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हाथरस : जेल गए, कोड़ों की मार खाई, फिर भी अड़े रहे दिव्य

Fri, 12 Aug 2022 11:21 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 12 Aug 2022 11:21 PM IST
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Hathras: Went to jail, got whipped, yet the divine remained adamant
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बद्री प्रसाद दिव्य का फाइल फोटो। - फोटो : SHAPHU
मुकेश बाबू शर्मा
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सहपऊ। कस्बा के पहले 10 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की सूची में स्वर्गीय बद्री प्रसाद दिव्य का जिक्र भी है। वह कस्बे में रहकर छोटी सी दुकान चलाते थे। उन्हें कविता और गीत लिखने और गाने का भी शौक था। स्वतंत्रता आंदोलन के समय गांधी-नेहरू के भाषणों की वजह से उनका कवि हृदय खुद को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बगावत करने से रोक नहीं सका। उन्होंने क्षेत्र के साथ प्रदेश के अन्य जिलों में जाकर देश प्रेम से ओतप्रोत कविता एवं भाषण देकर लोगों में देशभक्ति की अलख जगाई।
जब अंग्रेेजी शासन को पता चला कि वह आम जनता में उसके खिलाफ असंतोष पैदा कर रहे हैं तो उन्हें वर्ष 1930 में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इसके बाद कई मौकों पर अंग्रेजों के खिलाफ आवाज बुलंद करने पर अंग्रेजों ने उनको कोड़ों की सजा दी और कई बार जुर्माना भी लगाया।
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उनके पौत्र जादूगर अखिलेश जैसवाल ने बताया कि परिवार में रेवती लाल के पांच पुत्रों में सबसे बड़े बद्री प्रसाद जैसवाल थे। वह अच्छे कवि और लेखक के साथ अच्छे वक्ता भी थे। अपनी ओजस्वी कविताओं से आंदोलनकारियों में जोश भरते रहते थे। इस कारण उनका नाम दिव्य पड़ गया और वह इसी नाम से प्रसिद्ध हो गए। इसी नाम से वह कविता लिखते थे। वर्तमान में उनके तीन पुत्र एवं चार बेटियों में केवल एक बेटी ही जीवित हैं।
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रामायण और गीता उन्हें कंठस्थ थी। उस जमाने में टीवी और रेडियो नहीं थे। वह रात्रि के समय सैकड़ों लोगों को कविता सुनाते थे। उनकी आवाज इतनी बुलंद थी कि उनको माइक या लाउडस्पीकर की भी जरूरत नहीं पड़ती थी। उनके एक पुत्र सत्यप्रकाश जैसवाल भी ख्याति प्राप्त कवि और लेखक रहे हैं। आज दिव्य के एक पौत्र भी वर्ल्ड रिकॉर्ड प्राप्त जादूगर अखिलेश नाम से प्रसिद्ध हैं। दिव्य कस्बे के कार्यवाहक चेयरमैन भी रह चुके हैं। उनकी कई कविताएं आज भी बृज क्षेत्र में प्रचिलित हैं। संवाद
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