कहा कि अभी जो कृष्ण मंदिर मथुरा में है, वह झूठा है, वह गर्भगृह पर नहीं बना है, गर्भगृह पर मस्जिद बनी है। रामलला हम लाएं हैं, मंदिर वहीं बनाए हैं। अब काशी विश्वनाथ व कृष्ण जन्मभूमि भी चाहिए। उन्होंने नारा दिया कि कृष्ण कन्हैया हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे।

विज्ञापन
Rambhadracharya said this in Ramkatha regarding Krishna temple of Mathura
लाड़पुर में रामकथा के दौरान स्वामी रामभद्राचार्य से आशीर्वाद लेते भक्त - फोटो : संवाद

विस्तार

रामकथा मर्मज्ञ जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने रामकथा के तीसरे दिन 27 जनवरी को मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थली पर मंदिर बनवाने का आह्वान किया। साथ ही, दक्षिणा में कन्हैयाजी का मंदिर श्रद्धालुओं से मांगा। कहा कि हम नहीं चाहते कि कृष्ण बृज से चले जाएं। अब राधा रानी का कर्तव्य है कि वह देवर की इज्जत रखें, क्योंकि मैं कन्हैया का मित्र हूं। अभी जो कृष्ण मंदिर मथुरा में है, वह झूठा है, वह गर्भगृह पर नहीं बना है, गर्भगृह पर मस्जिद बनी है।

विज्ञापन


गांव लाड़पुर में चल रही कथा में उन्होंने कहा कि रामलला हम लाएं हैं, मंदिर वहीं बनाए हैं। अब काशी विश्वनाथ व कृष्ण जन्मभूमि भी चाहिए। कन्हैया का मंदिर तोड़कर औरंगजेब 400 किलो सोने की मूर्ति लेकर चला गया। भावुक होते हुए कहा कि उस सोने को उसने सीढ़ियों में लगवाया, जो पैरों के नीचे आती हैं, जो मंदिर औरंगजेब ने तुड़वाया था, उसका नाम केशव देव मंदिर था।
विज्ञापन


कृष्ण कन्हैया हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे
रामकथा में वृंदावन से सुदामा कुटी वाले तुलसीदास महाराज का आगमन हुआ। उन्होंने रामभद्राचार्यजी को बिहारी जी का प्रसाद देते हुए आगमन का आमंत्रण दिया। इस पर रामभद्राचार्यजी ने सीधे तौर पर कहा कि बिहारीजी मुझे रिझा रहे हैं, तरह-तरह से बुला रहे हैं, लेकिन मेरी प्रतिज्ञा है कि जब तक कृष्ण मंदिर नहीं बनेगा, तब तक मैं वृंदावन नहीं आउंगा। उन्होंने नारा दिया कि कृष्ण कन्हैया हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रामकथा का अमृतपान करने पहुंचे मंत्री असीम अरुण और जनप्रतिनिधि

स्वामी रामभद्राचार्य महाराज के मुखारबिंद से गांव लाड़पुर में की जा रही रामकथा की अमृत वर्षा का रसपान करने जिले के प्रभारी मंत्री असीम अरुण भी पहुंचे। 26 जनवरी शाम लगभग चार बजे शुरू हुई रामकथा के दौरान मंच पर प्रभारी मंत्री असीम अरुण ने रामभद्राचार्य के चरण छूकर आशीर्वाद लिया। सांसद राजवीर दिलेर व उनके प्रतिनिधि राजेश सिंह गुड्डू के अलावा सदर विधायक अंजुला सिंह माहौर, सिकन्दराराऊ विधायक वीरेन्द्र सिंह राना, भाजपा जिलाध्यक्ष शरद माहेश्वरी ने भी दर्शन किए। रामकथा के दौरान वृंदावनधाम से आईं मंडलियों ने मयूर नृत्य समेत कई रंगारंग प्रस्तुतियां दीं। इस मौके पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। 

रामचरितमानस एहि नामा, सुनत श्रवण पाइ विश्रामा...
गांव लाड़पुर में चित्रकूट धाम से पधारे स्वामी रामभद्राचार्यजी ने 26 जनवरी को मुख्य यजमान अजय वार्ष्णेय व बीना वार्ष्णेय विवाह के 25 वर्ष पूरे होने पर अपनी 1384वीं रामकथा में शिव पार्वती विवाह का वर्णन किया। तीसरे दिन 27 जनवरी को श्रीराम जन्म की कथा की अमृत वर्षा की। पहले दिन की भांति दूसरे व तीसरे दिन चौपाई रामचरितमानस एहि नामा, सुनत श्रवण पाइ विश्रामा से कथा का शुभारंभ किया। दूसरे दिन भगवान शिव के आठ चरित्र का गुणगान किया। बताया कि भगवान शिव के आठ चरित्र मूर्ति रूप में हैं। इसमें पहला जल मूर्ति, दूसरा अग्नि मूर्ति, तीसरा यजमान मूर्ति, चौथा दिन मूर्ति, पांचवां रात्रि मूर्ति, छठा आकाश मूर्ति, सातवां पृथ्वी मूर्ति व आठवां वायु मूर्ति है। रामभद्राचार्यजी ने कहा कि जल का स्वभाव ठंडा होता है, सबको पवित्र कर देता है। सबसे बड़ा स्वरूप यह कि जल जल में मिल जाता है। शिव के मस्तक में गंगा है और राम कथा भी गंगा है। कितनी अच्छी बात है कि आज गंगा राम कथा से कानों में आ रही है। कहते हैं कि अग्नि का स्वरूप तेज है और तेज का गुण है रूप। अग्निमय मूर्ति भगवान शिव श्रीराम के दर्शनों को तरसते हैं और कहते हैं कि किसी ने मेरे राम देखे हैं। इसी तरह सभी आठ चरित्रों का वर्णन किया। इसके बाद शिव बरात कथा का भी वर्णन किया। इस प्रसंग का भक्तों ने खूब आनंद लिया।

शनिवार को रामभद्राचार्यजी ने भगवान श्रीरामजन्म की कथा सुनाई। पूरा पंडाल झूम उठा। पंडाल राममय हो गया। बधाई हो बधाई मेरे प्यारे राम लला की..., अवध में आनन्द भयो, जय कौशल्या लाल की, जय सुमित्रा लाल की...गीत रामभद्राचार्यजी ने सुनाया। भक्तों के बीच खिलौनों की वर्षा की गई। इससे पहले उन्होंने भगवान के अवतारों की कथा का वर्णन किया। कहा कि भगवान राम ब्रह्मा नहीं हैं, विष्णु नहीं हैं, शंकर नहीं हैं, बल्कि उनमें तीनों रहते हैं। स्वामी रामभद्राचार्यजी के मुख से हाथरस में हुई दो राम कथाएं अहम हैं। वर्ष 2019 में राम मंदिर को लेकर आए न्यायालय के निर्णय के बाद हाथरस के बागला कालेज मैदान में रामकथा सुनाई थी। अब अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद कथा हाथरस में ही की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed