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Hathras News: कैसे आए मजा जिंदगी के झूठे अफसाने में...
Tue, 28 Feb 2023 01:29 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Tue, 28 Feb 2023 01:29 AM IST
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कवि चौपाल में काव्यपाठ करते कवि।
- फोटो : संवाद
बुजुर्ग एवं कवियों की सामाजिक साहित्यिक संस्था साहित्यानंद की ओर से सोमवार को कवि चौपाल का आयोजन ब्रजभाषा कवि रोशन लाल की अध्यक्षता में किया गया। कवि चौपाल का संचालन मुरारी लाल शर्मा मधुर ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए वीरेंद्र जैन नारद ने कहा कि कैसे आए मजा जिंदगी के झूठे अफसाने में, अब जमीर बिकता लोगों का आने दो चार आने में। हनीफ संदली ने कहा कि साल के दिन यूं आते जाते उम्र तेरी कट जाएगी, बचपन है एक्सप्रेस ट्रेन, डीलेक्स जवानी है, तेरी स्टेशन के आते आते पैसेंजर पिट जाएगी। कवि राम निवास उपाध्याय ने कहा- तलवार के सिपाही सलवार में छिपे हैं, म्यानों से निकल कर वे म्यानी में जा छिपे हैं।
कवि रोशन लाल वर्मा ने सुनाया- विरह वेदना की कर्कश रज चुभ चुभ कर, मेरे तन में भरती है अनुराग अलौकिक वो भी मेरे जीवन में...। कवि वीरपाल सिंह ने सुनाया- भाव बिन भगवान मिले कैसे, मैडम बिन रात कटै कैसे...। रविराज सिंह ने सुनाया- ये धरा चाहिए ये गगन चाहिए, चांद तारों सा रोशन चमन चाहिए...। जयंती प्रसाद पाठक, डॉ. कासिम अली, मुरारी लाल की रचनाओं को भी खूब सराहा गया। अंत में दिवंगत कवि दुर्गा प्रसाद भॅवरी, शायर डॉ. कय्यूम खां को याद किया गया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए वीरेंद्र जैन नारद ने कहा कि कैसे आए मजा जिंदगी के झूठे अफसाने में, अब जमीर बिकता लोगों का आने दो चार आने में। हनीफ संदली ने कहा कि साल के दिन यूं आते जाते उम्र तेरी कट जाएगी, बचपन है एक्सप्रेस ट्रेन, डीलेक्स जवानी है, तेरी स्टेशन के आते आते पैसेंजर पिट जाएगी। कवि राम निवास उपाध्याय ने कहा- तलवार के सिपाही सलवार में छिपे हैं, म्यानों से निकल कर वे म्यानी में जा छिपे हैं।
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कवि रोशन लाल वर्मा ने सुनाया- विरह वेदना की कर्कश रज चुभ चुभ कर, मेरे तन में भरती है अनुराग अलौकिक वो भी मेरे जीवन में...। कवि वीरपाल सिंह ने सुनाया- भाव बिन भगवान मिले कैसे, मैडम बिन रात कटै कैसे...। रविराज सिंह ने सुनाया- ये धरा चाहिए ये गगन चाहिए, चांद तारों सा रोशन चमन चाहिए...। जयंती प्रसाद पाठक, डॉ. कासिम अली, मुरारी लाल की रचनाओं को भी खूब सराहा गया। अंत में दिवंगत कवि दुर्गा प्रसाद भॅवरी, शायर डॉ. कय्यूम खां को याद किया गया।
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