{"_id":"5f5a5ae98ebc3e44677e6fdd","slug":"hathras-training-given-for-anemia-free-india-program-hathras-news-ali243470794","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाथरस: एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के लिए दिया प्रशिक्षण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाथरस: एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के लिए दिया प्रशिक्षण
विज्ञापन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिले में एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत कर्मचारियों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया। प्रदेश में एनीमिया नियंत्रण के लिए चार सेवाएं दी जानी हैं, जिनमें आयरन फोलिक एसिड संपूर्ण कार्यक्रम, एनडीडी कार्यक्रम के अंतर्गत कृमि नियंत्रण और डिजिटल विधियों का प्रयोग करते हुए एनीमिया की जांच और देखरेख के साथ उपचार, सघन व्यवहार बदलाव संवाद अभियान का संचालन शामिल है।
प्रशिक्षण में बताया गया कि एनीमिया एक प्रमुख जनस्वास्थ्य समस्या है, जिसका मुख्य कारण अल्प पोषण तथा खान-पान में लौह तत्व की कमी का होना है। किशोरावस्था में होने वाली तीव्र शारीरिक वृद्धि तथा माहवारी के दौरान रक्तस्त्राव के कारण किशोरियों में एनीमिया और उससे जुड़ी कमजोरी की संभावना अधिक हो जाती है। सरकार की ओर से किशोर-किशोरियों में एनीमिया की रोकथाम के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। प्रशिक्षण में एनीमिया को नियंत्रण करने के उपाय बताए गए।
यह भी बताया गया कि गंभीर एनीमिया में किस तरह रेफर करके उपचार किया जा सकता। किस विभाग की क्या जिम्मेदारी है। इस मौके पर एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम नोडल/ अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजेंद्र सिंह, जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी सुचिका सहाय, डीईआईसी मैनेजर डॉ. देवेंद्र कुस्तवार, अर्बन कोआर्डिनेटर पुष्पेंद्र सिंह आदि मौजूद थे। अभियान में स्वास्थ्य सहित चार अन्य विभाग भी शामिल हैं, जिनमें बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग, बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा व पंचायतराज विभाग शामिल हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत कर्मचारियों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया। प्रदेश में एनीमिया नियंत्रण के लिए चार सेवाएं दी जानी हैं, जिनमें आयरन फोलिक एसिड संपूर्ण कार्यक्रम, एनडीडी कार्यक्रम के अंतर्गत कृमि नियंत्रण और डिजिटल विधियों का प्रयोग करते हुए एनीमिया की जांच और देखरेख के साथ उपचार, सघन व्यवहार बदलाव संवाद अभियान का संचालन शामिल है।
प्रशिक्षण में बताया गया कि एनीमिया एक प्रमुख जनस्वास्थ्य समस्या है, जिसका मुख्य कारण अल्प पोषण तथा खान-पान में लौह तत्व की कमी का होना है। किशोरावस्था में होने वाली तीव्र शारीरिक वृद्धि तथा माहवारी के दौरान रक्तस्त्राव के कारण किशोरियों में एनीमिया और उससे जुड़ी कमजोरी की संभावना अधिक हो जाती है। सरकार की ओर से किशोर-किशोरियों में एनीमिया की रोकथाम के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। प्रशिक्षण में एनीमिया को नियंत्रण करने के उपाय बताए गए।
विज्ञापन
यह भी बताया गया कि गंभीर एनीमिया में किस तरह रेफर करके उपचार किया जा सकता। किस विभाग की क्या जिम्मेदारी है। इस मौके पर एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम नोडल/ अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजेंद्र सिंह, जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी सुचिका सहाय, डीईआईसी मैनेजर डॉ. देवेंद्र कुस्तवार, अर्बन कोआर्डिनेटर पुष्पेंद्र सिंह आदि मौजूद थे। अभियान में स्वास्थ्य सहित चार अन्य विभाग भी शामिल हैं, जिनमें बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग, बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा व पंचायतराज विभाग शामिल हैं।
विज्ञापन