{"_id":"697ca69596b63865a509c629","slug":"investigation-into-the-death-of-four-buffaloes-2026-01-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hathras News: चार भैसों की मौत के बाद हुई जांच, फेफड़े-लिवर और किडनी मिली सही, हृदय में पाई गई खून की कमी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hathras News: चार भैसों की मौत के बाद हुई जांच, फेफड़े-लिवर और किडनी मिली सही, हृदय में पाई गई खून की कमी
Sat, 31 Jan 2026 12:10 AM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: चमन शर्मा
Updated Sat, 31 Jan 2026 12:10 AM IST
सार
चार भैसों की मौत के बाद जांच हुई। जांच में इसमें सभी स्वास्थ्य मानक सामान्य पाए गए हैं। एक भैंस जिसे बुखार और कंपकंपी की शिकायत थी, वह उपचार के बाद अब स्वस्थ है। मृत भैसों में मौत से पहले बीमारी के कोई खास लक्षण नहीं थे।
विज्ञापन
भैंस प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सादाबाद के गांव मस्यां में पिछले दिनों हुई चार भैसों की मौत की छानबीन हुई है। एक भैंस का पोस्टमार्टम किया गया, जिसमें फेफड़े, लिवर और किडनी सामान्य पाए गए, लेकिन इसके हृदय में खून की कमी पाई गई। मथुरा के पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञों की टीम ने गांव में मृत भैसों की जांच पड़ताल की है। गांव में कोई बीमारी फैलने की आशंका के चलते पशुपालक बेहद परेशान थे।
विज्ञापन
पशुपालक सुनील कुमार की भैंस के खून के नमूने लिए गए। इसकी सीवीसी जांच की गई। डाॅ. पवित्र के अनुसार इसमें सभी स्वास्थ्य मानक सामान्य पाए गए हैं। एक भैंस जिसे बुखार और कंपकंपी की शिकायत थी, वह उपचार के बाद अब स्वस्थ है। टीम ने छानबीन में पाया कि मृत भैसों में मौत से पहले बीमारी के कोई खास लक्षण नहीं थे। कॉलेज डीन के निर्देश पर डॉ.उदित जैन, पैथोलॉजी विभाग से डॉ.नीरज गंगवार और मेडिसिन विभाग से डॉ. शंकर सिंह की टीम ने 24 जनवरी को गांव का दौरा किया। इस दौरान स्थानीय डिप्टी सीवीओ डॉ. पवित्र जीत सिंह भी मौजूद रहे।
विज्ञापन
जांच टीम ने गांव में फिलहाल स्थिति को नियंत्रण में बताया है। विशेषज्ञों ने पशुपालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। इसमें कहा गया है कि बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें। बाड़े में चूने या फिनाइल के घोल से छिड़काव करें, जिससे बीमारियां फैलाने वाले छोटे कीटाणुओं की रोकथाम हो सके। पशुओं को सुपाच्य चारा व ताजा पानी दिया जाए। पशुओं को बाहर न चराएं।
विज्ञापन