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Hathras News: गोवंश में लंपी वायरस का प्रकोप, पशुपालक चिंतित
Thu, 20 Aug 2026 02:15 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Thu, 20 Aug 2026 02:15 AM IST
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गांव कजरौठी में लंपी से पीड़ित गाय। संवाद
- फोटो : Samvad
क्षेत्र में कजरौठी, रमचेला, गिजरौला सहित कई गांवों में गोवंश में लंपी वायरस के बढ़ते प्रकोप से पशुपालक परेशान हैं। बीमारी की चपेट में आने से दुधारू गायों में दूध उत्पादन तेजी से घट रहा है। निजी पशु चिकित्सकों ने भी गोवंश के लंपी वायरस से पीड़ित होने की पुष्टि की है।
कजरौठी निवासी पशुपालक बलवीर सिंह ने बताया कि लंपी वायरस की चपेट में आने के बाद दुधारू गायों का दूध सूख रहा है। निजी पशु चिकित्सकों से महंगा इलाज कराने में पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। बीमारी से प्रभावित गायों में तेज बुखार, त्वचा पर गांठें, दूध में कमी, आंख और नाक से लगातार पानी आना तथा सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं।
कजरौठी निवासी राजकुमार सिंह ने बताया कि निजी चिकित्सकों से महंगा इलाज कराने के बावजूद पशुओं को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। पशु चिकित्सालय ऊंचागांव (सुसाइन) में है, लेकिन वहां चिकित्सक की तैनाती न होने से पशुपालकों को काफी परेशानी हो रही है। पशुपालक उपचार की उम्मीद लेकर चिकित्सालय पहुंचते हैं, लेकिन चिकित्सक नहीं मिलने पर उन्हें निराश लौटना पड़ता है।
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पशुपालकों ने संबंधित विभाग से गांवों में पशु चिकित्सा टीम भेजकर बीमार पशुओं की जांच, उपचार और आवश्यक दवाओं की व्यवस्था कराने के साथ ऊंचागांव पशु चिकित्सालय में चिकित्सक की तैनाती कराने की मांग की है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डाॅ. विजय सिंह का कहना है कि जल्द ही गांव में टीम को भेजकर पीड़ित पशुओं की जांच कराई जाएगी। संवाद
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कजरौठी निवासी पशुपालक बलवीर सिंह ने बताया कि लंपी वायरस की चपेट में आने के बाद दुधारू गायों का दूध सूख रहा है। निजी पशु चिकित्सकों से महंगा इलाज कराने में पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। बीमारी से प्रभावित गायों में तेज बुखार, त्वचा पर गांठें, दूध में कमी, आंख और नाक से लगातार पानी आना तथा सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं।
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कजरौठी निवासी राजकुमार सिंह ने बताया कि निजी चिकित्सकों से महंगा इलाज कराने के बावजूद पशुओं को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। पशु चिकित्सालय ऊंचागांव (सुसाइन) में है, लेकिन वहां चिकित्सक की तैनाती न होने से पशुपालकों को काफी परेशानी हो रही है। पशुपालक उपचार की उम्मीद लेकर चिकित्सालय पहुंचते हैं, लेकिन चिकित्सक नहीं मिलने पर उन्हें निराश लौटना पड़ता है।
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पशुपालकों ने संबंधित विभाग से गांवों में पशु चिकित्सा टीम भेजकर बीमार पशुओं की जांच, उपचार और आवश्यक दवाओं की व्यवस्था कराने के साथ ऊंचागांव पशु चिकित्सालय में चिकित्सक की तैनाती कराने की मांग की है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डाॅ. विजय सिंह का कहना है कि जल्द ही गांव में टीम को भेजकर पीड़ित पशुओं की जांच कराई जाएगी। संवाद