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हाथरस में कितने बूचड़खाने पुलिस बोली एक भी नहीं
अमर उजाला, हाथ्ारस
Updated Tue, 21 Mar 2017 12:11 AM IST
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9 करोड का 'युवराज'
योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद से ही अवैध बूचड़खानों पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। सोमवार को सरकार ने पुलिस महकमे से पशु वधशालाओं का ब्योरा मांगा। पुलिस ने बिना देर किए आनन-फानन में सरकार को अपनी रिपोर्ट भेज दी। वहीं नगर पालिका प्रशासन ने भी अवैध बूचड़खानों को बंद कराए जाने की बात कही है।
सरकार ने चार बिंदुओं पर यह रिपोर्ट पुलिस से मांगी थी। हर थाने से पूछा गया था कि उनके क्षेत्र में कितनी पशु वधशालाएं हैं। इन वधशालाओं में हर रोज कितने पशु काटे जाते हैं। पुलिस के पास इसका कोई प्रमाणिक ब्योरा तो नहीं था, लेकिन पुलिस ने लाइसेंस और एनओसी के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की।
हालांकि जिले में छोटे-बड़े कई अवैध बूचड़खाने हैं। कई इलाके ऐसे भी हैं, जहां मानक को ताक पर रखकर पशुओं का कटान होता है। ऐसे इलाकों से गुजरने पर भयंकर बदबू का सामना भी करना पड़ता है और संक्रमण का खतरा भी रहता है। जिले में चलने वाले ज्यादातर बूचड़खाने अवैध हैं।
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जो बूचड़खाने चल रहे हैं, उन पर न तो लाइसेंस है और न ही एनओसी है। यही वजह है कि पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में शहर के अंदर कोई बूचड़खाना न होने की बात कही है। एएसपी संसार सिंह का कहना है कि जिले में कोई भी बूचड़खाना फिलहाल संचालित नहीं है।
वहीं चेयरमैन डौली माहौर का कहना है कि हाथरस शहर में किसी के पास पशुओं के कटान व बिक्री का न तो कोई लाइसेंस है और न ही किसी पर एनओसी है। यदि शहर में अवैध रूप से खुलेआम मांस की बिक्री हो रही है तो नगर पालिका द्वारा कार्रवाई की जाएगी। अवैध बूचड़खानों को बंद कराया जाएगा।
मालूम हो कि अवैध बूचड़खानों में हर रोज कई दुधारू पशु भी काटे जाते हैं। वहीं वैध बूचड़खानों में तय संख्या से कई गुना ज्यादा पशुओं को काटा जाता है। ज्यादा पशु कटान के कारण पशु चोरी की समस्या बढ़ती जा रही है। पशु कटान से दूध का संकट भी पैदा हो गया है और पशु चोरों के आतंक से कानून व्यवस्था के बिगड़ने का खतरा भी रहता है।
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सरकार ने चार बिंदुओं पर यह रिपोर्ट पुलिस से मांगी थी। हर थाने से पूछा गया था कि उनके क्षेत्र में कितनी पशु वधशालाएं हैं। इन वधशालाओं में हर रोज कितने पशु काटे जाते हैं। पुलिस के पास इसका कोई प्रमाणिक ब्योरा तो नहीं था, लेकिन पुलिस ने लाइसेंस और एनओसी के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की।
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हालांकि जिले में छोटे-बड़े कई अवैध बूचड़खाने हैं। कई इलाके ऐसे भी हैं, जहां मानक को ताक पर रखकर पशुओं का कटान होता है। ऐसे इलाकों से गुजरने पर भयंकर बदबू का सामना भी करना पड़ता है और संक्रमण का खतरा भी रहता है। जिले में चलने वाले ज्यादातर बूचड़खाने अवैध हैं।
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जो बूचड़खाने चल रहे हैं, उन पर न तो लाइसेंस है और न ही एनओसी है। यही वजह है कि पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में शहर के अंदर कोई बूचड़खाना न होने की बात कही है। एएसपी संसार सिंह का कहना है कि जिले में कोई भी बूचड़खाना फिलहाल संचालित नहीं है।
वहीं चेयरमैन डौली माहौर का कहना है कि हाथरस शहर में किसी के पास पशुओं के कटान व बिक्री का न तो कोई लाइसेंस है और न ही किसी पर एनओसी है। यदि शहर में अवैध रूप से खुलेआम मांस की बिक्री हो रही है तो नगर पालिका द्वारा कार्रवाई की जाएगी। अवैध बूचड़खानों को बंद कराया जाएगा।
मालूम हो कि अवैध बूचड़खानों में हर रोज कई दुधारू पशु भी काटे जाते हैं। वहीं वैध बूचड़खानों में तय संख्या से कई गुना ज्यादा पशुओं को काटा जाता है। ज्यादा पशु कटान के कारण पशु चोरी की समस्या बढ़ती जा रही है। पशु कटान से दूध का संकट भी पैदा हो गया है और पशु चोरों के आतंक से कानून व्यवस्था के बिगड़ने का खतरा भी रहता है।