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महंगाई : भूसे के दामों में लगी आग, पशुओं के लिए चारे का संकट

Fri, 22 May 2026 02:20 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Fri, 22 May 2026 02:20 AM IST
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Inflation: Soaring Straw Prices Spark Fodder Crisis for Livestock
मेंडू रोड सिटी स्टेशन के सामने भूसा की आढ़त पर बिकता भूसा। संवाद - फोटो : Samvad
बेमौसम बारिश के कारण गेहूं की कम पैदावार और रकबे में आई कमी के चलते इस समय भूसे की कीमतें आसमान छू रही हैं। अमूमन मई के महीने में नई फसल आने के बाद भूसे के दाम कम हो जाते थे, लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल उलट है। भूसे की बेतहाशा बढ़ती कीमतों ने जिले के पशुपालकों के बजट को पूरी तरह बिगाड़कर रख दिया है।
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पिछले साल मई महीने के आखिर में जिले के बाजारों में भूसे के भाव 700 से 800 रुपये प्रति क्विंटल के बीच थे। इस बार बेमौसम बारिश के कारण किसानों की गेहूं की फसल बर्बाद हो गई, जिससे भूसे की आवक ठप हो गई और कीमतों में अचानक उछाल आ गया। मेंडू रोड स्थित भूसे की आढ़त पर वर्तमान में भूसा 1400 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है, जो पिछले साल की तुलना में करीब दोगुना है।
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ती साल में नौ हजार हेक्टेयर घटा गेहूं का रकबा
हाथरस मुख्य रूप से आलू उत्पादक जिला माना जाता है। अधिक मुनाफे के चक्कर में यहां के किसानों का रुझान आलू और मक्का जैसी फसलों की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। इस कारण गेहूं की बुवाई का क्षेत्रफल लगातार सिमटता जा रहा है। कृषि विभाग के आंकड़े गवाही देते हैं कि पिछले तीन सालों में ही गेहूं का रकबा करीब 9,500 हेक्टेयर घट गया है। पिछले साल की अपेक्षा इस साल गेहूं का रकबा करीब पांच हजार हेक्टेयर कम हुआ है।
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बाहरी राज्यों और जिलों पर निर्भरता

जिले में गेहूं उगाने वाले किसानों की संख्या जहां 45 हजार के आसपास है और पशुपालकों की संख्या करीब चार लाख है। मांग के मुकाबले स्थानीय स्तर पर भूसे की उपलब्धता न के बराबर है। यही वजह है कि हाथरस के पशुपालक पूरी तरह से पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, झांसी और बरेली से आने वाले भूसे पर निर्भर हो गए हैं। बाहर से आने के कारण इसमें ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी जुड़ जाता है, जिससे कीमतें और बढ़ गई हैं।







वर्ष गेहूं का क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)

2023-24 81,622 हेक्टेयर

2024-25 79,180 हेक्टेयर



2025-26 72,124 हेक्टेयर





बेमौसम बारिश के कारण स्थानीय स्तर पर गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। जिले में भूसे की भारी किल्लत है। इस समय पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, झांसी और बरेली समेत अन्य दूर-दराज के इलाकों से भूसा मंगाया जा रहा है। बाहर से माल आने और भाड़ा बढ़ने के कारण ही दाम बढ़े हैं।

-राजन, थोक भूसा विक्रेता, मेंडू रोड।






मैं डेयरी और पशुओं के लिए भूसा खरीदने आया था, लेकिन आढ़त पर भाव सुनकर होश उड़ गए। इस समय बाजार में 1200 से 1500 रुपये क्विंटल तक भूसा मिल रहा है। बेमौसम बारिश ने सब तबाह कर दिया। महंगाई के कारण अब पशुओं को पालना और दूध का धंधा चलाना बेहद मुश्किल हो गया है।
-अली मोहम्मद, पशुपालक, किला गेट, हाथरस।
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